Thursday, April 25, 2024
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कासमपुर गोशाला में भूख, प्यास से दम तोड़ गई छह गाय

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  • एक सप्ताह में ही हुई दर्जनों गोवंशों की मौत
  • ग्रामीणों ने किया हंगामा, लगाया लापरवाही का आरोप

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ/माछरा: जिले में गोशालाओं की हालत खस्ता है। छुट्टा पशुओं को ठांव देने के लिए हर महीने सरकार गोशालाओं पर लाखों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन हालत सुधरने का नाम नहीं ले रही है। न तो उनके लिए चारे और पानी की पर्याप्त व्यवस्था है और न ही धूप से बचाव के लिए कोई पर्याप्त साधन। हालत यह है कि तपती धूप में भूख प्यास से गायें दम तोड़ रही हैं।

माछरा के कासमपुर स्थित गोशाला में बृहस्पतिवार को छह गायों की मौत हो गई है। जबकि कई बीमार का इलाज चल रहा है। योगी सरकार ने गायों की सेवा और उन्हें सुरक्षित रखने के उद्देश्य से गोशालाएं खुलवाईं थीं। मगर लापरवार अधिकारी सरकार की मंशा पर पलीता लगाने से पीछे नहीं हट रहे है। ऐसा ही ताजा मामला जनपद से सामने आई है। यहां पर गोशाला में गाये भूख-प्यास से दम तोड़ रही है। यहां तक कि मृत गायों को दफनाने वाला भी कोई नहीं है। जबकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बड़े पैमाने पर गोशाला अभियान चला कर इनकी सुरक्षा, चारे की व्यवस्था के लिए बजट भी जारी कर दिया है।

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सरकार ने ग्रामीण इलाकों के छुट्टा गोवंशीय पशुओं को गोआश्रय स्थल पहुंचा कर उनके चारे पानी की व्यवस्था करने का निर्देश जिम्मेदारों को दिया है, लेकिन यहां न तो उनके लिए चारे, पानी की पर्याप्त व्यवस्था है और न ही धूप से बचाव के लिए इंतजाम है। एक ओर गोरक्षा के बड़े-बड़े दावे किये जाते हैं तो दूसरी ओर उनके भूसे के लिये भी सरकार के पास बजट नहीं होता।

यह हम नहीं गोशालाओं के हालात बताते हैं। भीषण गर्मी और चारे-पानी के अभाव ने माछरा के कासमपुर स्थित गोशाला मुर्दा मवेशी स्थल में तब्दील हो गया है। भूख-प्यास में दम तोड़ चुके आधा दर्जन गोवंश गोशाला में पड़े हैं। जिन्हें उठाने ठेकेदार भी नहीं पहुंचा। बीमारी फैलने से आशंकित ग्रामीणों ने बीडीओ से मृत पशु उठवाने और गोशाला के संरक्षण की मांग की है।

शहर में अगर नगर निगम की बात की जाये तो नगर निगम में केवल एक गोशाला परतापुर में है, लेकिन इसके अलावा गांवों की बात की जाये तो कई गोशालाएं हैं लेकिन वर्तमान स्थिति सभी गोशालाओं की ठीक नहीं है। यहां इस गर्मी में पशुओं की देखभाल ठीक प्रकार से नहीं हो पा रही है जिस कारण वह दम तोड़ रहे हैं। गुरुवार को माछरा के कासमपुर निवासी ऋषि, मनोज, कंवरपाल पप्पू आदि ग्रामीण बीडीओ से मिले।

उन्होंने बताया कि कासमपुर स्थित गोशाला में लगभग 90 गोवंश हैं, लेकिन उनके खाने को न तो चारा है न पेयजल। भीषण गर्मी में चारे-पानी के अभाव में गोवंश रोजाना दम तोड़ रहे हैं। सप्ताह भर में आधा दर्जन से अधिक गोवंश मर गए, लेकिन उन्हें ठेकेदार उठाने नहीं पहुंचा। जिससे भयंकर बीमारियों का खतरा मंडरा रहा है। ग्रामीणों की शिकायत पर बीडीओ गोपाल गोयल ने सीडीओ मेरठ से वार्ता कर बताया कि मुर्दा-मवेशी ठेकेदार को एक पखवाड़े से परेशानी है। यहां उन्होंने जल्द ही मृत पशुओं को उठवाकर गोशाला की सफाई कराई जाएगी। गोवंशों के लिए बेहतर चारे और शुद्ध पेयजल का प्रबंध कराया जाएगा।

भूसे का संकट, कैसे हो चारे का इंतजाम?

भूसे का संकट पिछले कई माह से बना हुआ है। इस विषय में प्रभारी मंत्री सूर्य प्रताप शाही को भी अवगत करा दिया गया है। बावजूद इसके प्रदेश में भूसे का संकट बना हुआ है। यह भूसे का संकट ही है कि गोशालाओं में पशु दम तोड़ रहे हैं। भूसे के दामों में कोई कमी नहीं हो रही है उधर गोशालाओं में तैनात कर्मचारियों की लापरवाही भी उनकी जान जाने का बड़ा कारण बन रही है। यहां सभी गोशालाओं में पशुओं की रखने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है उन्हें एक छोटे से स्थान में ही ठूंस-ठूंस कर भर दिया जाता है जिससे स्थिति और भी बदतर हो जाती है।

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