Thursday, April 25, 2024
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8वें दिन सपा विधायक अतुल का अनशन खत्म

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  • प्रशासन ने सपा विधायक के मांग पत्र को भेजा शासन को
  • सपा के प्रदेशाध्यक्ष नरेश उत्तम पटेल ने अतुल को जूस पिलाकर कराया आमरण अनशन खत्म
  • न्यूटिमा समेत अन्य कुछ निजी अस्पताल, डाक्टरों अतुल प्रधान ने लगाए थे गंभीर आरोप

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: न्यूटिमा अस्पताल में जन्मी जिस बच्ची के महंगे बिल को लेकर हुए बखेडेÞ के बाद अतुल प्रधान के द्वारा कलक्ट्रेट में एक सप्ताह पूर्व महंगी चिकित्सा एवं महंगी शिक्षा के खिलाफ आमरण अनशन शुरू किया था। वह आमरण अनशन सोमवार को पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव एवं शीर्ष नेतृत्व के निर्देश पर मासूम बच्ची के हाथों से जूस पीने के साथ अतुल प्रधान ने खत्म करने का ऐलान कर दिया।

यह घोषणा उनके द्वारा तब की गई जब पुलिस-प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग के सीएमओ द्वारा एक माह के भीतर कार्रवाई कराने का आश्वान दिया गया, जिसमें यह 12 सूत्रीय मांग पत्र शासन को भेजने और उस पर कार्रवाई कराने का आश्वासन दिया गया है। इस मौके पर कमिश्नरी पार्क में आयोजित महापंचायत में सपा के प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम पटेल एवं सपा नेता संजय लाठर एवं पंजाब के किसान नेता गुरुनाम सिंह चढूनी भी मौजूद रहे। आठ दिन चले इस आंदोलन का समापन हो गया।

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सपा विधायक अतुल प्रधान के द्वारा सोमवार 11 दिसंबर को कमिश्नरी पार्क पर महापंचायत के ऐलान की घोषणा को लेकर पुलिस प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग के कई दिनों से हाथ-पैर फूले हुए थे। वह बिना मांगे पूरी हुए एक महीने के भीतर कार्रवाई को वह 12 सूत्रीय मांग पत्र शासन को भेजे जाने के आश्वासन पर ही अतुल प्रधान का आमरण अनशन खत्म हो गया। जिसके बाद पुलिस प्रशासन के साथ स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से राहत की सांस ली। अतुल की महापंचायत में समर्थक टैÑक्टर-ट्राली व अन्य वाहनों से पहुंचे तो पहले तो पुलिस प्रशासन ने बैरिकेट कर उन्हें रोकने का प्रयास किया, लेकिन वह नहीं माने तो उन्हें शांतिपूर्वक जाने दिया।

उधर, कई टैÑक्टर सवारों ने तो सीओ अरविंद चौरसिया के सामने ही स्टंट किए, जिसके बाद सीओ उनको पकड़ने को दूर तक दौड़े, लेकिन वह हाथ नहीं लग सके। दोपहर बाद जैसे ही महापंचायत शुरू हुई तो महापंचायत में सपा के प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम पटेल एवं सपा नेता संजय लाठर, भीम आर्मी के नेता, पंजाब के किसान नेता गुरुनाम सिंह चढूनी समेत विभिन्न पार्टी के जन प्रतिनिधि एवं सामाजिक संगठन के लोगों के साथ ही जिन्होंने अतुल के आमरण अनशन को समर्थन दिया था। सभी महापंचायत में शामिल हुए। इसी बीच पंचायत में एडीएम सिटी बृजेश सिंह व एसपी सिटी के साथ सीएमओ डा. अखिलेश मोहन भी महापंचायत में शामिल हुए।

