Tuesday, May 21, 2024
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मेनका सिनेमा पर कब्जा लेने आया सुप्रीम कोर्ट का रिसीवर

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  • डीएम ने सुना पक्ष, दो दिन में होगा फैसला
  • रिसीवर ने कहा पड़ोसी कर रहा कब्जा, बनानी है दीवार

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: 14 सालों से बंद चल रहे मेनका सिनेमा को लेकर एक बार फिर से हलचल शुरू हो गई है। इस बार हलचल सुप्रीम कोर्ट के द्वारा नियुक्त किये गए रिसीवर ने मचाई है। सोमवार को रिसीवर डीएम और एसएसपी से मिला और कहा कि मेनका सिनेमा पर अलकरीम होटल वाले कब्जा करने के फिराक में है इस कारण चारदीवारी बनाने की अनुमति दी जाए। डीएम ने संबंधित विभागों से मेनका सिनेमा को लेकर रिपोर्ट मांगी है। सिटी मजिस्ट्रेट ने संबंधित लेखपाल से पूरा ब्योरा देने को कहा है।

सोमवार को मेनका सिनेमा पर सुप्रीम कोर्ट के द्वारा बैठाये गए रिसीवर ने एसपी सिटी विनीत भटनागर, सिटी मजिस्ट्रेट अजय कुमार और सीओ कोतवाली अरविंद चौरसिया से मुलाकात की और कहा कि आम्रपाली ग्रुप के सिनेमा मेनका की जगह पर पड़ोसी लोग दीवार तोड़ कर कब्जा कर रहे है। इसलिये चारदीवारी करवाने की अनुमति दी जाए। मामला डीएम के. बालाजी के पास पहुंचा। उन्होंने संबंधित विभागों को बुलाकर मेनका को लेकर दो दिन में रिपोर्ट देने को कहा है।

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इसके बाद रिसीवर को फोर्स दी जाए या न दी जाए इस पर फैसला होगा। मेनका सिनेमा का असली मालिक कौन तो यह रहस्य है। नगर निगम के रिकॉर्ड में मेनका सिनेमा आम्रपाली ग्रुप की कंपनी के पहले नादिर अली, मो. ईशाक के नाम था। उससे पहले के रिकार्ड में मेनका सिनेमा किसी चरण दास के नाम रहा।

मेनका सिनेमा को लेकर नगर निगम में जांच-पड़ताल के दौरान पाया गया कि निगम के हाउस टैक्स के रजिस्टर में 27 मार्च 2009 को तत्कालीन कर निर्धारण अधिकारी के आदेश से बाबू ओम प्रकाश कर्दम की रिपोर्ट पर भवन स्वामी का नाम बदला गया। 27 मार्च 2009 से मेनका सिनेमा आम्रपाली ग्रुप की कंपनी हाईटेक सिटी डवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर पुरुषोत्तम कुमार चौबे के नाम दर्ज हुई है। उससे पहले नगर निगम के रिकॉर्ड में यह नादिर अली, मो. ईशाक के नाम दर्ज था।

253 कम्बोह गेट के नाम पर नगर निगम में वर्षों से हाउस टैक्स में नाम चला आ रहा है। 2018 में मेनका सिनेमा को तोड़कर मल्टीफ्लैक्स बनाने के मामले में पूर्व डीएम अनिल ढींगरा ने जांच बैठा दी थी। मेनका सिनेमा ध्वस्तीकरण प्रकरण में आरोपी बनाए गए पुरुषोत्तम चौबे बंगलुरु में हैं। विवेचक को दिए बयान में चौबे ने कहा कि 2013 में उन्होंने हाइटेक सिटी डवलपर्स कंपनी छोड़ दी थी।

इसका रजिस्टर्ड आॅफिस गाजियाबाद के इंदिरापुरम में है। करोड़ों के एक मामले में यह दफ्तर भी सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद काफी समय से सील है। घंटाघर स्थित मेनका सिनेमा हॉल को तोड़ने की जांच कई स्तर पर चल रही है। मेरठ विकास प्राधिकरण ने पिछले दिनों पूर्व डीएम अनिल ढींगरा के निर्देश पर सीलिंग की कार्रवाई भी की थी। अब सिनेमा हॉल की भूमि की वास्तविक स्थिति की जांच चल रही है।

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