Saturday, May 2, 2026
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पंचायत चुनाव: आरक्षण स्पष्ट होते ही बिछने लगी सियासी चौसर

  • कई दिग्गजों की प्रतिष्ठा रहेंगी दांव पर
  • शाहिद मंजूर का पुत्र और मनिंदरपाल सिंह नहीं लडेंगे चुनाव

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव आरक्षण की स्थिति साफ हो गई है। जिला पंचायत चुनाव राजनीतिक दलों के लिए भी अहम होता है, इसके लिए कई दिग्गज राजनीति के इस अखाड़े में हाथ आजमाएंगे। भाजपा के लिए भी यह चुनाव बेहद महत्वपूर्ण हैं। क्योंकि कृषि कानून को लेकर किसान आंदोलित हैं।

ऐसे में गांव में भाजपा की प्रतिष्ठा भी दांव पर रहेगी। सपा व रालोद गठबंधन को पंचायत चुनाव में अपने वजूद की लड़ाई लड़नी होगी। चुनाव चिन्ह पर शायद ही कोई भी दल अपने प्रत्याशियों को चुनाव मैदान में उतारे, लेकिन इतना अवश्य है कि गांवों में राजनीति की चौसर बिछने लगी हैं।

हस्तिनापुर ब्लॉक से कुलविंदर सिंह वार्ड एक से चुनाव लड़े थे। इस बार भी उन्होंने भाजपा से इसी वार्ड से चुनाव लड़ने का ऐलान किया है। सपा-रालोद उनकी घेराबंदी कर सकता है। वार्ड दो से सपा नेता अतुल प्रधान की पत्नी सीमा प्रधान चुनाव लड़ी थी। इस बार भी वो चुनाव में ताल ठोक सकती हैं।

सीमा प्रधान जिला पंचायत की अध्यक्ष भी रह चुकी हैं। इसलिए उनकी घेराबंदी भाजपा विधायक दिनेश खटीक कर सकते हैं। वार्ड छह से कोपरेटिव बैंक के चेयरमैन मनिंदरपाल सिंह चुनाव लड़े थे तथा वार्ड आठ से उनकी पत्नी चुनाव लड़ी थी। दोनों ही चुनाव हार गए थे, लेकिन इस बार उन्होंने चुनाव नहीं लड़ने के संकेत दिये हैं।

मनिंदरपाल सिंह जिला पंचायत के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। वार्ड 14 से भाजपा नेत्री मीनाक्षी भराला जिला पंचायत सदस्य रह चुकी हैं तथा इस बार भी चुनाव मैदान में ताल ठोंक रही हैं। उनकी घेराबंदी रालोद व सपा कर सकती है। क्योंकि वार्ड 14 का क्षेत्र जाट बाहुल्य है, ऐसे में उनको जीतने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ सकती है।

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खरखौदा के वार्ड 21 से एमएलसी डा. सरोजनी अग्रवाल अपनी पुत्री को चुनाव मैदान में उतार सकती है। क्योंकि यह वार्ड सामन्य घोषित किया गया है। पहले भी उनके परिवार से चुनाव इसी वार्ड से लड़ा गया था। यहां उन्हें पूर्व कैबिनेट मंत्री शाहिद मंजूर समर्थकों से कड़ी टक्कर दी जा सकती है।

क्योंकि यह वार्ड किठौर विधानसभा का हिस्सा है। वार्ड-22 से ब्लॉक प्रमुख ओमपाल गुर्जर चुनाव की तैयारी कर रहे थे, लेकिन ये वार्ड अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हो गया है। इस तरह से सपा नेता ओमपाल गुर्जर को झटका लगा है। इस वार्ड पर कौन चुनाव लड़ेगा, यह तो अभी तय नहीं, लेकिन पूर्व कैबिनेट मंत्री शाहिद मंजूर व भाजपा विधायक सत्यवीर त्यागी की प्रतिष्ठा दांव पर रहेगी।

वार्ड 26 से पूर्व केबिनैट मंत्री शाहिद मंजूर के खास डब्बू चुनाव जीते थे, लेकिन इस बार महिला में वार्ड आरक्षित हो गया है। इस वार्ड पर भी शाहिद मंजूर की प्रतिष्ठा दांव पर रहेगी। इसी वार्ड से बाबर चौहान अपनी पत्नी को चुनाव मैदान में उतारने का ऐलान कर चुके हैं। वार्ड 30 से शाहिद मंजूर के पुत्र नवाजिश चुनाव लड़े थे और जीते थे, लेकिन इस बार यह वार्ड महिला के लिए आरक्षित कर दिया गया है।

पूर्व मंत्री शाहिद मंजूर ने कहा है कि इस बार वार्ड महिला के लिए आरक्षित हो गया है, जिसके चलते उनके परिवार की महिला चुनाव नहीं लड़ेगी। वार्ड 10, 11, 6,7, 8, 9, 10 व 11 ऐसे वार्ड हैं, जिस पर भाजपा के फायर ब्रांड विधायक संगीत सोम की प्रतिष्ठा दांव पर रहेगी। रोहटा व सरूरुपुर ब्लॉक के वार्ड 13, 14, 15, 16, 17, 18, 19 पर सिवालखास विधायक जितेन्द्र सतवाई की प्रतिष्ठा दांव पर रहेगी। कृषि कानून का ग्रामीण क्षेत्रों में विरोध चल रहा है, ऐसे में भाजपा की भी त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में अग्नि परीक्षा होगी।

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