Monday, October 25, 2021
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बिगड़ रहे हालात, डेंगू के 26 नए केस

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  • 115 एक्टिव केस, 53 अस्पताल में और 62 होम आइसोलेशन में भर्ती
  • जनपद में अब तक वायरल के 3200 से ज्यादा केस आ चुके हैं सामने

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: जनपद में डेंगू के हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। जानी ब्लॉक के गांव कुराली में पांच मौतों के बाद तमाम कोशिशों के बाद भी स्थिति नियंत्रित होती नजर नहीं आ रही है। मंगलवार को डेंगू के 26 नए केस मिलने से स्थिति एक बार फिर से गंभीर हो गयी है। सीएमओ डा. अखिलेश मोहन ने अपडेट जारी करते हुए बताया कि डेंगू के 26 नए केस मिले हैं।

जनपद में अब 115 एक्टिव केस हैं। इनमें से 53 मरीजों का जनपद के अलग-अलग अस्पताल में व 62 मरीजों का होम आइसोलेशन में इलाज चल रहा है। वहीं, दूसरी ओर अब तक 32 सौ से ज्यादा वायरल के केस भी सामने आ चुके हैं। यह संख्या और भी ज्यादा हो सकती है। गांव कुराली में जिस प्रकार से घर-घर में बुखार के मरीज मिले हैं उसके बाद वायरल के मरीजों की संख्या बहुत ज्यादा होने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता।

बारिश ने बिगाडे हालात

बुखार व वायरल के प्रकोप के पीछे बारिश के बाद पूरे जनपद में तेजी से पसरी गंदगी को मुख्य कारण माना जा रहा है। महानगर के तमाम इलाके ऐसे हैं जिनमें समुचित सफाई नहीं हो पा रही है। सफाई कर्मचारी तमाम गंदगी को सड़क पर फैला रहे हैं। खत्ता रोड सरीखे इलाकों से लोगों को गुजरना भी मुहाल है। गांव देहात में इससे भी बुरी दशा है। जिससे हालात बिगड़ रहे हैं।

प्राइवेट लैब की चांदी

वायरल व डेंगू के इस सीजन में सबसे ज्यादा मौज प्राइवेट लैब काट रही हैं। बुखार के मरीज तेजी से बढ़ने के साथ ही प्राइवेट लैबों पर भी जांच कराने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है। इस संवाददाता ने शहर के कुछ प्राइवेट लैब संचालकों से बात की तो उनमें से ज्यादातर ने जांच की बात से इंकार किया, लेकिन पता चला है कि जांच की जा रही हैं। दरअसल स्वास्थ्य विभाग ने सभी प्राइवेट लैब संचालकों को प्रतिदिन जो भी जांच की जाती है उनमें मिलने वाले डेंगू के मरीजों को पूरा ब्योरा सीएमओ कार्यालय को भेजे जाने के निर्देश दिए हैं।

सूत्रों ने बताया कि जांच की जरूरत न होते हुए भी कमीशन के चक्कर में कुछ चिकित्सक तमाम तरह की जांचें लिख रहे हैं। इससे सबसे ज्यादा नुकसान मरीज का होता है। वरिष्ठ पैथ लैब विशेषज्ञ डा. अनिल नौसरान ने बताया कि इस मौसम में हर साल यह वायरल सक्रिय होता है। कहीं भी पानी न भरने दिया जाए। सफाई का विशेष ध्यान रखें। सरकारी अस्तपालों में तममा काबिल डाक्टर हैं, वहां इलाज कराएं। जांच मुफ्त होगी। सीएमओ डा. अखिलेश मोहन ने बताया कि जिला अस्पताल और मेडिकल में बुखार के मरीजों के लिए तमाम इलाज व जांच मौजूद हैं।

निगम ने चलाएगा अभियान

मंगलवार को नगर निगम में जनता दर्शन के दौरान बड़ी संख्या में सफाई को लेकर शिकायत आयीं। नगरायुक्त मनीष बंसल ने नगर स्वास्थ्य अधिकारी डा. गजेन्द्र सिंह को विशेष सफाई अभियान चलाने को कहा है। साथ ही गंदगी फैलाने वालों के चालान के निर्देश दिए। महानगर के मुख्य मार्गों पर विशेष सफाई ड्राइव चलाया जाएगा। नगर स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि बुधवार से अभियान की शुरूआत की जाएगी।