इस दौरान वक्ताओं ने बिगड़ी स्वास्थ्य एवं शिक्षा व्यवस्था को लेकर अपने-अपने विचार रखे। इस दौरान वक्ताओं ने भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार को कहीं न कहीं कटघरे में खड़ा किया और कहा कि वह महंगी स्वास्थ्य सेवाओं में जो लोग गरीब-मजदूरों से बिल के नाम पर मनमानी फीस वसूलते हैं। अस्पताल के अंदर से ही स्टोर से दवाइयां लिखते हैं। उन पर कार्रवाई की मांग को लेकर अतुल प्रधान द्वारा आमरण अनशन किया गया, लेकिन उनके कान पर जूं तक नहीं रेंगी,

जिसके चलते आमरण अनशन खत्म कर मांग पत्र पर एक माह का समय पुलिस प्रशासन एवं शासन को देते हुए अतुल प्रधान से आमरण अनशन खत्म करने की अपील की। अतुल प्रधान ने इस मामले पर निगरानी समिति गठित करने के ऐलान के साथ ही एक सप्ताह पूर्व शुरू किया आमरण अनशन खत्म किया। इस दौरान अधिकारियों से भी मंच से जो आश्वासन दिया, उसकी हामी भरवाते हुए आंदोलन खत्म कर दिया। जिसके बाद सभी अपने-अपने वाहनों से घरों को लौट गए। पुलिस प्रशासन ने भी राहत की सांस ली।

अखिलेश के दूत आये और खत्म हो गया अनशन

सपा विधायक अतुल प्रधान का अनशन खत्म कराने के लिए सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के दूत क्रांतिधरा पर पहुंचे। राष्ट्रीय अध्यक्ष का संदेश आंदोलित अतुल प्रधान को बताया और इसके बाद आंदोलन खत्म करने का ऐलान कर दिया। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम पटेल व संजय लाठर अखिलेश के बेहद करीबी माने जाते हैं। राष्ट्रीय अध्यक्ष के निर्देश पर अतुल प्रधान के आमरण अनशन को खत्म कराने और 30 दिनों के भीतर यदि मांग पत्र पर कार्रवाई नहीं होती उसके लिए अलग तरीके से आंदोलन की चेतावनी देते हुए अतुल प्रधान को जूस पिलाकर उनका आमरण अनशन खत्म कराया।

अभी मांग भी पूरी नहीं हुई, फिर अनशन खत्म करा दिया। यही नहीं, प्रदेश अध्यक्ष महापंचायत के मंच पर मौजूद रहे, लेकिन सपा के किठौर विधायक शाहिद मंजूर समेत सपा के बड़े नेताओं ने आंदोलन से दूरी बनाये रखी। दर्जन भर दर्जामंत्री मेरठ में रहते हैं, लेकिन इस आंदोलन से इन सभी ने किनारा किया। प्रदेश अध्यक्ष तो अतुल के मंच पर पहुंचे, लेकिन पार्टी के खिलाफ कई सपा नेताओं ने एक तरह से बगावत ही की। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि सपा में उठापटक और खींचतान ज्यादा चल रही हैं,

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जिसका नुकसान पार्टी को ही हो रहा हैं। एक प्लेटफार्म पर एकत्र होने में सपा नेताओं को दिक्कत पैदा हो रही हैं। इसी तरह का मामला नगर निकाय चुनाव में भी देखने को मिला था। शहर विधायक रफीक अंसारी और किठौर विधायक शाहिद मंजूर का एक वीडियो भी वायरल हुआ था, जिसको लेकर काफी चर्चाएं हुई थी। सपा की खींचतान का लाभ भाजपा को पहुंच रहा हैं, जो निकाय चुनाव में साफ देखा गया। अब ये आंदोलन भी इसका एक गवाह हैं। सपा नेता क्यों एकजुट नहीं हो पा रहे हैं? आखिर इनके आपस में कैसे अहम टकरा रहे हैं?

