Tuesday, May 12, 2026
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…तो बागपत में हाथी की चाल कहीं बिगाड़ न दे समीकरण

  • बसपा के इंडिया गठबंधन से अलग चुनाव लड़ने से बागपत में प्रत्याशी पर टिकी नजर
  • मुस्लिम प्रत्याशी आते ही रालोद व समाजवादी पार्टी का बिगड़ जाएगा समीकरण
  • हाथी की चाल पर टिका माना जा रहा बागपत के चुनाव का परिणाम

मुख्य संवाददाता |

बागपत: लोकसभा चुनाव में इंडिया गठबंधन में बसपा के जाने की चर्चाओं का बाजार चहुंओर गर्म था, लेकिन बसपा ने इसे साफ करके राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। जो प्रत्याशी की लाइन में थे उनमें भी जोश भरता दिखाई दे रहा है। क्योंकि बसपा अब अपने प्रत्याशियों को जल्द उतार सकती है। बागपत लोकसभा सीट पर बसपा के प्रत्याशी की भूमिका पर सभी की निगाहें टिक गई है। क्योंकि यहां हाथी की चाल पर चुनाव का परिणाम भी टिका है। अगर यहां से बसपा ने मुस्लिम प्रत्याशी पर दांव खेल दिया तो रालोद व सपा के समीकरण भी बिगड़ सकते हैं और मुकाबला त्रिकोणीय हो सकता है। सबसे अहम इस सीट पर हाथी की चाल पर निर्भर माना जा रहा है। कहा जा रहा है कि हाथी की चाल ही रालोद व सपा के वोट बैंक की तस्वीर तय करेगा।

लोकसभा चुनाव में इंडिया गठबंधन में बसपा के जाने की चर्चाएं कई दिनों से चल रही थी। सूत्र दावा कर रहे थे कि बसपा भी इंडिया गठबंधन का हिस्सा होगी, लेकिन शनिवार को बसपा ने साफ कर दिया है कि वह अकेले ही चुनाव लड़ेगी। इससे सभी लोकसभा सीटों पर राजनीतिक समीकरणों ने करवट ले ली है और फिर से बसपा के प्रत्याशियों की लाइन में लगे नेताओं में भी जोश नजर आया है। हालांकि जब तक चुनाव की तारीखों का ऐलान न हो जाए, कुछ नहीं कहा जा सकता है, लेकिन जैसे ही बसपा ने अकेले चुनाव लड़ने की घोषणा की तो उसके नेताओं में भी टिकट मिलने की उम्मीद जग गई और अपनी फिल्डिंग बिछानी शुरू कर दी है। एक तरफ जहां बसपाइयों में प्रत्याशी को लेकर गहमा गहमी हो रही है वहीं राजनीतिक समीकरण भी यहां बदलते नजर आ सकते हैं।

हाथी की चाल पर बागपत का चुनाव परिणाम टिका है। यहां अगर बसपा का प्रत्याशी आता है तो मुकाबला कांटे का होगा। सूत्रों की मानें तो बागपत लोकसभा सीट पर मुस्लिम प्रत्याशी को बसपा उतार सकती है। इसके अलावा गुर्जर चेहरे पर भी दांव चला जा सकता है। बताया जा रहा है कि मुस्लिम चेहरा उतारने की तैयारी हो रही है। हालांकि पार्टी नेता अभी कुछ कहने को तैयार नहीं है। परंतु सूत्रों का कहना है कि सपा के समीकरण को बिगाड़ने के लिए यहां मुस्लिम चेहरे को उतारा जा सकता है। हालांकि मुस्लिम चेहरा आने के बाद रालोद के समीकरण भी बदलते दिखाई देंगे। परंतु समाजवादी पार्टी के अधिक समीकरण बिगड़ सकते हैं। देखा जाए तो यहां मुकाबला त्रिकोणीय होने की संभावना हो जाएगी। ऐसे में बाजी कौन मारेगा? यह तो भविष्य ही बताएगा, लेकिन इतना जरूर है कि बसपा के हाथी की चाल पर सभी की निगाहें टिकी है।

अकेले चुनाव लड़ने की तस्वीर साफ होने से भी लोगों में इसकी चर्चा शुरू हो गई है कि आखिर यहां प्रत्याशी कौन आएगा? बसपा यहां से किस पर दांव चलेगा? क्योंकि जनपद स्तर पर कोई बड़ा चेहरा बसपा के खाते में नजर नहीं आ रहा है। संभावना यह भी जताई जा रही है कि बागपत जनपद के अलावा दूसरे जनपद से यहां प्रत्याशी को उतारा जा सकता है। जिसके लिए लखनऊ में कई नामों पर मंथन चल रहा है। मेरठ से एक मुस्लिम चेहरे को बागपत भेजने की चर्चाएं भी हैं। बसपा ने अगर यहां मुस्लिम चेहरा उतार दिया तो सपा के वोट बैंक में बड़ी सेंधमारी हो सकती है। यही नहीं रालोद का वोट बैंक भी मुस्लिम है। देखा जाए तो दोनों पार्टियां अपने-अपने खाते में मुस्लिम वोटरों को गिन रही है। अगर पिछले चुनावों का परिणाम देखा जाए तो यहां मुस्लिम प्रत्याशी आते ही रालोद का समीकरण तुरंत बिगड़ जाता है।

वर्ष 2014 के चुनाव में रालोद मुखिया चौधरी अजित सिंह के समक्ष एक तरफ जहां भाजपा के डॉ. सत्यपाल सिंह थे तो दूसरी ओर सपा से गुलाम मोहम्मद थे। उस चुनाव में गुलाम मोहम्मद दूसरे स्थान पर रहे थे, जबकि चौधरी अजित सिंह तीसरे स्थान पर चले गए थे। यानी रालोद का गणित भी बिगड़ गया था। अब उसी गुणाभाग को अगर देखा जाए तो हाथी की चाल का सभी इंतजार कर रहे हैं। क्योंकि उसी की चाल पर यहां चुनावी परिणाम तय हो सकता है। देखना यह है कि बसपा यहां किस पर दांव चलती है? बाहरी प्रत्याशी को यहां उतारा जाता है या फिर जनपद स्तर से ही किसी पर दांव चलेगी।

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