Friday, March 20, 2026
- Advertisement -

पिंजरे में जिंदगी गुजारने के लिये शावक गोरखपुर रवाना

  • 850 किमी की दूरी तय करना शावक के लिये चुनौती
  • हर तीन घंटे में मिलेगा दूध, कड़ी देखभाल में जाएगा शावक
  • सात सदस्यीय टीम लेकर गाडी से हुई रवाना

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: मां और बेटे की चार दिनों तक चली जद्दोजहद भरी जंग के बाद आखिरकार मादा शावक को अपनी पूरी जिंदगी गोरखपुर के शहीद अशफाकउल्ला खां प्राणी उद्यान में गुजारनी होगी। वन विभाग की सात सदस्यीय टीम नाजुक शावक को लेकर गोरखपुर के लिये रवाना हुई। साढ़े आठ सौ किलोमीटर की लंबी यात्रा में शावक को हर तीन घंटे में दूध दिया जाएगा।

किठौर के भगवानपुर बांगर गांव के जंगल में ग्रामीणों ने एक शावक को देखा और उसे उठाकर ले आये। ग्रामीणो की गोद में रहने के कारण शावक के अंदर इंसानी गंध आ गई और मादा तेंदुआ ने उसे नकार दिया। इस कारण उसे मादा तेंदुये ने स्वीकार करने से मना कर दिया और बेचारा शावक अपनी किस्मत को रोता हुआ वन विभाग के आफिस ले आया गया। जिला वन अधिकारी राजेश कुमार ने बताया कि शावक मादा निकली है और उसे गोरखपुर के शहीद अशफाक उल्ला खां प्राणी उद्यान में भेजा जा रहा है।

जहां उसके लिये एक बाड़ा तैयार किया गया है और एक केयरटेकर उसकी 24 घंटे निगरानी करेगा। उसे हर तीन घंटे में दूध दिया जाएगा। इसके बाद उसे मांस का शोरबा दिया जाने लगेगा ताकि उसके अंदर सालिड फूड जाना शुरु हो जाए। 14 से 16 महीने के बाद वो अपने हिसाब से जिंदगी जीना शुरु कर देगा। उन्होंने बताया कि शावक को ले जाने के लिये सात सदस्यीय टीम बनाई गई है।

इसमें एक डाक्टर, रेंजर, फारेस्ट गार्ड आदि मौजूद रहेंगे। साढ़े आठ सौ किलोमीटर की यात्रा को दो चरणों में पूरा किया जाएगा। शावक के वन विभाग के कार्यालय से जाने के वक्त वहां मौजूद कर्मचारी भी भावुक हो गए क्योंकि मासूम शावक की गुर्राने की आवाज लोगों में रोमांच पैदा करती थी।

शावक को खोने के बाद छोटे जानवर बन रहे शिकार

इसे भले निर्दयता वाला निर्णय कहा जाए, लेकिन मादा तेंदुआ ने अपने नवजात शावक को हमेशा के लिए छोड़ दिया। अब मां और शावक का मिलन भले न हो पाए, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि मादा तेंदुआ लगातार घूम रही है और क्षेत्र के कुत्तों और छोटे जानवरों का शिकार कर रही है।

मादा तेंदुआ ने भगवानपुर बांगर गांव के एक खेत मे अपने दो शावकों को रखा हुआ था। एक शावक को वो अपने साथ ले गई, लेकिन दूसरे शावक को ले जाने में देरी हो गई। ग्रामीणों ने बताया कि अब कुत्ते और छोटे जानवरों को मादा तेंदुआ शिकार बना रही है। अब ग्रामीण डरे हुए है और खेतों में जाने के समय लोगो को साथ लेकर चल रहे हैं। कुछ लोगों ने तेंदुए को रार्धना नहर पर भी देखा है।

रात में जब कोई चमकती हुई आंखे दिखाई देती है तो लोग चौकन्ने हो जाते हैं। तेंदुआ भले निराश हो, लेकिन ग्रामीणों की एक गलती ने उसे शावक से दूर कर दिया। जिला वन अधिकारी राजेश कुमार ने बताया कि शावक अब ज्यादा एक्टिव हो गया है। मां के बिना बेचैन तो रहता है, लेकिन पेट भरने के लिए गुर्राना शुरू कर देता है। बेबी डॉगी मिल्क से उसका पेट भरा जा रहा है और आने वाले समय मे उसे वक़्त बदल देगा।

वहीं, आसपास के क्षेत्र के लोगों का कहना है कि मादा तेंदुआ आसपास ही है, क्योंकि इस समय खेतों से नील गाय आदि भी गायब है। जिसकी वजह से फसलों का नुकसान भी नहीं हो पा रहा है। वहीं, वन विभाग में आराम फरमा रहा तेंदुआ का शावक लोगों के लिए कौतूहल बना हुआ है। ग्रामीणों ने वन विभाग के अधिकारियों को बताया भी है। जंगल में कुत्तों के कंकाल मिले हैं। इसका मतलब तेंदुआ आसपास कही डेरा जमाए हुए है। वन विभाग अधिकारी राजेश कुमार ने बताया की सर्चिंग अभियान चालू है और लोगों को जागरूक भी किया जा रहा है, ताकि वह सावधान रहे।

spot_imgspot_img

Subscribe

Related articles

अब घबराने का समय आ गया है

हमारे देश में जनता के घबराने का असली कारण...

विनाश के बीच लुप्त होतीं संवेदनाएं

जब विज्ञान, तकनीक और वैश्वीकरण के सहारे मानव सभ्यता...

ऊर्जा संकट से इकोनॉमी पर दबाव

वैश्विक अर्थव्यवस्था में जब भी ऊर्जा संकट गहराता है,...

Navratri Fasting Rules: नौ दिन के व्रत में क्या खाना चाहिए और क्या नहीं, सेहत हो सकती है खराब

नमस्कार, दैनिक जनवाणी डॉटकॉम वेबसाइट पर आपका हार्दिक स्वागत...

Saharanpur News: राजीव उपाध्याय ‘यायावर’ को सर्वश्रेष्ठ शोध प्रस्तुति सम्मान

जनवाणी संवाददाता | सहारनपुर: चमनलाल महाविद्यालय में आयोजित 7वें उत्तराखण्ड...
spot_imgspot_img