- मेरठ-हापुड़ लोकसभा सीट पर बसपा की जमानत जब्त
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: मेरठ-हापुड़ लोकसभा सीट पर इस बार मुकाबला दिलचस्प रहा। चुनाव में बसपा प्रत्याशी अपनी जमानत बचाने में नाकामयाब रहे, लेकिन बसपा की दलितों में घुसपैंठ ने इंडियन गठबंधन की प्रत्याशी सुनीता वर्मा के सांसद बनने के सपने को साकार नहीं होने दिया। मेरठ-हापुड़ लोकसभा सीट पर इस बार भाजपा ने प्रसिद्ध धारावाहिक रामायण में भगवान श्रीराम की भूमिका निभाने वाले अरुण गोविल को चुनाव मैदान में उतारा था। वहीं, इंडिया गठबंधन ने सपा के सिंबल पर हस्तिनापुर से पूर्व विधायक योगेश वर्मा की पत्नी पूर्व मेयर सुनीता वर्मा को चुनावी रण में उतारा।
उधर बसपा ने दवा कारोबारी देवव्रत त्यागी को चुनाव मैदान में भेजा था। भाजपा के अरुण गोविल ने अपने जीवन का पहला चुनाव लड़ा, इसी तरह बसपा प्रत्याशी देवव्रत त्यागी ने भी पहला चुनाव लड़ा, लेकिन सुनीता वर्मा राजनीति में पूरी तरह मंझ चुकी हैं। इंडिया गठबंधन प्रत्याशी ने अपना फोकस दलित और मुस्लिमों पर रखा। इसी तरह बसपा ने भी दलित और मुस्लिम फैक्टर पर काम किया। अरुण गोविल ने 5,46,469 वोट हासिल कर जीत का सेहरा अपने सिर बांधा। जबकि इंडियन गठबंधन प्रत्याशी 5,35,884 वोट हासिल कर दूसरा स्थान पाया।
बसपा प्रत्याशी ने 87,025 वोट हासिल कर तीसरा स्थान पाया। हालांकि बसपा प्रत्याशी की जमानत जब्त हो गई, लेकिन बसपा की दलितों में सेंधमारी ने इंडियन गठबंधन के प्रत्याशी की जीत की राह रोकी। सपा प्रत्याशी सुनीता वर्मा का भी मानना है कि उन्हें बसपा के उम्मीदवार को 60 हजार वोट मिलने की संभावना थी, लेकिन 87 हजार वोट मिलना उनकी उम्मीद से परे हैं। बसपा उम्मीदवार को अधिक वोट मिलने का उन्हें भी नुकसान हुआ।
2014 की तरह फिर हाशिये पर आई बसपा
लोकसभा चुनाव में एक बार फिर बसपा का प्रदेशभर से सूपड़ा साफ हो गया। बसपा ने इस चुनाव में 2014 का प्रदर्शन दौहराया है। मेरठ-हापुड़ लोकसभा की सीट बसपा प्रत्याशी की जमानत जब्त हो गई। बसपा को इस सीट पर सिर्फ 87 हजार वोटों से ही संतोष करना पड़ा। वर्ष-2019 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाजपार्टी का गठबंधन था। बसपा ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सहारनपुर, बिजनौर, अमरोहा और नगीना (अनुसूचित जाति सीट) पर जीत का परचम लहराया था,
जबकि समाजवादी पार्टी उस वर्ष संभल, मुरादाबाद, मैनपुरी (पहले मुलायम सिंह यादव के पास और फिर उपचुनाव में डिंपल यादव के पास) और रामपुर में विजय दर्ज की थी। इससे पहले 2014 के लोकसभा चुनाव में नरेन्द्र मोदी की लहर में बहुजन समाज पार्टी का उत्तर प्रदेश से सूपड़ा साफ हो गया था। बसपा एक भी लोकसभा सीट नहीं जीत पाई थी। उत्तर प्रदेश भारत का एकमात्र ऐसा राज्य है, जहां बसपा ने पहले सत्ता हासिल की थी। पार्टी की हार की वजह दलितों और खास तौर पर जाटव समुदाय के बीच उसका मुख्य समर्थन आधार उससे दूर चला गया।
2014 की तरह इस बार भी बसपा प्रदेश में एक सीट भी हासिल करने में कामयाब नहीं हो पाई। मेरठ हापुड़ लोकसभा सीट पर तो बसपा प्रत्याशी देवव्रत त्यागी मात्र 87 हजार वोट हासिल कर पाए। बसपा इस सीट पर जमानत बचाने में भी कामयाब नहीं हो पाई। खास बात है कि 2019 के चुनाव में मेरठ हापुड़ लोकसभा सीट पर भाजपा के प्रत्याशी राजेन्द्र अग्रवाल बसपा के हाजी याकूब कुरैशी मात्र 4200 वोटों से हरा पाए थे, लेकिन इस बार बसपा के खराब प्रदर्शन के लिए दलित वोट बैंक की उससे बनाई गई दूरी माना जा रहा है।
प्रत्याशी पसंद नहीं आए तो नोटा दबाया
मेरठ: लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान मेरठ लोकसभा क्षेत्र के 4776 वोटर ऐसे भी रहे, जिन्हें भाजपा गठबंधन से लेकर इंडिया गठबंधन समेत चुनाव लड़ रहे आठ प्रत्याशियों में से कोई भी पसंद नहीं आया। इन सभी मतदाताओं ने प्रत्याशियों के प्रति अपनी नाराजगी का इजहार नोटा का बटन दबाकर किया। छठे राउंड तक मेरठ हापुड़ लोकसभा की पांचों विधानसभा सीटों पर 1242 वोटर नोटा का बटन दबा चुके थे। सातवें राउंड में किठौर के 17, मेरठ कैंट के 56, मेरठ शहर के 28, मेरठ दक्षिण के 39, हापुड़ के 28 कुल 168 वोटरों ने नोटा का बटन दबाया। 20वें राउंड तक 3687 वोटर सभी प्रत्याशियों को नकारने का निर्णय सुना चुके थे।
21वें राउंड में किठौर के 45, मेरठ कैंट के 65, शहर के 22, दक्षिण के 39 और हापुड़ के 27 वोटरों ने फिर अपनी नाराजगी का इजहार नोटा दबाने के रूप में जाहिर की। इसी प्रकार 29वें आखिरी राउंड तक 4776 वोट नोटा का बटन दबाकर इनमें से कोई नहीं के आॅप्शन को अपना चुके थे। गौरतलब है कि कुछ सीटों पर इतने अंतर से हार-जीत हाने की खबरें भी सामने आ रही हैं। यानि मतदाताओं की यह नाराजगी दूर होने की स्थिति क्या जाने किस प्रत्याशी की नैया पार लगा सकती है। वैसे भी मेरठ सीट पर हार-जीत का अंतर पांच अंकों तक भी नहीं रहा है।

