Saturday, May 25, 2024
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गंगा के जलस्तर में तेजी से गिरावट

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  • खादर के हालात बद से बदतर, मुख्य मार्गों पर चार से पांच फीट पानी, आवागमन बाधित
  • बाढ़ क्षेत्र में पहुंचे एसडीएम, जाना बाढ़ पीड़ितों का हाल

जनवाणी संवाददाता |

हस्तिनापुर: गत 15 जुलाई से खादर क्षेत्र में गंगा और सोती नदी जमकर कहर बरपा रही है। गंगा के जलस्तर में उतार-चढ़ाव के खेल से ग्रामीण परेशान है। रौद्र रूप के चलते मुख्य मार्गों पर आवागमन बाधित होने के साथ ही कई गांव बाढ़ की चपेट में है। तीन पूर्व गंगा के जलस्तर में हुई वृद्धि ने खादर में तबाही मचा दी थी। मंगलवार से गंगा के जलस्तर में लगातार कमी के बाद भी ग्रामीणों को राहत मिलती नजर नहीं आ रही है। गुरुवार को बिजनौर बैराज से गंगा में चल रहा डिस्चार्ज घटकर महज 1 लाख 41 हजार क्यूसेक रह गया।

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पहाड़ी क्षेत्रों में हो रही मूसलाधार बरसात का असर खादर के मैदानी इलाकों में लगातार नजर आ रहा है। बरसाती सीजन में पहली बार गंगा सोमवार देर रात खतरे का निशान पार कर गई। गंगा के लगातार बढ़ते व घटते जलस्तर को देखते हुए तमाम बाढ़ चौकियों को अलर्ट कर दिया है। साथ ही सख्त निर्देश दिए गए हैं कि किसी को भी गंगा किनारे जाने की अनुमति न दी जाए। सोमवार को जलस्तर में एकाएक वृद्धि के बाद मंगलवार से ही जलस्तर में तेजी से गिरावट हो रही है।

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बिजनौर बैराज पर तैनात जेई पीयुष कुमार के अनुसार गुरुवार को गंगा में चल रहा डिस्चार्ज घटकर महज 1 लाख 41 हजार क्यूसेक और हरिद्वार बैराज से 1 लाख 14 हजार क्यूसेक ही रहा गया, लेकिन इसके बाद भी खादर में बाढ़ के हालात जस के तस है। बाढ़ ने लगभग 50 गांवों को अपनी चपेट में ले रखा है। जहां ग्रामीणों को आवागमन के साथ तमाम परेशानियां झेलनी पड़ रही है। हालांकि प्रशासन एक-दो गांवों में मदद का दावा भी कर रहा है। वहीं, अन्य गांवों की बात करें तो ग्रामीणों में प्रशासन के प्रति आक्रोश है।

गंगा के रौद्र रूप से सहमे ग्रामीण

खादर क्षेत्र में गंगा का कहर लगातार जारी है। संपर्क मार्गों के साथ-साथ गांवों की सड़कों पर बाढ़ का पानी ओवरफ्लो होने से आवागमन बाधित हो गया है। लिहाजा इन गांवों में प्रशासन द्वारा नाव लगवा दी गई है। बाढ़ से घिरे सिरजेपुर, फतेहपुर प्रेम, दबखेड़ी, चमरोद आदि ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ भीषण रूप धारण करती जा रही है। खेत, घरों और सड़कों पर पानी बह रहा है और फसले बर्बाद हो रही है।

गंगा ने खतरे के निशान को कब-कब किया पार?

बरसात के दिनों में गंगा नदी का खतरे के निशान को पार करना आम बात है, लेकिन गंगा नदी का जलस्तर बिजनौर बैराज पर 2010 में 220.30, 2013 में 220.45 और इस बार भी सोमवार को जलस्तर में हुई वृद्धि के बाद गंगा का जलस्तर 220.40 के पास पहुंच गया।

किठौर के खादर में बाढ़ का पानी, खत्म कहानी

किठौर: गंगा ने किठौर के खादर में भी रौद्र रूप धारण कर लिया है। बाढ़ के पानी से आसपास के कई गांव जलमग्न होने के साथ हजारों बीघा धान, सब्जी और गन्ने की फसलों को खत्म कर दिया है। चौतरफा परेशानी में घिरे किसान को आर्थिक तंगी और दो जून की रोटी के अलावा बच्चों के भविष्य की चिंता सता रही है। मंगलवार रात गंगानदी ने वर्षों बाद किठौर के खादर में पुन: रौद्र रूप धारण किया।

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जिससे शाहीपुर कालीनगर, सिकंदरपुर, भगवानपुर, असगरीपुर, मिश्रीपुर, ढकैनी समेत कई गांव न सिर्फ जलमग्न हुए बल्कि हजारों बीघा धान, सब्जी, गन्ना और दलहनी फसलें भी तबाह हो गईं। गांवों के संपर्क मार्गों पर भारी जलभराव से आवागमन पूरी तरह बंद है। लोग जान पर खेलकर खाद्य सामग्री का जुगाड़ कर रहे हैं। शाहीपुर निवासी उस्मान और मेहरबान ने बताया कि रात में सब लोग आराम से सोए थे, लेकिन सुबह जगने पर आंगन में चौतरफा पानी और फसलें जलमग्न मिलीं। दोनों भाइयों की 20 बीघा धान पर पानी फिर गया।

कालीनगर निवासी हर्षित कौशिक और संजय रत्ना ने बताया कि उनके पास छह बीघा परमल व लौकी और 10 बीघा धान है। सब पानी में डूबने से बबार्दी के कगार पर पहुंच गए हैं। संजय और वाडेकर के घरों में पानी भर गया जिससे अन्य घरेलु सामान के साथ राशन भी भीग गया। गांव के रास्ते और मुख्यमार्ग पर भारी जलभराव के कारण बच्चे स्कूल नही जा पाए हैं। जिससे उनका भविष्य अधर में लटकता दिख रहा है। भगवानपुर में शिवसदन कृषि फार्म की सैकड़ों एकड़ धान और गन्ना जलमग्न है। सेवादारों कुलवंत उर्फ खारा, हरजीत सिंह, बंटी सिंह, अविनाश सिंह ने बताया कि बाढ़ से फार्म को कई लाख रुपए का नुकसान है।

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उधर, बाढ़ पर गंभीर प्रशासन पीड़ित परिवारों को बचाव और फौरी राहत की पूरी तैयारी के साथ फसल नुकसान के सर्वे में लगा है। नायब तहसीलदार नितेश कुमार और राहुल मलिक ने बताया कि आंकड़ों के अनुसार मंगलवार रात गंगानदी में पौने चार लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया था। जो गुरुवार दोपहर तक घटकर सवा लाख क्यूसेक रह गया। धीरे-धीरे पानी उतर रहा है। शीघ्र बाढ़ का प्रकोप खत्म हो जाएगा। उसके बाद फसल नुकसान का वास्तविक सर्वे किया जाएगा।

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