जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: पिछले कई दिनों से जारी गिरावट के बाद, भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को सुधार देखा गया। साल 2025 के अंतिम कारोबारी दिन के शुरुआती सत्र में बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी बढ़त के साथ कारोबार करते नजर आए। घरेलू संस्थागत निवेशकों की लगातार खरीदारी ने बाजार को सहारा दिया है, जिससे निवेशकों की धारणा में सकारात्मक बदलाव आया है।
पिछले पांच दिनों की गिरावट के बाद, प्रमुख सूचकांकों में बुधवार को सुधार देखा गया। सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 254.38 अंक चढ़कर 84,929.46 के स्तर पर पहुंच गया। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 50 भी चार दिनों की लगातार गिरावट के बाद 89.15 अंकों की बढ़त के साथ 26,028 के स्तर पर कारोबार करता नजर आया।
बाजार के जानकारों का मानना है कि यह रिकवरी मुख्य रूप से स्थानीय निवेशकों के भरोसे और साल के अंत में पोर्टफोलियो रीबैलेंसिंग के कारण हो रही है।
सेंसेक्स में सबसे आगे और पीछे रहने वाले शेयर
आगे बढ़ने वाले शेयर
सेंसेक्स की 30 प्रमुख कंपनियों में से टाटा स्टील, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, टाइटन, एक्सिस बैंक, अदाणी पोर्ट्स, और हिंदुस्तान यूनिलीवर के शेयरों में सबसे ज्यादा तेजी देखने को मिली। इन शेयरों में बढ़त ने बाजार को शुरुआती समय में सहारा दिया और सेंसेक्स की बढ़त को बनाए रखा।
पीछे रहने वाले शेयर
इसके विपरीत, कुछ प्रमुख कंपनियां गिरावट के साथ ‘लैगार्ड्स’ (पिछड़ने वाले शेयरों) की सूची में रही। बजाज फिनसर्व, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS), महिंद्रा एंड महिंद्रा, और इंफोसिस के शेयरों में गिरावट आई। खासकर आईटी और ऑटो सेक्टर के कुछ शेयरों में मुनाफावसूली का असर देखा गया, जो इस गिरावट के प्रमुख कारण रहे।
संस्थागत निवेशकों का रुख
विदेशी संस्थागत निवेशकों का रुख बिकवाली की ओर है। मंगलवार को FIIs ने 3,844.02 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जिससे बाजार पर दबाव बना।
घरेलू निवेशकों ने 6,159.81 करोड़ रुपये की खरीदारी की, जिससे बाजार को सहारा मिला और इस गिरावट को थामने में मदद मिली। घरेलू निवेशकों की खरीदारी ने ही बाजार में सुधार की शुरुआत की और इस रिकवरी की नींव रखी।
वैश्विक बाजार और कच्चे तेल की स्थिति
वैश्विक बाजार
एशियाई बाजारों में आज मिला-जुला रुख देखा गया। दक्षिण कोरिया का कोस्पी, शंघाई का SSE कंपोजिट, और हांगकांग का हैंग सेंग इंडेक्स गिरावट के साथ कारोबार कर रहे थे। इससे पहले मंगलवार को अमेरिकी शेयर बाजार भी गिरावट के साथ बंद हुए थे।
कच्चे तेल की कीमतें
वैश्विक तेल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 0.10 प्रतिशत की मामूली गिरावट के साथ 61.27 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। कच्चे तेल की स्थिर कीमतों से भारतीय अर्थव्यवस्था को महंगाई के मोर्चे पर राहत मिल सकती है, जो एक सकारात्मक संकेत है।
बाजारों का हाल
मंगलवार को सेंसेक्स 20.46 अंक गिरकर 84,675.08 पर बंद हुआ। निफ्टी 3.25 अंक फिसलकर 25,938.85 पर बंद हुआ। बुधवार को शुरुआत में बाजार में तेजी देखी गई, जिससे पिछले पांच सत्रों की थकान कुछ कम हुई। निवेशक अब साल के अंतिम सत्र में क्लोजिंग पर नजरें जमाए हुए हैं, जो अगले साल के लिए बाजार की दिशा तय करेगा।
फॉरेक्स मार्केट का हाल
फॉरेक्स ट्रेडर्स के अनुसार, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों के भारत में निवेश को कम करने के कारण भारतीय रुपये पर दबाव बना है। रुपया डॉलर के मुकाबले 89.89 पर खुला और फिर गिरकर 89.90 पर आ गया, जो पिछले बंद भाव से 15 पैसे कम है। मंगलवार को रुपया डॉलर के मुकाबले 23 पैसे बढ़कर 89.75 पर बंद हुआ था।
अनिल कुमार भंसाली, फिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स के ट्रेजरी प्रमुख ने कहा कि अमेरिका-भारत व्यापार में अनिश्चितताएं बनी हुई हैं, और इस साल विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयरों से 16.5 अरब अमेरिकी डॉलर निकाले हैं, जिससे आयातकों की मांग बढ़ी है और निर्यातकों में सतर्कता बढ़ी है।

