Tuesday, March 24, 2026
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दहशत के माहौल में प्राइवेट पैथ लैबों की पौबारह

  • जांच के नाम पर सलीके से काटी जा रही जेब, शहर में जगह-जगह आउटलेट
  • एच1एन1 केसों में स्वास्थ्य विभाग में मान्य नहीं निजी पैथ लैबों की रिपोर्ट
  • केवल मेडिकल स्थित माइक्रोबॉयलोजी लैब में होने वाली जांच रिपोर्ट ही मान्य

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: कोरोना संक्रमण समेत अन्य सीजनल फ्लू जिनमें स्वाइन फ्लू भी शामिल है की जांच के नाम पर शहर की कुछ प्राइवेट लैबों की पौबारह है।

सीजनल फ्लू और कोरोना संक्रमण ऐसी लैबों के लिए कमाई का जबरदस्त सीजन साबित हो रहा है। यहां मरीजों में डर बैठाकर उनकी जेब सलीके से काटने काम किया जा रहा है।

जबकि कोरोना की यदि बात की जाए तो कोराना की प्राइवेट जांच को सरकारी मान्यता नहीं है। इसके लिए मेडिकल की माइक्रोबॉयलोजी लैब में जांच कराना जरूरी है। एच1एन1 मामलों में भी सरकारी लैब की रिपोर्ट ही मान्य है।

स्वाइन फ्लू के सीजन में निजी पैथ लैब मरीजों में खौफ का माहौल पैदा कर रही हैं। यह स्थिति तो तब है जब एच1एन1 केसों में निजी पैथ लैब की जांच रिपोर्ट को स्वास्थ्य विभाग मान्यता नहीं देता।

ऐसे मामलों में केवल मेडिकल अस्पताल स्थित माइक्रोबॉयलोजी में करायी जाने वाली जांच को ही स्वास्थ्य विभाग शत प्रतिशत सही मानता है। निजी पैथ लैबों की रिपोर्ट में खामियों की पर्याप्त गुंजाइश बतायी जा रही है।

धंधे के लिए डर

फाइव स्टार संस्कृति की तर्ज पर शहर में जगह जगह खुले निजी पैथ लैबों के आउटलेट पर अपना धंधा चमकाने व जमाने के लिए मरीजों व तीमारदारों में डर फैलाने के आरोप लगाए जा रहे हैं। बताया गया है कि ऐसे पैथ लैबों में अक्सर मामूली खांसी व छींक को लेकर मरीज के मन में कई प्रकार की शंकाए पैदा कर नयी नयी जांच कराए जाने को कहा जाता है। जान है तो जहान है यही सोचकर फिर मरीज इनके द्वारा बतायी जाने वाली तमाम जांचें कराने को मजबूर होता है। भले ही उनमें कुछ भी न आए।

छोड़े हुए हैं एजेंट

निजी पैथ लैबों ने शहर भर में अपने एजेंट छोड़े हुए हैं। ये एजेंट तमाम प्राइवेट अस्पतालों व नर्सिंग होम पर मिल जाएंगे। इसके अलावा निजी चिकित्सक भी इनकी सेवाएं लेते रहते हैं। इन एजेंटों का काम सिर्फ प्राइवेट अस्पतालों व नर्सिंग होम से ज्यादा से ज्यादा जांच कलेक्ट करना है।

धंधे के लिए भारी भरकम कमीशन

पैथ लैबों की ओर से अपना धंधा जमाने के लिए जहां से काम मिलता है। उनको ठीकठाक कमीशन का भी आॅफर किया जाता है। इतना ही नहीं जिनकी ओर से ठीकठाक धंधा आता रहता है। ऐसे कुछ चिकित्सकों के लिए खास पैकेज की भी व्यवस्था इनकी ओर से किए जाने की बात सुनने में आयी है। हालांकि ऐसे चंद ही चिकित्सक सुने जाते हैं। हालांकि जो नामचीन चिकित्सक हैं या फिर आईएमए सरीखी प्रतिष्ठित संस्था से जुड़े हैं वो इनके झांसे में आकर कभी भी मरीज का अहित नहीं करते।

मान्य नहीं रिपोर्ट

एच1एन1 की जांच के लिए निजी पैथ लैब की रिपोर्ट को स्वास्थ्य विभाग मान्यता नहीं देता। स्वास्थ्य विभाग केवल मेडिकल कालेज की माइकोबॉयलोजी लैब की जांच रिपोर्ट को ही शत-प्रतिशत सही मानता है। प्राइवेट पैथ लैब की रिपोर्ट एच1एन1 में संदेह से परे नहीं होती हैं। इसलिए इनको खारिज किया जाता है।

जगह-जगह आउटलेट और होम डिलीवरी

प्राइवेट पैथ लैबों के पूरे शहर में मोबाइल कंपनियों की तर्ज पर आउटलेट खोल दिए गए हैं। इसके अलावा होम डिलीवरी की भी सुविधा दी जा रही है। इसके अलावा मोबाइल कंपनियों की भांति जांच के नाम पर अलग-अलग पैकेज मरीजों के लिए उपलब्ध हैं। मकसद सिर्फ मरीज की जेब हल्की करने का है। यह बात अलग है कि एच1एन1 की तर्ज पर रिपोर्ट स्वास्थ्य विभाग में मान्य हो या नहीं।

ये कहना है सर्विलांस अधिकारी का

मेरठ और सहारनपुर मंडल के सर्विलांस अधिकारी डा. अशोक तालियान का कहना है कि सभी प्राइवेट अस्पताल व नर्सिंग होम संचालकों को कहा गया है कि केवल मेडिकल लैब में ही जांच कराए प्राइवेट लैब की रिपोर्ट स्वाइन फ्लू में मान्य नहीं।

आईएमए भी विरोध में

एच1एन1 जैसी बीमारी में निजी पैथ लैब की जांच को आईएमए सचिव डा. अनिल नौसरान भी खारिज करते हैं। उनका तो यहां तक कहना है कि स्वास्थ्य विभाग इन पर अंकुश लगाए। उन्होंने बताया कि इस संबंध में एक पत्र भी सीएमओ को लिखा गया है।

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