Tuesday, February 17, 2026
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रैपिड: व्यापारी सुप्रीम कोर्ट तक लड़ेंगे हक की लड़ाई

  • पीड़ित पक्ष बोला-हाईकोर्ट से हमें इंसाफ की पूरी आस

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: दिल्ली रोड के व्यापारियों ने रैपिड रेल प्रोजेक्ट के चलते चौपट हुए अपने काम धंधों को लेकर मंगलवार को स्पष्ट कर दिया कि यदि उन्हें अपना हक पाने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़े तो भी वो पीछे नहीं हटेंगे। इस मामले में जिन छह व्यापारियों ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उनमें मोहित गुप्ता, भूपेन्द्र सिंह, प्रह्लाद खन्ना, अमित गुप्ता, सचिन मनचंदा और उमेश शामिल हैं।

मोहित गुप्ता ने बताया कि हांलाकि उन्हें हाई कोर्ट से न्याय की पूरी उम्मीद है, लेकिन यदि जरुरत पड़ी तो वो ऊपरी अदालत का दरवाजा खटखटाने से भी पीछे नहीं हटेंगे। इस पूरे मामले में उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल के प्रदेश अध्यक्ष लोकेश अग्रवाल दमदार पैरवी कर रहे हैं और व्यापारियों को भी एकजुट किए हुए हैं। उल्लेखनीय है कि इस मामले में हाई कोर्ट ने रैपिड प्रशासन पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि ‘लोगों की बर्बादी की कीमत पर विकास नहीं’।

बताया जाता है कि इस मामले में कोर्ट ने रैपिड प्रशासन को भी आड़े हाथों लेते हुए उसे फटकार लगाई है। मोहित गुप्ता और लोकेश अग्रवाल ने बताया कि इस मामले में अब अगली सुनवाई 29 नवंबर को होगी और इसमें व्यापारी अपना दमदार पक्ष रखेंगे।

एक-एक लाख रुपये के हिसाब से मांगा मुआवजा

लोकेश अग्रवाल के अनुसार दिल्ली रोड पर लगभग दो सालों से रैपिड का काम चल रहा है और जिस दिन से यहां काम शुरू हुआ तभी से व्यापार चौपट हो गया। मोहित गुप्ता के अनुसार आए दिन के जाम व कंस्ट्रक्शन के चलते ग्राहकों ने यहां का रूख करना ही छोड़ दिया है जिस कारण व्यापारी हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं।

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लोकेश अग्रवाल के अनुसार पीड़ित व्यापारियों ने मांग की है कि एनसीआरटीसी उन्हें उनके नुकसान की भरपाई करे तथा जब से काम शुरू हुआ है तब से लेकर काम खत्म होने तक प्रत्येक व्यापारी को एक लाख रुपये प्रति माह के हिसाब से मुआवजा राशि प्रदान करे।

29 के बाद अगली रणनीति पर विचार

व्यापारी नेता लोकेश अग्रवाल ने बताया कि 29 नवंबर को हाई कोर्ट में इसी मामले में फिर सुनवाई है तथा 29 नवंबर के बाद ही व्यापारी अगली रणनीति पर विचार करेंगे। उन्होंने भी यही दोहराया कि हाई कोर्ट से उन्हें न्याय की पूरी उम्मीद है लेकिन यदि जरुरत पड़ी तो सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया जाएगा।

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