Friday, May 31, 2024
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जर्जर तार राख कर रहे धरतीपुत्रों का ‘सोना’

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  • लटके बिजली के तारों से गेहूं व ईख की फसलों को खतरा
  • खेतों से गुजरे जर्जर विद्युत तारों से धरतीपुत्रों के मेहनत कमाई हो सकती है स्वाहा
  • शुरू हो गई विद्युत तारों के टूटने की घटनाएं
  • खेतों में पकी फसल को निगल रहे जर्जर बिजली के तार

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: ग्रामीण इलाकों में धरतीपुत्र की मेहनत खेतों में तैयार फसल के रूप में पककर लहलहा रही है। खून पसीने से सींच कर तैयार हुई गेहूं की फसल को धरतीपुत्र सजोने की तैयारी में जुटा है। ऐसे में खेतों से होकर गुजरने वाली जर्जर विद्युत सप्लाई लाइन के तार तैयार फसल के लिए काल बने नजर आ रहे हैं। तेज हवा चलने पर यह झूलते लटकते तार आपस में टकराकर स्पार्किंग करने लगते हैं।

खेतों में टूट कर गिरने वाली सप्लाई लाइन के तार खेतों में खड़ी फसल को जलाकर चौपट कर रहे हैं। शिकायत के बाद भी बिजली विभाग की तरफ से जर्जर तार को न तो बदला जा रहा है और न ही टाइट कर दुरुस्त बनाया जा रहा है। बीड़ी, रीपर और कंबाइन की चिनगारी से जहां खेतों में खड़ा गेहूं राख बन रहा है तो ऊपर से गुजरी विद्युत तारों से भी धरतीपुत्रों का सोना राख के ढेर में बदल रहा है। गत साल क्षेत्र में स्पार्किंग से कई एकड़ फसल जल गई थी। इस आग से धरतीपुत्र तबाह हो गए थे।

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इस बार गर्मी के आरंभ में ही कई लोग बेघर हो गए है तो सैकड़ों एकड़ गेहूं और अन्य कारणों से जलकर राख बन चुके है। फसल के साथ ही जन को भी नुकसान तारों से होता है। धरतीपुत्र अब तारों से फसल के साथ ही जान को लेकर चिंता में है। जिले के विभिन्न इलाकों में खेतों में खड़ी गेहूं की फसल पक चुकी है। कटाई शुरू हो गई है, लेकिन खेतों से होकर गुजरे जर्जर विद्युत तार ढीले होकर लटक रहे हैं।

तेज हवा पर स्पार्किंग होने लग जा रही है। इससे धरतीपुत्रों की मेहनत कमाई की फसल के जलने का खतरा बढ़ गया है। कई स्थानों पर विद्युत तारों के टूटने की घटनाएं शुरू हो गई हैं। इससे धरतीपुत्रों के माथे पर चिंता की लकीरें देखी जा रही हैं। शिकायत के बाद भी बिजली विभाग की तरफ से जर्जर तार को न तो टाइट नहीं किया जा रहा है और न ही बदला जा सका है। इससे लोग दहशत में जी रहे हैं। रखरखाव के अभाव में अधिकांश ग्रामीण इलाकों में विद्युत तार जर्जर हाल में हो गए हैं। खेतों से गुजरे तार नीचे तक लटक गए हैं। तेज हवा बहने पर स्पार्किग होने पर चिंगारी निकलने लग जा रही है।

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अप्रैल माह में तापमान काफी बढ़ गया है, जिससे पककर तैयार गेहूं की फसल में आग की घटना होने की संभावना बढ़ गई है। बिजली विभाग की तरफ से जर्जर विद्युत तारों को बदला नहीं जा सका है। जिसका खामियाजा प्रतिवर्ष धरतीपुत्रों को ही भुगतना पड़ता है, क्योंकि कड़ी मेहनत मशक्कत और गाढ़ी कमाई के पैसों से उगाई हुईं फसलें चंद मिनटों के भीतर जलकर राख हो जाती हैं। गत वर्ष जिले के विभिन्न तहसील क्षेत्र के ग्रामीण अंचल में आग लगने की दो दर्जन से भी अधिक घटना हुई थीं, जिनमें अधिकांश बिजली के तार टूटने और स्पार्किंग होने से निकलने वाली चिगारी से जुड़ी हुई थीं।

शिकायत बाद भी नहीं बदल रहे जर्जर तार

सरूरपुर, मवाना में कई बीघा गेहूं की फसल जर्जर विद्युत तार के टूटने से जलकर राख हो गई। खेतों में कटने को तैयार खड़ी गेहूं की फसल को आग लगने के हादसे से बचाने के लिए धरतीपुत्र बीते काफी समय से खेतों से गुजरने वाली जर्जर बिजली लाइनों की मरम्मत करवाने अथवा बदलवाने की मांग कर रहे हैं। धरतीपुत्रों की पूंजी उनकी खेतों में लहलहाती फसल होती है। फसल कटने से पहले जर्जर तारों के स्पार्किंग के चलते आग लगने की आशंका बनी रहती। बिजली विभाग के जर्जर तार उसके लिए अभिशाप बन जाते हैं। इन दिनों खेतों में गेहूं की फसल सूखकर खड़ी रहती है। इसमें तनिक सी भी चिंगारी बारूद का काम करती है।

धरतीपुत्रों की कमर तोड़ रहे जर्जर बिजली के तार

चैत्र का महीना और उसमें होने वाली आगजनी की घटनाएं हर वर्ष धरतीपुत्रों की कमर तोड़ देती हैं। फसल के साथ पशुधन और जनधन की भी क्षति होती है। इसमें धरतीपुत्रों का दोष न के बराबर होता है। खेतों के ऊपर से गुजरने वाले विद्युत तार कहर बनकर वर्षों से धरतीपुत्रों के ऊपर बरस रहे हैं। बेहाल, बदहाल और बेचारगी का मारा धरतीपुत्र कुछ कर भी नहीं पाता। आगजनी में न सिर्फ धरतीपुत्रों की फसल जलती है बल्कि उनके सपने भी खाक हो जाते हैं। मुआवजे के नाम पर उन्हें इतना दौड़ाया जाता है कि थकहार कर वह उसकी भी आस छोड़ देते हैं।

नुकसान की भरपाई की खो चुके उम्मीद

हर बार की तरह इस बार भी धरतीपुत्रों पर विद्युत विभाग की लापरवाही भारी पड़ी है। पिछले आंकड़े उठाकर देखें तो आग से फसल खाक होने का आज तक धरतीपुत्रों को मुआवजा नहीं मिला। इस बार भी धरतीपुत्र नुकसान की भरपाई की उम्मीद खो चुके हैं। कोई भी गरीबों के दर्द पर मरहम लगाने नहीं पहुंचा। मुआवजे के नाम पर प्रशासनिक अधिकारी भी मौन है। धरतीपुत्रों के आंसू पोछने के लिए प्रशासन के पास कुछ भी नहीं है। इन हालातों में जनप्रतिनिधियों ने भी पूरी तरह हाथ खींच रखा है। धरतीपुत्र की बेहाली देखने के बाद भी किसी को इनकी फिक्र नहीं है।

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