जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं की सीटों में बढ़ोतरी के लिए परिसीमन के प्रस्ताव को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच कड़ा टकराव होने की संभावना है। गुरुवार से शुरू हो रहे संसद के विस्तारित सत्र में केंद्र सरकार ने इस प्रस्ताव को अमली जामा पहनाने की पूरी तैयारी कर ली है, जबकि कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्ष परिसीमन के खिलाफ खड़ा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिला आरक्षण को देश में एक महत्वपूर्ण मुद्दा बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। इस वजह से विपक्ष सीधे महिला आरक्षण का विरोध नहीं कर सकता, लेकिन परिसीमन पर किसी प्रकार का समझौता करने के लिए तैयार नहीं है।
संसद के बजट सत्र की तीन दिवसीय विस्तारित बैठक के पहले ही दिन बृहस्पतिवार को केंद्र सरकार लोकसभा में बड़े बदलाव की नींव रखेगी। इसके तहत लोकसभा और देश के सभी राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों की विधानसभा सीटों की संख्या बढ़ाने के लिए संविधान (131वां) संशोधन विधेयक पेश किया जाएगा, जिसमें महिला आरक्षण भी शामिल होगा। इसके अलावा परिसीमन विधेयक और केंद्रशासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक भी पेश किए जाएंगे।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि नए परिसीमन में देश के किसी भी हिस्से, विशेषकर दक्षिण भारतीय राज्यों के साथ कोई अन्याय नहीं होगा। दक्षिण भारतीय राज्यों को आशंका है कि जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन के कारण उनकी लोकसभा सीटों में कमी आ सकती है। इस पर सरकार ने कहा कि इस शंका में कोई सच्चाई नहीं है और प्रत्येक राज्य के लिए सीटों की बढ़ोतरी समान रूप से 50 फीसदी होगी। लोकसभा में सीटों की अधिकतम संख्या 850 निर्धारित की गई है और इसे आगे नहीं बढ़ाया जाएगा। किसी भी राज्य की सीटों में कटौती का प्रश्न ही नहीं उठता।
सरकार ने यह भी बताया कि 1976 के बाद से लोकसभा सीटों में कोई बदलाव नहीं हुआ है, इसलिए नया परिसीमन समय की आवश्यकता है। परिसीमन प्रक्रिया अंतिम प्रकाशित जनगणना (2011) के आधार पर पूरी की जाएगी। प्रत्येक राज्य के लिए अलग परिसीमन आयोग बनेगा, जो राज्य के सभी राजनीतिक दलों से विचार-विमर्श के बाद सीटों का अंतिम निर्धारण करेगा।
संसद के विस्तारित सत्र की रूपरेखा इस प्रकार है: 16 अप्रैल को लोकसभा में तीनों विधेयकों पर चर्चा होगी, जिसमें कुल 18 घंटे का समय निर्धारित किया गया है। 17 अप्रैल को लोकसभा में मतदान के साथ यह प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इसके बाद 18 अप्रैल को विधेयक राज्यसभा में पेश किए जाएंगे, जहां 10 घंटे की चर्चा के बाद मतदान होगा।
इस सत्र में पेश किए जाने वाले प्रमुख विधेयक हैं: संविधान (131वां) संशोधन-2026, परिसीमन विधेयक-2026 और संघ शासित क्षेत्र कानून (संशोधन) विधेयक-2026।

