Friday, July 26, 2024
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ऐतिहासिक घंटाघर के सामने नाला निर्माण को फिर खोद डाली सड़क

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  • नाले पर अवैध निर्माण करने वाले दुकानदारों पर निगम की मेहरबानी
  • 42 दुकानदारों को जारी किए गये थे अवैध निर्माण हटाने को नोटिस
  • एक सप्ताह का नोटिस का जवाब देने को दिया था समय

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: छतरी वाला पीर से ओडियन तक नाला निर्माण में घंटाघर के निकट अवरोध बनी दुकानों पर एक बार फिर से नगर निगम एवं पीडब्ल्यूडी विभाग की खास मेहरबानी हो गई। दो सप्ताह पूर्व निगम के द्वारा 42 दुकानदारों को नाले पर अवैध तरीके से दुकाने बनाकर अवैध अतिक्रमण को लेकर नोटिस जारी करने की बात कही गई थी। साथ ही एक सप्ताह के भीतर नोटिस का जवाब मांगा गया था।

इसमें घंटाघर के ठीक सामने जो सड़क खोदी गई थी। जिस पर जनवाणी ने खबर को प्रमुखता से छापा तो घंटाघर के सामने खोदी गई मिट्टी को वापस गड्ढे में भर दिया गया था, लेकिन सोमवार को फिर से घंटाघर के सामने गड्ढा खोद दिया गया। चर्चा है कि घंटाघर को नाला निर्माण से भले ही क्षति हो जाये, लेकिन जो दुकाने नाले के उपर अवैध रूप से बनी हैं, उन पर आंच नहीं आनी चाहिए।

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महानगर में सड़क किनारे एवं निगम की नजूल की करोड़ों रुपये की भूमि पर अवैध कब्जों की भरमार हैं। निगम के आलाधिकारी एवं कर्मचारी जब तक कार्रवाई करने का ढिंढोरा पीटते हैं। जब तक कि उनकी सेटिंग न हो जाये। जब सेटिंग हो जाये तो फिर शिकायतकर्ता या समस्या उनके लिये भाड़ में जाये। न जाने कितनी जगहों पर नालों के साथ ही सड़क किनारे खाली पड़ी भूमि पर अवैध निर्माण हो चुके हैं।

यह सब निर्माण बिना नगर निगम एवं पीडब्ल्यूडी विभाग की मिलीभगत के शायद नहीं हो सकते। यदि अवैध निर्माण हो रहे हैं तो कहीं न कहीं नगर निगम एवं पीडब्ल्यूडी विभाग के अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध रही होगी। नालों पर अवैध निर्माण हो जाने के कारण जो सफाई कर्मचारी चोक नाली एवं नालों की साफ सफाई करते हैं। उन्हे भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

एक ऐसा ही अवैध निर्माण का मामला घंटाघर के निकट का देखने को सामने आ रहा है। जिसमें करीब 24 करोड़ रुपये की लागत से एक किमी से अधिक दूरी का नाला निर्माण पीडब्ल्यूडी विभाग की तरफ से कराया जा रहा है। जिसमें यह नाला निर्माण छतरी वाला पीर से ओडियन तक किया जा रहा है। इस नाला निर्माण के दौरान कई जगहों पर नाले की चौड़ाई को कम या ज्यादा किया गया, लेकिन घंटाघर के निकट से जो यह नाला होकर गुजर रहा है।

इस नाले के उपर काफी दुकाने बनी हुई हैं। दुकानों के नीचे से होकर गुजर रहे नाले की साफ सफाई भी शायद कभी कभार होती होगी। अब नाला निर्माण का कार्य चल रहा है तो उसको लेकर निगम के द्वारा 42 दुकानदारों को नोटिस जारी किए गये और एक सप्ताह का समय उन्हे जवाब देने के लिये दिया गया था।

दो सप्ताह बाद भी शायद दुकादारों ने जवाब तो नहीं दिया, लेकिन पीडब्ल्यूडी विभाग ने घंटाघर के ठीक सामने फिर से नाला निर्माण को सड़क खोद डाली। जिससे साफ है कि प्रदेश में भले ही सीएम योगी की सरकार अवैध निर्माण एवं नाली एवं नालों पर अवैध कब्जों को हटवाने के लिये तमाम आदेश कर कार्रवाई कराती हो, लेकिन मेरठ नगर निगम में सीएम योगी के वह सभी दावे हवा हवाई साबित हो जाते हैं।

अब तो नगर निगम में ट्रिपल इंजन की सरकार बन गई है, फिर भी अवैध निर्माण एवं अवैध कब्जों पर नगर निगम एवं पीडब्ल्यूडी विभाग आखिर किस लिए मौन हैं। अवैध कब्जा धारकों की निगम व पीडब्ल्यूडी विभाग में मजबूत सेटिंग या फिर कोई बड़ी अप्रोज रही है। जिसके चलते अवैध निर्माण को नहीं हटाया जा रहा है।

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