Sunday, May 31, 2026
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मौत का सबब बन रही जहरीली शराब

SAMVAD

 


ALI KHANतमिलनाडु के कल्लाकुरिची जिले में जहरीली शराब पीने से मरने वालों का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है। यहां अब तक जहीरीली शराब के सेवन से 50 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री एम सुब्रमण्यम ने अब तक 53 मौतें होने की पुष्टि की है। वहीं, 100 से भी अधिक लोगों का ईलाज अस्पताल में चल रहा हैं। बता दें कि इस मामले की जांच सीबी-सीआईडी कर रही है। इस मामले में 49 वर्षीय (अवैध शराब विक्रेता) के. कन्नुकुट्टी को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। उसके पास से जब्त की गई करीब 200 लीटर अवैध शराब की जांच में सामने आया कि उसमें घातक ‘मेथनॉल’ मौजूद था। आज यह बेहद चिंताजनक बात है कि देशभर में जहरीली शराब पीने से होने वाली मौतों का सिलसिला थमने का नाम ही नहीं ले रहा। हर दिन जहरीली शराब पीने से होने वाली मौतों की खबरें सुर्खियां बटोरते हुए पढ़ी और सुनी जा सकती हैं। देश के कई राज्यों की सरकारों ने शराबबंदी की है। फिर भी अवैध शराब का कारोबार बड़े पैमाने पर चल रहा है। पिछले कुछ वर्षों में जहरीली शराब के सेवन से होने वाली मौतों में जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो यानी एनसीआरबी के आंकड़ों की मानें तो देश में नकली शराब के सेवन से वर्ष 2016 में मौत के 1,054 मामले सामने आए, जबकि वर्ष 2017 में इससे 1,510, वर्ष 2018 में 1,365, वर्ष 2019 में 1,296 और वर्ष 2020 में 947 लोगों की जान गई। आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2021 में पूरे देश में नकली शराब के सेवन से जुड़ी 708 घटनाओं में 782 लोगों की मौत हुई। ?इस दौरान उत्तर प्रदेश में सर्वाधिक 137, पंजाब में 127 और मध्य प्रदेश में 108 लोगों की जान गई। एनसीआरबी के मुताबिक, 2016 से 2021 तक छह साल की अवधि में नकली शराब ने भारत में कुल 6,954 लोगों की जान ली। इस लिहाज से नकली शराब के सेवन से देश में प्रतिदिन औसतन तीन से अधिक लोगों की मौत हो रही है। उल्लेखनीय है कि 2016 से 2021 के बीच नकली शराब के सेवन से मध्य प्रदेश में सर्वाधिक 1,322 मौतें हुईं, जबकि कर्नाटक में इस अवधि में 1,013 और पंजाब में 852 लोगों की जानें गई।

ऐसे में बड़ा सवाल कि आखिर जहरीली शराब के पांव पसारते कारोबार पर अंकुश लगाने में सरकारें नाकामयाब क्यों साबित हो रही है? आखिर जहरीली शराब लोगों के सेहत के साथ कब तक खिलवाड़ करती रहेगी? आज हमें यह समझने की आवश्यकता है कि शराब के नशे ने न केवल लोगों की सेहत के साथ कुठाराघात किया है, बल्कि हमारी सामाजिक व्यवस्था को भी बिगाड़ने का काम किया है। देश में अवैध और जहरीली शराब से होने वाली मौतों के चलते बड़ी संख्या में महिलाओं के सुहाग उजड़ रहे हैं। साथ ही बच्चे अनाथ हो रहे हैं। लिहाजा, सरकारों को जहरीली शराब पर शिकंजा कसने की आवश्यकता है।

इस बीच आम-आदमी के मस्तिष्क में यह सवाल कौंधना स्वाभाविक है कि आखिर शराब जहरीली क्यों हो जाती है? बता दें कि जब कच्ची शराब को अधिक नशीली बनाने के उद्देश्य से इसमें यूरिया, आॅक्सिटोसिन जैसे केमिकल मिला दिए जाते हैं तब मेथिल अल्कोहल का निर्माण हो जाता है। जो इंसानी शरीर के लिए बेहद जानलेवा होता है। मेथिल अल्कोहल के शरीर में जाते ही केमिकल रिएक्शन की प्रक्रिया बड़ी तेजी से काम करती है। दरअसल, यह भी जानना जरूरी है कि मेथिल अल्कोहल क्या है? बता दें कि मेथिल पदार्थ अल्कोहल ग्रुप का सबसे सरल प्रॉडक्ट है। एंटीफ्रीजर में फ्रीजिंग लेवल कम करने के लिए इसे पानी में मिलाया जाता है। यह एक अच्छा विलायक है, जिसका इस्तेमाल दूसरे पदार्थों का घोल बनाने में किया जाता है। जैसे कि ईथर, क्लोरोफार्म, पॉलिश, वार्निश, दवाओं के घोल, कृत्रिम रंग, पारदर्शी साबुन, इत्र वगैरह में। यह स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक होता है। इससे शरीर के अंदरूनी अंग काम करना बंद कर देते हैं। लिहाजा, व्यक्ति की मौत हो जाती है।

हमें मालूम हो कि शराब के लगातार सेवन से शरीर के लगभग सभी अंगों पर बुरा प्रभाव पड़ता है। शराब कई प्रकार की बीमारियों को न्यौता देने का काम भी करती है जैसे कि अपच, अल्सर, यकृत की बीमारी, लिवर का पूरी तरह से क्षतिग्रस्त होने, स्नायु तंत्र की कमजोरी, हृदय संबंधी रोग विशेष रूप से रक्तचाप, भूलने की बीमारी और कैंसर वगैरह। इस तरह से हम देखते है कि शराब के सेवन से शरीर के लगभग सभी अंग प्रभावित होते ही हैं। साथ ही मस्तिस्क की कोशिकाएं भी खत्म होने लगती है। मानसिक रोग उत्पन्न होते है तथा व्यक्ति में परिवर्तन आ जाता है। ऐसे में आवश्यकता इस बात की है कि समय रहते जहरीली शराब पर शिकंजा कसा जाए।

हमें यह समझने की आवश्यकता है कि शराब का जहरीला होना सिर्फ हादसा नहीं है। व्यवस्था में कहीं न कहीं खोट है, लापरवाही है। इसका खमियाजा समाज को भुगतान पड़ रहा है। आज शराब माफिया पर कठोर कार्रवाई की आवश्यकता है। सरकारी भ्रष्ट तंत्र को जहरीली शराब से मौत के मामले में मुख्य रूप से जिम्मेदार ठहराया जाता रहा है। यह सही है कि प्रशासन सख्ती बरते और संवेदनशीलता अपनाए, तो अवैध रूप से शराब बनना बंद हो सकती है और मौतों का सिलसिला भी थम सकता है। हमें यह भी समझना होगा कि शराब पीना एक व्यसन है। व्यसन को महज कानून बनाकर रोका नहीं जा सकता। इसके लिए सरकारी स्तर पर जागरूकता पैदा करने के साथ-साथ समाज तथा परिवार को भी अपनी भूमिका का निर्वाह करना होगा। शराबबंदी जन भागीदारी के साथ ही सफल हो सकती है।


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