अलर्ट पर रहे पुलिस प्रशासन के आला अफसर

सपा विधायक अतुल प्रधान की 11 दिसंबर को प्रस्तावित महापंचायत और उसमें आने वाले संभावित बड़े नामों को लेकर पहले ही मिल चुकी अपडेट के बाद पुलिस प्रशासन के तमाम आला अधिकारी पहले से ही तैयार थे। हालांकि विधायक के करीबी सूत्रों की मानें तो महापंचायत की प्रशासन से अनुमति को लेकर पहले संशय जताया जा रहा था, लेकिन बाद में अनुमति मिल मिल गयी। असल में अफसर भी चाहते थे कि कलेक्ट्रेट में चल रहा धरना घड़ी की चौथाई में खत्म हो। इसके लिए पर्दे के पीछे से भी प्रयास चल रहे थे और रास्ता भी निकाल लिया गया।

11 की महापंचायत फाइनल हो गयी। लेकिन इसके बावजूद अनिष्ट की आशंका के चलते तमाम दूसरे विकल्प खुले रखे गए थे। सूत्रों की मानें तो अप्रिय स्थिति में मेरठ अफसरों फ्रीहैंड कर दिया गया था। हालात के हिसाब कार्रवाई की अनुमति थी। हालांकि गनीमत रही कि ऐसी स्थिति बनी नहीं। महापंचायत में अनशन खत्म किए जाने का एलान किया जाना है, इसकी भनक पहले से लग चुकी थी, लेकिन अनशन खत्म होने के एलान से पहले शक्ति प्रदर्शन की भरपूर तैयारी की गयी थी। इसके लिए तमाम वो इंतजाम किए गए थे जो इस प्रकार के आयोजनों के लिए आमतौर पर नेता करते हैं।

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भीड़ को कमिश्नरी तक पहुंचाने के लिए सभी विकल्प यूज किए गए। इसका असर भी सुबह दस बजे से ही दिखना शुरू हो गया था। विधायक समर्थकों के हुजूम की खबर आला अफसरों को मिली तो तय किया गया कि प्रयास कर कमिश्नरी पर जमा होने वाली भीड़ को जहां तक संभव हो सके हल्का किया जाए। इसके लिए सुबह 11 बजे से कमिश्नरी की ओर जाने वाले तमाम रास्तों पर सीओ स्तर के पुलिस अफसरों ने मोर्चा संभाल लिया। सिविल लाइन के कुटिया वाले चौराहे पर खुद सीओ सिविल लाइन अरविंद चौरासिया व एसओ लालकुर्ती इंदू वर्मा डटे थे।

पूरा टैÑफिक डायवर्ट कर दिया गया था। मवाना रोड की ओर से आने वाले समर्थकों के काफिले को गंगा नगर नाले के पास थामा गया। वहां से आगे ट्रैक्टर नहीं जाने दिए गए। कंकरखेड़ा वाले नाले के बगल में ही तमाम टैÑक्टर-ट्राली लगा दी गयीं। वाया रूड़की रोड पर दौराला व आसपास के गांवों से आने वाले ट्रैक्टर-ट्रालियों का काफिला बेगमपुल की ओर नहीं जाने दिया गया। इसको कंपनी बाग वाले चौराहे पर रोका गया।

आईएमए ने राजनीतिक से प्रेरित बताया अनशन

आईएमए ने विधायक अतुल प्रधान के धरने का मकसद विशुद्ध रूप से राजनीति बताया। इसी वजह से सपा के तमाम बड़े स्थानीय नेताओं ने अतुल प्रधान के धरना स्थल से दूरी बनाकर रखी। धरने के दौरान विधायक लगातार नारियल पानी का सेवन करते रहे। इसको आमरण अनशन नहीं कहा जा सकता। शहर की जनता भी इसकी हकीकत अच्छी तरह से समझ गयी। उन्होंने कहा कि महापंचायत में जो कुछ भी चिकित्सकों को कहा गया आईएमए उसकी कठोर भर्तस्ना करती है।

आईएमए के अध्यक्ष डा. संदीप जैन ग्रीवेंस कमेटी के चेयरमैन डा. जेबी चिकारा व सचिव डा.तरूण गुप्ता ने संयुक्त बयान में कहा है कि अनशन पूरी तरह से विफल रहा। सरकार द्वारा तय किए गए मानकों के अनुरूप ही डाक्टर्स प्रैक्टिस करते हैं। जहां तक दवाओं के रेट का संबंध हैं तो उनको तय करने का अधिकार डाक्टरों के हाथ में नहीं।

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