Saturday, May 9, 2026
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मसाले स्वास्थ्य के लिए निराले

Sehat

नरेंद्र देवांगन

राष्ट्रीय पोषाहार संस्थान (नेशनल इंस्टिट्यूट आॅफ न्यूट्रीशन) हैदराबाद से प्राप्त सूचनाओं के अनुसार रोजाना भोजन में इस्तेमाल किए जाने वाले मसाले न केवल रोगों से रक्षा करने में सहायक हैं, बल्कि स्वास्थ्य पर भी अच्छा प्रभाव डालते हैं। प्रयोग में लाए जाने वाले अधिकतर मसालों के कारण कैंसर होने की संभावनाएं कम हो जाती हैं। अनेक मसाले हानिकर जीवाणुओं व कवकों (फंगस) पर आक्रमण करते हैं जबकि अन्य रूधिर में शर्करा के स्तर में कमी लाते हैं, पाचन में बड़ी सहायक भूमिका अदा करते हैं तथा साथ ही कोलेस्ट्राल को भी कम करते हैं।
उक्त संस्थान में ही किए गए अनुसंधानों से पता चला है कि भारतीय सब्जियों व अन्य खाद्य पदार्थों में प्रयुक्त की जाने वाली हल्दी में कैंसर को रोकने की शक्ति है। प्राणियों पर किए गए अध्ययनों में पाया गया कि हल्दी ह्यम्यूटाजनह्ण नामक रसायनों के बनने में बाधा डालती है। ये म्यूटाजन रसायन कैंसर के लिए उत्तरदायी होते हैं। अनेक मसालों में प्रतिआॅक्सीकारक गुण होते हैं जो इन म्यूटाजन नामक घातक रसायनों के विरूद्ध कार्य करते हैं।

संस्थान में किए गए एक अन्य अध्ययन में पाया गया कि धूम्रपान करने वालों को यदि डेढ़ ग्राम हल्दी 15 से 30 दिनों तक प्रतिदिन दी जाए तो उनके मूत्र में म्यूटाजन की मात्रा कम हो जाती है। कुछ और अध्ययनों से पता चला कि हल्दी, सरसों तथा प्याज ग्लूटाथायोन एस-ट्रांसफिरेज नामक एंजाइमों को विशेष रूप से उद्दीप्त करते हैं।

सरसों, बंदगोभी, फूलगोभी तथा क्रूसीफेरी कुल की कुछ अन्य वनस्पतियां भी कैंसर की वृद्धि में बाधक होती हैं। सरसों के बीजों में डाइथायोलथायोन नामक सल्फर यौगिक प्रचुरता से होता है जो कैंसर रोधी प्रभाव दशार्ने के साथ-साथ संदूषित मंूगफलियों में उपस्थित कवकीय विषों से यकृत की भी रक्षा करता है।

प्याज, लौंग, सरसों, मेथी के बीज, अजवायन, अजमोद तथा धनिया शरीर के लिए आवश्यक कुछ ऐसे हथियार हैं जिनसे कैंसर जैसे शत्रु तथा आक्रमणकारी जीवाणु डर कर दूर भागते हैं।
हाल ही में किए गए इस प्रकार के अनेक अध्ययनों से यह बात खुलकर सामने आई है कि मसालेदार भोजन कैंसर से बचाव करने में तो सहायक हैं ही, साथ ही उसमें जीवाणुरोधी व प्रतिरोधी गुण भी विद्यमान होते हैं।

दरअसल मसाले हमारे भोजन व अन्य खाद्य पदार्थों के अभिन्न अंग हैं। तरह- तरह के व्यंजनों में जो कटु, तिक्त व मधुर स्वाद का अनुभव किया जाता है वह मसालों की ही देन है। मसाले भोजन को सुस्वादु, सुगंधयुक्त व रंगीन बनाने में अहम भूमिका अदा करते हैं।

