- पदमश्री भारत भूषण ने रक्षा मंत्रालय समेत अफसरों व नेताओं को लिखा पत्र
- आजादी के पहले से ही सहारनपुर में स्थापित किया गया था रिमाउंट डिपो
जनवाणी संवाददाता |
सहारनपुर: फिर तो शौर्यगाथा की यादें भर रह जाएंगी। दरअसल,1883 से सहारनपुर की आन-बान-शान और शहर का फेफड़ा समझा जाने वाले हजारों एकड़ में फैले प्रतिष्ठित सैन्य केंद्र रिमाउंट डिपो के बहुत जल्द हेमपुर स्थानांतरित होने की संभावना है। हालांकि, सैन्य अधिकारी इस बाबत कुछ भी कहने बताने से कतरा रहे हैं। लेकिन, सूत्रों का कहना है कि रिमाउंट डिपो का हेमपुर स्थानांतरित किया जाना लगभग तय हो चुका है।
यह बताने की जरूरत नहीं कि सहारनपुर का अतीत गौरवशाली रहा है। उत्तराखंड बनने से पहले इसका मुकुट हरिद्वार और कनखल था। लेकिन, अब वह छिन चुका है। विश्वप्रसिद्ध रुड़की विश्व विद्यालय छिन गया। शहर के बीचोंबीच बहती दो नदियों वाले शहर की दोनों शुद्ध जल वाली नदियां नर्क में तब्दील हो गईं। अब शहर की शान समझे जाने वाले रिमाउंट डिपो के छिन जाने की आशंका है। बता दें कि रिमाउंट डिपो में घोड़े और खच्चरों को ट्रेनिंग दी जाती है।
दुर्गम मोर्चों के लिए हजारों घोड़े खच्चर पैदा करने और उन्हें ट्रेनिंग देने वाले भारत के इस सबसे पुराने व प्रतिष्ठित संस्थान के कुछ ही दिनों में यहां से बंद हो जाने की चर्चा है। रिमाउंट डिपो के भी यहां से बंद किए जाने की जानकारी मिलने से आहत हुए सहारनपुर वासी योग गुरु पद्मश्री स्वामी भारत भूषण ने सहारनपुर के मजबूत स्तंभ समझे जाने वाले विविध राजनैतिक हस्तियों से संपर्क करके शहरवासियों को उनके साथ हो रहे इस अन्याय से उबारने का आग्रह किया है। उन्होंने अगस्त पहले हफ्ते में ही देश प्रदेश व सेना के शीर्ष नेतृत्व को भी पत्र लिखा है।
दरअसल, किन्हीं कारणों से रिमाउंट डिपो को यहां से स्थानांतरित कर हेमपुर ले जाया जा रहा है। ऐसा होता है तो सहारनपुर की एक बड़ी धरोहर छिन जाएगी। बहरहाल, स्वामी भारत भूषण की पहल रंग लाई तो स्थानांतरण रुक भी सकता है।

