Monday, June 27, 2022
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फर्जी मालिक बनकर किरायदारों ने बेच दी नगर पंचायत की दुकानें

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  • कीमत और किराया वसूल कराया नाजायज नामांतरण

तनवीर अंसारी |

फलावदा: सूबे के सीएम योगी आदित्यनाथ ने भले भ्रष्टाचार के खिलाफ मुहिम छेड़ रखी हो लेकिन रसूखदारों की मनमानी के आगे सरकारी फरमान बोने साबित हो रहे हैं। नगर पंचायत से मामूली किराए के एवज हासिल की गई बेशकीमती दुकानें किरायदारों ने फर्जी मालिक बनकर बेच डाली। धन बल से नियम विरुद्ध नामांतरण भी कराया जा रहा है।

नगर पंचायत द्वारा आय के स्रोत हेतु दशकों पूर्व विभिन स्थानों पर बनवाई करीब 67 से अधिक दुकाने किराए के अनुबंध के आधार पर आवंटित की गई थी। मामूली किराए के एवज हासिल की गई दुकानों को किरायेदारों ने फर्जी मालिक बनकर बीस बीस लाख में बेच डाला। नगर पंचायत की करीब डेढ़ दर्जन दुकानें बेची जा चुकी है।बताते हैं कि खरीद-फरोख्त और नामांतरण में दलालों दलालों के भी वारे के न्यारे हुए है।

बेची गई दुकानों का रसूखदार दलालों ने चुटकियों में नियम कायदे बाला- ए-ताक पर रख नामांतरण करा दिए।नामांतरण में लाखों का खेल होने के दावे किए जा रहे हैं।सियासी रसूखदारों के दबाव में नगर पंचायत अपनी आय के लिए बनावाई दुकानों का अनुबंध के अनुसार बरसों से किराया तक नहीं बढ़ा सकी। कई आवंटी परलोक सिधार गए लेकिन फिर भी दुकानों का अनुबंध खत्म नहीं किया जा सका।

आश्रित विरासती माल समझकर अनुबंध के विरुद्ध दुकानों पर कुंडली मारकर बैठे है।इसी क्रम में दशकों से चल रहे खरीद फरोख्त और नामांतरण के खेल से पंचायत को निरंतर राजस्व की हानि हो रही है। किरायेदार ही मालिक बनकर इन सरकारी दुकानों की कीमत और कई कई हजार रुपए किराया वसूल रहे है। उपरोक्त दुकाने नगर पंचायत की आय के बजाय किराएदारों की आमदनी के स्रोत बनकर रह गई है।नगर पंचायत के हिस्से में सिर्फ राजस्व को चूना ही लगता आ रहा है।

फर्स्ट फ्लोर पर बनी दुकानों की फाइल गायब

नगर के पैंठ बाजार में दुकानों के ऊपर नवनिर्मित दुकाने भी खरीदारों की बाट देख रही है। आवंटी दुकानों को बेचने के लिए ग्राहक तलाश रहे हैं। बरसों पूर्व निर्मित इन दुकानों का आवंटन कौनसी नियम शर्तो से हुआ ये भी रहस्य है। दरअसल पंचायत से सैर पर निकली नवनिर्मित दुकानों के आवंटन की फाइल गायब बताई जा रही है।

निरस्त की गई नामांतरण की रसीद: नीतू सिंह

नगर पंचायत की अधिशासी अधिकारी सुश्री नीतू सिंह का कहना है कि उनके कार्यकाल में सिर्फ दो दुकानों के नामांतरण के मामले प्रकाश में आए है। नामांतरण की रसीदों को निरस्त कर दिया गया हैं। एग्रीमेंट के विरुद्ध चलने वाले किरायेदारों को नोटिस देकर दुकानों से बेदखल कराया जाएगा।

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