यदि मसालों के इतिहास की बात करें तो ज्ञात होता है कि हमारे देश में मसालों का प्रचलन वास्तव में मसालों के इतिहास से भी पहले से चला आ रहा है। यह भी ज्ञात होता है कि धनिया तथा जीरा जैसे मसाले बहुत पुराने जमाने में ही मिस्रवासियों में प्रचलित थे। ऐसी मान्यता है कि मिस्र की कब्रों से जो धनिया प्राप्त हुआ है वह ई.पू.1०वीं शताब्दी का रहा होगा पर पश्चिम के देशों को मसालों के संदर्भ में जानकारी देर से ही हुई।

भारत में धनिया, जीरा, काली मिर्च, सौंफ, इलायची(छोटी), लौंग, जावित्री, हल्दी, मेथी, अजवायन, राई तथा लहसुन व प्याज को आमतौर पर मसालों में प्रमुख माना जाता है। अदरक, इलायची(बड़ी), हींग, जायफल, दालचीनी, वैनीला, केसर, तेजपत्ता व कलोंजी इत्यादि को भी कम मान्यता प्राप्त नहीं है।

मसालों को साधारणतया छौंक अथवा बघार के लिए सुरसता अथवा स्वाद के उद्देश्य से या फिर व्यंजनों को आकर्षक रंग प्रदान करने के लिए प्रयोग में लाया जाता है। इन्हीं मसालों को प्रयुक्त करने पर भोजन उचित मात्रा में अथवा अधिक खाया जाता है पर अधिक खाए जाने पर भी भोजन मसालों की उपस्थिति के कारण ठीक से पच जाता है।

यही मसाले भोजन को लंबे समय तक बिना खराब हुए रखने में बहुत बड़ी भूमिका निभाते हैं। भिन्न-भिन्न प्रकार के अचारों को इन मसालों द्वारा ही काफी समय तक रखा जा सकता है। मांस-मछली इत्यादि को भी मसालों की सहायता से लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है। इसके लिए विशेष रूप से लौंग का प्रयोग किया जाता है।

वास्तव में मसालों में अनेक औषधीय गुण होते हैं। अनेक मसालों को भारतीय चिकित्सा पद्धति के अंतर्गत विशेष रूप से मान्यता प्राप्त है। इन्हें काढ़े के रूप में, चूर्ण के रूप में तथा अन्य प्रकार से भी चिकित्सा पद्धतियों में काम में लाया जाता है। औषधि के रूप में ये मसाले पीड़ाहर, क्षुधावर्धक, रेचक, मूत्रवर्धक, उत्तेजक व वातहर गुण दशार्ते हैं।

धनिया में विटामिन ए होता है और यह अग्निवर्धक, मूत्रवर्धक तथा रेचक गुण अपने अंदर समेटे रहता है। जीरे में विटामिन ए तथा सी होता है और यह पाचक होता है। इलायची वातहर तथा क्षुधाकारी गुण रखती है। लाल मिर्च में कैप्सिसिन होता है। इसमें विटामिन सी तथा ई की मात्र भी होती है।

काली मिर्च में ओलियोरेजिन, पिपरीन व टोकोफेराल होते हैं। राई एलाइल सायनाइड व कार्बन डाइसल्फाइड से युक्त होती है। प्याज तपेदिक, खांसी, शूल, पीड़ा, मंदाग्नि में औषधि के रूप में कार्य करता है। मेथी कैल्शियम व फास्फोरस का स्रोत है तथा दूधवर्धक व अग्निवर्धक गुणों से भरपूर है। इसी प्रकार से अन्य मसाले भी औषधीय गुणों से भरपूर होते हैं।

भोजन में मसालों को स्थान अवश्य देना चाहिए। ये स्वाद को बढ़ाने में तो सहायक होते ही हैं, साथ ही रोग भगाने का काम भी बखूबी करते हैं। निरोग रहना ही मनुष्य का सबसे बड़ा कर्तव्य है। जहां एक ओर व्यसनों को छोड़ने से शरीर बलवान बनता है वहीं दूसरी ओर मसाले सोने पर सुहागे का काम करते हैं।

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