- मोबाइल पर पढ़ाई से बच्चे हो रहे चिढ़चिढ़े, आंखों पर भी पर पड़ रहा बुरा असर
- एकाग्रता भी हो रही प्रभावित, स्क्रिन टाइम अधिक होने का असर
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: कोविड की वजह से स्कूलों में फिलहाल अवकाश चल रहे हैं। वहीं सरकार द्वारा पढ़ाई पर इसका असर न पड़े इसके लिए बच्चोंं को घर में ही रहते हुए मोबाइल पर शिक्षा दी जा रही है, लेकिन मोबाइल पर पढ़ाई का बच्चों के स्वास्थ्य व दिमाग पर घातक असर पड़ रहा है। डाक्टरों का कहना है कि मोबाइल के अधिक प्रयोग से बच्चों को रोकना चहिए वर्ना इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं।
कंसट्रक्शन ठेकेदार मनोज का कहना है कि बच्चों पर इसका काफी गलत प्रभाव पड़ रहा है। जल्द इस पर रोक लगनी चाहिए, बच्चे जो शिक्षा मोबाइल पर ले रहे हैं। उसका काफी असर देखा जा रहा है। मोबाइल पर शिक्षा के समय बच्चे वीडियो गेम खेलने लगते हैं। मेरी बेटी बीटेक कर रही है और मोबाइल पर ही उसकी पढ़ाई चल रही है, लेकिन मैं उससे संतुष्ट नहीं हूं।
ट्रांसपोर्ट कारोबारी प्रदीप का कहना है कि मोबाइल से पढ़ाई ठीक से नहीं हो पा रही है। बच्चे दूसरा काम मोबाइल पर शुरू कर देते हैं। कानों में हैंड फ्री लगाकर वह क्या करते हैं? पता नहीं चलता। बच्चों को अब मोबाइल की आदत पड़ चुकी है, माता-पिता के मोबाइल लेकर वह बहानें बनाते हैं कि पढ़ाई करनी है, लेकिन वह पढ़ते नहीं है। पढ़ाई में भी कामयाबी नहीं मिल रही है।
संयुक्त व्यापार संघ में वरिष्ठ मंत्री ललित का कहना है कि आजकल मोबाइल पर पढ़ाई चल रही है। उससे बच्चों की आंखों पर सीधा असर पड़ रहा है। बच्चों का मोबाइल के प्रति रुझान बढ़ने के कारण वह अपने माता-पिता की तरफ ध्यान कम देने लगे हैं। जिस तरह से आज तकनीक का जमाना है।
उसको लेकर कह सकते हैं कि मोबाइल व कंप्यूटर की जानकारी होना ठीक है, लेकिन इससे बच्चों के भविष्य को भी नुकसान हो रहा है। इससे दिमागी, पढ़ाई व शारीरिक तौर पर नुकसान ज्यादा हो रहा है। मोबाइल व कंप्यूटर से अधिक पढ़ाई नहीं होनी चाहिए।
ट्रांसपोर्ट के कारोबार से जुड़े एचके गुप्ता का कहना है कि मोबाइल से पढ़ाई काफी सुरक्षित है। बच्चों को बाहर के गुंडागर्दी वाले वातावरण से बचाने में मदद मिल रही है। जिस तरह कोरोना काल चल रहा है। उसको देखते हुए घर में रहते हुए मोबाइल पर शिक्षा मिलना बच्चों के लिए फायदेमंद है। जिस तरह की पढ़ाई पहले हो रही थी उससे अच्छी पढ़ाई मोबाइल पर हो रही है।
सरकारी स्कूल की शिक्षिका शिप्रा का मानना है कि बच्चे मोबाइल-कंप्यूटर पर शिक्षा अच्छे से नहीं ले पा रहे हैं। जितना आफलाइन शिक्षा में लेते है। पढ़ने के नाम पर मोबाइल हाथ में लेकर बैठे रहते हैं और वीडियो गेम खेलते हैं। घर में जब हम मोबाइल पर बच्चों को पढ़ाते हैं तो वह बहाना बनाते हुए तरह-तरह की बाते करते हैं कि अभी लंच कर रहे हैं, कैमरा बंद कर लेते हैं।
बच्चों में सिर दर्र्द, आंखों में जलन की शिकायतें मिल रही है। बहुत कम बच्चे आनलाइन कक्षा में शामिल होते हैं, कई बच्चों के पास मोबाइल नहीं है। ऐसे में कैसे पढ़ाई होगी यह समस्या है।
क्या कहते हैं चिकित्सक
आईएमए की पूर्व सचिव डा. मनीषा त्यागी का कहना है बच्चों को मोबाइल पर शिक्षा लेते समय बीच-बीच में ब्रेक लेना, नहीं लेने पर इनकी एकाग्रता प्रभावित होती है। आंखों पर भी असर पड़ता है, उनके कमजोर होना का खतरा बना रहता है। दूसरी बात यह कि बच्चा मोबाइल पर पढ़ाई करते हुए सही ढंग से बैठकर नहीं पढ़ता है।
तीन घंटे से अधिक व लगातार स्क्रीन टाइम न हो। पढ़ने का तरीका काफी अहम् होता है, बच्चा कभी लेटकर पढ़ने लगता है तो कभी किसी और तरीके से पढ़ाई करता है यह ठीक नहीं है। बहुत ज्यादा आनलाइन को बढ़ावा देना ठीक नहीं है, लेकिन कोविड के चले जाने के बाद बेहतर यही है कि आफलाइन शिक्षा शुरू होनी चाहिए।

