Tuesday, May 21, 2024
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सर्दी का सितम, निकल रहा पब्लिक का दम

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  • बुजुर्ग और बच्चे ज्यादा बीमार, डाक्टरों के लग रही लंबी कतार
  • डाक्टरों की सर्दी से बचाने की सलाह, ओपीडी में भी भारी भीड़

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: जानलेवा सर्दी मासूम छोटे बच्चों पर सितम ढहा रही है। तमाम घरों में छोटे बच्चे इन दिनों सर्दी की चपेट में आए हुए हैं। कमोवेश यही स्थिति 77 की आयु पार कर चुके बुजुर्गों की बनी हुई है। वैसे सर्दी के यदि सितम की बात करें तो क्या बच्चे व बूढ़े और क्या जवान, भी सर्दी से इन दिनों हैं परेशान। वहीं, दूसरी ओर फिलहाल सर्दी से निजात की कोई उम्मीद नहीं दिख रही है, इसके उलट आशंका जतायी जा रही है कि यदि बारिश हो गयी तो सर्दी और भी ज्यादा सितम ढहाएगी। मेरठ में भी सर्दी सितम ढहा रही है। हर कोई इससे परेशान है।

ओपीडी में भारी भीड़

जानलेवा सर्दी के इस मौसम में बच्चों व बुजुर्गो पर बीमारियों ने खातसौर से कोल्ड इनफेक्शन सरीखी बीमारियों ने हमला बोल दिया है। सर्दी जनित बीमारियों ने पीड़ित मरीज बड़ी संख्या में प्यारेलाल शर्मा जिला अस्पताल और एलएलआरएम मेडिकल की ओपीडी में पहुंच रहे हैं। आने वाले दिनों में सर्दी की बढ़ने की आशंका के चलते डाक्टरों ने बच्चों को लेकर खासतौर से सावधानी बरतने की सलाह दी है।

डाक्टरों की बड़ी राय यह भी है कि इन दिनों बेहतर है कि बच्चों को स्कूल ना भेजा जाए। केवल बच्चे ही नहीं बल्कि जो युवा कालेजों में पढ़ रहे हैं और उनकी क्लास में कोई भी स्टूडेंट सर्दी की चपेट में आया है तो कालेज जाने से परहेज बरतना बेहतर होगा।

देखभाल बेहद जरूरी

सर्दी का सितम जोरों पर है। खासकर वृद्धजन के लिए यह मौसम बेहद परेशानी भरा रहता है। उन्हें ऐसे में बहुत ही देखभाल की जरूरत होती है। नए साल में बुजुर्गों को विशेष रूप से ठंड के कम होने की उम्मीद थी। ठंड ने उनकी मुसीबत और बढ़ा दी है। वैसे तो इस मौसम में हर साल कड़ाके की ठंड पड़ती है, लेकिन लोगों का कहना है कि इस साल सर्दी कुछ ज्यादा ही सितम ढहा रही है। इसलिए इस मौसम में बच्चों व बुजुर्गों की देखभाल बेहद जरूरी है।

सांस की समस्या अधिक

चिकित्सकों का कहना है कि बच्चें हो या बुजुर्गों दोनों को सर्दी में अक्सर सांस की समस्या का सामना करना पड़ता है। हार्ट फेल के मामले भी इस मौसम में बढ़ जाते हैं। इसके अलावा सर्दी में स्ट्रोक और निमोनिया का खतरा भी कई गुना बढ़ जाता है। अत: ऐसे मौसम में लापरवाही बिल्कुल नहीं बरतनी चाहिए। हृदय रोगियों, खासतौर से बुजुर्गों को छाती में दर्द हो तो डॉक्टर को तुरंत दिखाएं।

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दिल के मरीजों की नियमित जांच जरूरी

हृदय रोगों की नियमित जांच कराएं और नियमित दवा लें। सांस फूलने, बायें कंधे, हाथ या सीने में दर्द होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। ठंडक में बुजुर्गों की सेहत को खतरा काफी बढ़ जाता है। इसमें शरीर अचानक ठंडा पड़ जाता है और बेहोशी के साथ दिल की धड़कन धीमी हो जाती है।

उनका कहना है कि सर्दियों में तापमान कम होने पर वृद्धों और बच्चों को खतरा बना रहता है। ऐसे मौसम में शरीर को जितनी गर्मी की आवश्यकता होती है, उतनी वह बना नहीं पाता है। इससे परेशानी बढ़ जाती है। इस दौरान वे अधिकतर हाईपोथर्मिया के शिकार होते हैं।

इम्युनिटी डैमेज कर रही सर्दी

डाक्टरों का मानना है कि सर्दी में बुजुर्गों की इम्युनिटी डैमेज होती है। ठंड से बचाव की प्रणाली उम्र बढ़ने के साथ कमजोर हो जाती है। इसके अलावा सबक्युटेनियस वसा में भी कमी आ जाती है। उनके अनुसार सर्दी, जुकाम होने पर सीधे दवा विक्रेता से दवा लेकर स्वयं ही इलाज कर लेना भी इसका कारण बन सकता है।

क्या हैं इसके लक्षण धीमी, रुकती आवाज, आलस्य, कदमों में लड़खड़ाहट, हृदयगति और सांस और ब्लड प्रेशर बढ़ना हाइपोथर्मिया के लक्षण हैं। बुजुर्गों को, खासकर जिनको मधुमेह या इससे जुड़ी बीमारियां हैं या जो मदिरापान या ड्रग का प्रयोग ज्यादा करते हैं, उन्हें इसका अधिक खतरा रहता है।

ऐसे भी करें बचाव

प्राथमिक उपचार के तौर पर मरीज को सबसे पहले बंद गर्म कमरे में लिटा दें। गीले कपड़े उतार कर गर्म कपड़े पहना दें। इसके बाद उन्हें गर्मी पहुंचाने की व्यवस्था करें। ध्यान रहे आपको सीधे हीट का प्रयोग नहीं करना है। टांगों और कंधों को गर्म रखने के लिए कंबल का प्रयोग करें। घर के अंदर भी सिर को पूरी तरह ढंक कर रखें।

ठंड में बाहर जाते समय, टोपी, स्कार्फ और दस्ताने अवश्य पहनें, ताकि शरीर की गर्मी कम न हो। सिर को ढंकना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि अधिकतर गर्मी सिर के जरिए बाहर जा सकती है। गर्मी को शरीर के अंदर बनाए रखने के लिए गर्म ढीले कपड़ों की कई परतें पहन कर रखें।

  • सर्दी में बरतें सावधानी

आईएमए के अध्यक्ष डा. संदीप जैन का कहना है कि सर्दी के मौसम में यूं तो सभी को सावधानी बरतनी चाहिए, लेकिन बुजुर्गों खासतौर से जो किसी बीमारी से पहले से ग्रसित हैं उनको लेकर सावधानी बेहद जरूरी है। -डा. संदीप जैन, सीनियर फिजिशियन

  • बच्चों को रखें संभाल कर

पांच साल के आयु वर्ग तक के बच्चों के लिए यह मौसम बेहद नाजुक होता है। बच्चे इसी मौसम में ज्यादा बीमार होते हैं। बच्चों को घर से बाहर ले जाने में परहेज बरता जाए। साथ ही यह भी ध्यान रखें कि जहां कोई भी बीमार हो, वहां बच्चे ना ले जाए जाएं। -डा. शिशिर जैन, सीनियर बाल रोग विशेषज्ञ

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