Thursday, December 9, 2021
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प्याज बीजोत्पादन की उन्नत विधि

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सूर्य प्रताप सिंह


अच्छे बीज का होना प्याज की फसल के अधिक उत्पादन के लिए बहुत जरूरी है। प्याज के शुद्ध एवं विश्वसनीय बीज पैदा करने के लिए उपयुक्त अन्त: कृषि क्रियाओं, प्रजातियों, छंटाई, कीड़ों एवं बीमारियों की रोकथाम, परागण, कटाई, सुखाई, मडाई, बीज की सफाई, भराई एवं भंडारण के बारे में उचित ज्ञान होना बहुत जरूरी है।

प्याज के बीजोत्पादन की विधि

 कन्द से बीज विधि: इस विधि में कंदों को बनाने के बाद उखाड़ लिया जाता है और अच्दी तरह चयन करके पुन: खेतों में रोपण किया जाता है। इस विधि से गाठों की छंटाई संभव होती है, शुद्ध बीज बनता है तथा उपज भी अधिक होती है किंतु इस विधि में लागत ज्यादा आती है और समय अधिक लगता है।

एक वर्षीय विधि: इस विधि में बीज को मई-जून में बोया जाता है तथा पौधों की रोपाई जुलाई-अगस्त में की जाती है। कंद नवम्बर में तैयार हो जाते हैं। कंदों को उखाड़कर छांट लिया जाता है। अच्छे कंदों को 10-15 दिन बाद पुन: दूसरे खेत में लगा दिया जाता है। बीज इस विधि से मई माह तक तैयार हो जाता है। इस विधि से खरीफ प्याज की प्रजातियों का बीजोत्पादन संभव है।

द्विवर्षीय विधि: इस विधि में बीज अक्टूबर-नवम्बर में बोया जाता है तथा पौध दिसम्बर के अंत या जनवरी के शुरू में खेत में लगायी जाती है। कंद मई के अंत तक तैयार हो जाते हैं। चुने हुए कंद अक्टूबर तक भंडार में रखे जाते हैं। नवंबर में फिर चुनकर अच्छे कंद खेत में लगा दिए जाते हैं। इस विधि से रबी प्याज की प्रजातियों का बीजोत्पादन करते हैं।

प्याज कंद उगाने की उन्नत विधि

उपयुक्त जलवायु: सर्वोत्तम पैदावार के लिए 18-21 सेन्टिगे्रड तापमान, 10 घंटे लंबे दिन तथा 60 प्रतिशत आर्द्रता बहुत ही अनुकूल होती है।

भूमि और उसकी तैयारी: बलुई दोमट, सिल्टी दोमट तथा गहरी भुरभुरी, 6.5-7.5 पी.एच. वाली मिट्टी प्याज के लिए अच्छी होती है। 3-4 जुताइयां करके खेत की अच्छी तैयारी कर लेते हैं।

दूरी: रोपाई करते समय लाइन से लाइन की दूरी 15 सेमी तथा लाइन में पौध की दूरी 10 सेमी रखते हैं। रोपाई के तुरंत बाद हल्की सिंचाई कर देनी चाहिए।

बीज की मात्रा: एक हेक्अ‍ेयर की रोपाई के लिए 7-8 किग्रा. बीज पर्याप्त होता है।

खाद

गोबर की खाद:  50 टन प्रति हेक्टेयर

कैल्सियम अमोनियम नाईट्रेट: 100 किग्रा. या यूरिया 200 किग्रा.

सिंगल सुपर फास्फेट: 300 किग्रा.

म्यूरेट आॅफ पोटाश: 100 किग्रा.

नाइट्रोजन खाद को दो भागों में रोपाई के 30 और 45 दिनों के अंतर पर देना चाहिए।

सिंचाई

सिंचाई समय पर आवश्यकतानुसार 8-15 दिनों के अंतर पर करते हैं। टपक सिंचन विधि से भी प्याज उत्पादन किया जा सकता है।

खरपतवार निकालना

अच्छी फसल के लिए 2-3 बार शुरू में खरपतवार निकालना आवश्यक होता है। स्टॉम्प 3.5 ली. खरपतवारनाशी रोपाई के तीन दिन बाद या रोपाई के पहले 800 लीटर पानी में डालकर छिड़काव करने से खरपतवार खत्म करने में मदद मिलती है।

फसल सुरक्षा

प्याज में थ्रिप्स नामक कीट लगने पर 500 लीटर पानी में 740 मिली. मैलाथियान या 375 मिली. मोनो क्रोटोफास का ट्राईटोन या सैण्डोविट मिलाकर प्रति हेक्टेयर छिड़काव करते हैं।

स्टेमफिलियमझुलसा एवं पर्पल ब्लाच रोग से बचाव के लिए डाईथेन एम-45 या इन्डोफिल एम-45, 2.5 किग्रा/ हे. अथवा 2.0 किग्रा. कवच प्रति हेक्टेयर का छिड़काव करते हैं।

खुदाई

50 प्रतिशत पत्तियां जमीन पर गिरने के एक सप्ताह बाद खुदाई करने से भंडारण में होने वाली हानि कम होती है। खुदाई करके इनको कतारों में रखकर सुखा देते हैं। पत्तों को गर्दन से 2.5 सेमी. ऊपर से अलग कर लेते हैं और फिर एक सप्ताह सुखा लेते हैं। कंदों को सीधे सूर्य की रोशनी में नहीं सुखाना चाहिए तथा भगने से बचाना चाहिए अन्यथा भण्डारण में अत्याधिक हानि होती है।

भंडारण

अच्छी, एक रंग की, पतली गर्दन वाली, दोफाड़े रहित प्याज का भंडारण करते हैं। 4.5 सेमी. से 6.5 सेमी. व्यास के प्याज कंद बीज उत्पादन के लिए उपयुक्त होते हैं उन्हीं को भंडारण करते हैं। इससे छोटी एवं बड़ी कन्दों को बाजार में बेच देना चाहिए।

औसत उपज

8-10 कुंतल प्रति हेक्टेयर।


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