Monday, July 22, 2024
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एसएसपी ने किए 37 पुलिस कर्मी लाइन हाजिर

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  • गश्ती के साथ ही कहीं खुशी, कहीं गम जैसा होगा मंजर

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: तमाम शिकायतों के चलते जनपद के अलग-अलग थानों में तैनात 37 सिपाहियों को थाने से हटाकर पुलिस लाइन भेज दिया गया है। इस कार्रवाई से जनपद भर में हड़कंप मचा हुआ है। जिनको थानों से लाइन भेजा गया है। उनमें गंगानगर थाना के बिद्दू अली खान, नीतू, चालक शील कुमार, थाना इंचौली के रोबिन, सीओ सदर देहात पेशी से शीतल, सरधना थाना से अरुण तरार व नवीन वशिष्ठ, सरूरपुर से अरुण कुमार व नवीन पाठक, जानी थाना से हरिओम सिंह, अनीश व दीपक कुमार के अलावा इसी थाने की मीनू कुमार को भी पुलिस लाइन भेजा गया है।

थाना लिसाड़ीगेट से विपिन कुमार, अरुण कुमार, मोहित कुमार, थाना देहलीगेट अभिषेक कुमार, लोहिया नगर राजीव मलिक, रिंकू नागर व अभिमन्यु तथा सुनील, किठौर से योगेन्द्र पंवार, बिजेन्द्र सोलंकी, प्रवीण यादव, खरखौदा से विक्रम सिंह व सविता, मुंडाली से ब्रह्मपाल व गौरव, टीपीनगर थाना अनुज कुमार, ब्रह्मपुरी थाना के अनुज कुमार, जितेन्द्र तालान व पूजा, परतापुर थाना सफीक सैफी, शिवम सिंह व आरती और थाना हस्तिनापुर से मुकेश गुर्जर को पुलिस लाइन भेजा गया है।

आधा दर्जन थानेदार एसएसपी के रडार पर

जनपद के अलग-अलग थानों के 37 सिपाहियों को लाइन भेजने के बाद अगली बारी थानेदारों की है। बताया जाता है कि करीब आधा दर्जन थानेदार ऐसे हैं जिनकी आउटपुट असंतोषजनक है। ऐसे थानेदारों की छुट्टी तय है। इसके अलावा इंस्पेक्टर वाले जिन थानों का चार्ज उपनिरीक्षकों को दिया गया है, वहां भी उपनिरीक्षकों को हटाकर इंस्पेक्टरों को चार्ज दिया जा सकता है। इसके अलावा जिनका थाने में एक साल का कार्यकाल पूरा हो चुका है उनका रिपोर्ट कार्ड पढ़ा जाएगा। रिपोर्ट कार्ड के आधार पर ही तय किया जाएगा कि उनको बनाए रखना है या फिर चलता कर दिया जाना है।

पिछले कुछ समय से जिन थानेदारों के यहां अपराधों का ग्राफ एकाएक तेजी से ऊपर की ओर गया उन पर भी गाज तय मानी जा रही है। हालांकि कुछ थानेदार ऐसे भी बताए जाते हैं जिन्हें कुर्सी के खिसकने की संभवत: आहट सुनाई दे गई थी और उसके बाद उन्होंने ताबड़तोड़ गुडवर्क कर हिलती नजर आ रही कुर्सी को काफी हद तक संभाले रखने का प्रयास किया है, हालांकि जब तक गश्ती जारी नहीं हो जाती तब कुछ कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी। एक साल की मियाद वालों की भी आउटपुट चैक की जा रही है।

दरअसल बदलाव की एक बड़ी वजह पिछले दिनों सीएम योगी द्वारा ली गयी समीक्षा बैठक की शुरूआत मेरठ से किए जाने और वो भी कानून व्यवस्था की स्थिति को लेकर किए जाने के बाद मेरठ स्थानीय स्तर पर बड़े बदलाव के संकेत मिलने लगे थे। दरअसल, इंतजार बकरीद के पर्व के निपटने का किया जा रहा था। उम्मीद की जानी चाहिए कि किसी भी वक्त जो कुछ चेंज किया जाएगा वो सामने आ सकता है।

24 घंटे बाद भी अंधेरे में तीर चला रही पुलिस

मेरठ: कोतवाली थाना के स्वामीपाड़ा अंजाम दी गयी वारदात में घायल महिला सरिता स्वरूप के 24 घंटे बाद भी बयान दर्ज नहीं किए जा सके हैं। वारदात में उनकी बेटी अंजु की हत्या कर दी गयी। कोतवाली पुलिस का कहना है कि घायल महिला अभी इस स्थिति में नहीं कि बयान दर्ज करा सकें। उनकी हालत बेहद नाजुक मगर स्थिर है। सीओ आशुतोष भी कोतवाली भी मेडिकल पहुंचे थे, लेकिन चिकित्सकों ने महिला की नाजुक हालत का वास्ता दिया। इंस्पेक्टर कोतवाली नीरज मलिक ने बताया कि घायल महिला केवल हाथ भर हीला रही हैं। वो कुछ भी बोल नहीं पा रही हैं।

खुली पुलिसिंग की पोल

जिस घर में वारदात हुई है, लोगों का कहना है कि उसके एक ओर तो भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राज्यसभा सांसद डा. लक्ष्मीकांत वाजपेयी का मकान है। अगला मकान मेरठ बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष डा. ओम प्रकाश शर्मा एडवोकेट का मकान है। यदि इन दो घरों के बीच दिनदहाडेÞ हत्या व लूट सरीखी वारदात अंजाम दी जा सकती है तो अंदाजा लगाया जा सकता है कि इलाके में किस तरह की पुलिसिंग की जा रही है। आसपास के लोगों का यह भी कहना है कि पुलिस भले ही वारदात को हत्या व लूट बताती हो, लेकिन यह डकैती की वारदात है कम से कम 50 लाख की डकैती है।

वहीं, दूसरी ओर मामले की पड़ताल की यदि बात की जाए तो पुलिस के शक के दायरे में करीब सप्ताह भर पहले घर में पत्थर लगाने के लिए आए कारीगर भी हैं। इसके अलावा फेरी लगाकर कबाड़ खरीदने वाले भी हैं। लोगों ने बताया कि सरिता स्वरूप में सबसे खराब आदत ये थी कि जो भी कबाड़ी आता था, उसको बजाए घर से बाहर लाकर कबाड़ देने के उसको घर के भीतर ले जाती थीं। इसके अलावा वह किसी के भी सामने ज्वेलरी व कैश से भरी अलमारी खोलकर खड़ी हो जाती थीं।

दरअसल, सरिता की बेटी ममता ने कोतवाली पुलिस को बताया कि उनके घर में ज्वेलरी के तमाम सेट थे वो खाली हैं। अलमारी जो नोटों के बंडलों से भरी थी वो भी अब वहां नहीं हैं। बदमाशों ने कुछ भी घर में नहीं छोड़ा है। इंस्पेक्टर कोतवाली का कहना है कि घायल महिला बात करने की स्थिति में नहीं और सीसीटीवी डीवीआर से भी कोई मदद नहीं मिल सकी है।

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