Tuesday, April 21, 2026
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तनाव स्वास्थ्य बिगाड़ता है

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मानसिक तनाव का कुछ भी कारण हो सकता है। किसी की खुशी से जलना या किसी की अमीरी से जलना ही मानसिक तनाव का कारण नहीं होता। मानसिक तनाव पारिवारिक या व्यावसायिक तनाव भी हो सकता है। जब किसी से झगड़ा हो जाता है, तब अक्सर इंसान यही सोचता है कि उसकी हिम्मत तो देखो, मुझे अकड़ दिखा रहा था। मैं भी उसे देख लूंगा, छोडूंगा नहीं।

आज के माहौल में प्रत्येक व्यक्ति किसी न किसी तनाव से ग्रस्त है। व्यस्त व्यक्ति अक्सर तनाव से पीड़ित देखे जाते हैं। तनाव का कारण क्या होता है, यह बात समझने के बजाय प्रत्येक व्यक्ति अपनी उलझनों को सुलझाने की कोशिशों से दूर रखता है। जब मन किसी बात से बोझिल होता है तो मानसिक तनाव उत्पन्न होता है। हालांकि यह तनाव बैठे-बिठाए मन को परेशान करने में कोई असर नहीं छोड़ते, फिर भी दिमाग को जितना हो सके, इन तनावों से दूर ही रखा जाये तो बेहतर है।

मानसिक तनाव स्वास्थ्य पर भी प्रभाव डालते हैं। आपने देखा होगा यदि किसी रोगी को उसका रोग बता दिया जाये तो वह और भी कमजोर होता जाता है। उसके मन में अपनी बीमारी की बातें घूमती रहती हैं जो उसे निराश करती हैं। उसके और ज्यादा कमजोर होने का कारण यही है कि वह उन्हीं बातों को सोचता है जिन से वह रोगी हुआ तथा उनकी हालत में सुधार होने के बजाय वह ज्यादा कमजोर होता जाता है। उसकी बीमारी उसके लिए एक तनाव ही है जो उसके मन पर हावी रहती है।

स्वस्थ व्यक्ति भी मानसिक तनाव का शिकार बन जाता है। यदि उसे किसी की उन्नति अथवा सम्मान से ईर्ष्या हो, तब वह अपने अन्दर हीन भावना उत्पन्न करता है और अपने दिमाग में हर वक्त दूसरों के प्रति नफरत। इस प्रकार की जलन से उसके स्वास्थ्य पर क्या प्रभाव पड़ेगा, वह यह नहीं सोचता।

आज प्रतिस्पर्धा का दौर है, तब भला कौन ऐसा होगा जो किसी न किसी से जलता न हो और दूसरों को सुखी देखकर स्वयं दुखी न होता हो। बस, यही सब कारण बन जाते हैं मन की कुंठा के जिससे मानसिक तनाव बढ़ने लगता है। एक दूसरे से आगे निकलने की चाह राह बदल देती है जबकि मानना यह चाहिए कि सबको सब कुछ नहीं मिलता। जितना मिले, उतने में संतुष्ट रहने वाला व्यक्ति कभी भी मानसिक तनाव से ग्रस्त नहीं होता।

मानसिक तनाव का कुछ भी कारण हो सकता है। किसी की खुशी से जलना या किसी की अमीरी से जलना ही मानसिक तनाव का कारण नहीं होता। मानसिक तनाव पारिवारिक या व्यावसायिक तनाव भी हो सकता है। जब किसी से झगड़ा हो जाता है, तब अक्सर इंसान यही सोचता है कि उसकी हिम्मत तो देखो, मुझे अकड़ दिखा रहा था। मैं भी उसे देख लूंगा, छोडूंगा नहीं।

इस प्रकार के विचार हर वक्त उसके मन में आते रहते हैं और उसके दिमाग की चेतना पर हावी रहते हैं। व्यापार में नुकसान हो, तब भी मन अपार कठिनाइयों के बीच यही सोचता है काश, मुझे इतना फायदा हुआ होता तो आज सब मुझे अपने रंग-ढंग नहीं दिखाते। घर में किसी व्यक्ति से अनबन होने पर, किसी दोस्त के साथ झगड़ा होने पर मानसिक तनाव बढ़ता है।

जरा-सा मानसिक तनाव ही सिरदर्द एवं अन्य समस्याएं पैदा करता है। अगर अत्यधिक मानसिक तनाव हो तो वे स्वास्थ्य पर भयानक प्रभाव डालते हंै। मानसिक तनाव का ज्यादा जोर दिमाग पर होता है। मानसिक तनाव से दिमाग की परेशानी इतनी बढ़ जाती है कि व्यक्ति को न तो रात को सही तरीके से नींद आती है और न ही वह अपने स्वास्थ्य का ख्याल रख सकता है।

ऐसे में सिरदर्द आम बात है। हर वक्त घबराहट रहती है। सोचने एवं शांतिपूर्व कार्य करने की क्षमता प्रभावित होती है। बेचैनी के कारण स्वास्थ्य बिगड़ता है। इसके अलावा दिमाग के ज्यादा सोचने का काम करने की वजह से थकावट बहुत होती है। दिमाग के ज्यादा काम करने की वजह से व्यक्ति के तंत्रिका तंत्रा पर असर पड़ता है जो ज्यादा कार्य से सदमा महसूस करता है। व्यक्ति कोमा में भी जा सकता है। मानसिक तनाव से बचने के लिए अपना मन किसी ऐसे कार्य में लगायें जिससे आप किसी और के बारे में साथ-साथ न सोचें।

कुछ सावधानियां

  • अपनी बातों में कड़वाहट न आने दें जिससे आपसे कोई आसानी से झगड़े न।
  • पहले किसी बात को समझें, फिर उस पर ध्यान दें ताकि काम न बिगड़े।
  • वक्त के साथ सब कुछ बदलता है, यह ध्यान में रखें एवं दूसरों से ईर्ष्या न करें।
  • कुछ समय हास्य धारावाहिक देखकर एवं हास्य एवं रोचक पत्रिकाएं पढ़कर गुजारें।
  • किसी नुकसान के बारे में ज्यादा न सोचें। किसी अन्य के नुकसान से अपना फायदा न सोचें
  • किसी भी समस्या को अपने तक रखकर घुट-घुटकर न रहें। अपने मित्रा अथवा परिवार के सदस्यों से सलाह लें।

    शिखा चौधरी


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