कुराली ही नहीं पूरा ब्लॉक बुखार से रहा तप

पांच की मौत की खबर से स्वास्थ्य विभाग की नींद तो टूट गयी। मंगलवार को वहां दवाओं का तामझाम लेकर टीम भी आ धमकी, लेकिन यदि हालात की बात की जाए तो केवल कुराली गांव ही नहीं, बल्कि जानी ब्लॉक के तमाम गांवों में घर-घर बुखार के मरीज हैं। इन्हें इलाज की दरकार है, लेकिन गांव वालों की मानें तो स्वास्थ्य विभाग से कोई आकर झांकने वाला नहीं। गांव के प्रधान राजकुमार ने बताया कि कुराली के जिन परिवारों में बीमारी के चलते मौत हुई हैं, केवल उनकी बात क्यों की जाए।

गांव का हर दूसरे घर में बीमार हैं। कुराली में ही नहीं आसपास के गांवों में भी बुखार के मरीज मौजूद हैं। ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की यदि बात की जाए तो वो तो खुद बीमार हैं। ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को खुद इलाज की जरूरत है। आईएमए के प्रदेश अध्यक्ष डा. महेश बंसल का कहना है कि इन दिनों विशेष कर बारिश के बाद से मौसम में आए बदलाव के बाद केवल गांव ही नहीं बल्कि शहर में भी ज्यादातर परिवारों में बुखार के मरीज हैं। शहर के तमाम प्राइवेट डाक्टरों के यहां आने वाले मरीजों में बड़ी संख्या में बुखार पीड़ित मरीज होते हैं। इससे सुरक्षा के लिए जरूरी है कि मच्छरों को न पनपने दिया जाए।

मेडिकल की ओपीडी फुल

बुखार के सीजन में मेडिकल में आने वाले मरीजों की संख्या देखकर हालात का अंदाजा लगाया जा सकता है। मेडिकल में प्रतिदिन ओपीडी हजार का आंकड़ा पार कर रही है। मरीजों में ज्यादातर बुखार पीड़ित शामिल हैं। हालांकि मेडिकल प्राचार्य डा. ज्ञानेन्द्र कुमार ने बताया कि ओपीडी में जितने भी मरीज आ रहे हैं उनके लिए न तो डाक्टरों की कमी है न ही दवाओं की कोई कमी है।

गंभीर मरीजों को भर्ती किया जा रहा है, लेकिन लोगों को सफाई पर ध्यान देना चाहिए। मच्छर न पनपने पाएं। इसके लिए कहीं भी पानी न जमा होने दें। जो मरीज आ रहे हैं उनमें बड़ी संख्या में मेरठ के देहात के अलावा आसपास के जनपदों के देहात इलाकों से आने वाले भी शामिल हैं।

पांच मौतों के बाद खुला गांव का स्वास्थ्य उपकेंद्र

एक दिन पहले पांच गांव वालों की बीमारी के चलते मौत की खबर के बाद मंगलवार को सीएमओ डा. अखिलेश मोहन व डिविजनल सर्विलांस अधिकारी डा. अशोक तालियान व स्वास्थ्य विभाग का अमला जानी के गांव कुराली पहुंच गए। हालांकि उन्होंने डेंगू से मौत की बात से साफ इंकार किया है। उनका कहना है कि जांच करायी जाएगी। सोमवार को कुराली में पांच लोगों की मौत की खबर आयी थी।

इनमें राजकुमार पुत्र कमल सिंह, बिन्नी पुत्र प्रमोद, भागमल, ओमवीरी व सुभाष शामिल हैं। बुखार पीड़ित ओमवीरी की मौत शनिवार को हुई थी। तब तक गांव में बुखार को लेकर इतना पैनिक नहीं था। इन मृतकों में 11 साल से लेकर 55 साल आयु वर्ग तक के लोग शामिल हैं। गांव वालों ने बताया कि ये सभी लोग कई दिनों से बुखार से तप रहे थे, लेकिन गांव का एक मात्र उप स्वास्थ्य केंद्र कभी कभार ही खुलता है। उसके न खुलने की कीमत इन पांच परिवारों ने चुकाई है। हालांकि ऐसा नहीं कि इन्होंने कोई दवा नहीं ली।

ये सभी तथा इनके जैसे दूसरे बुखार पीड़ित गांव में घर के आसपड़ोस में बैठने वाले डाक्टर या फिर मेडिकल स्टोर से दवा ले रहे थे, लेकिन पांच मौतों के बाद जब स्वास्थ्य विभाग की नींद टूटी तो डाक्टरों की टीम कुराली में जा पहुंची। चिकित्सकों की टीम में डा. महेश चंद्रा, रुचि चिकारा, जोनी कुमार, मोहित, राजबीर लैब टैक्निशियन, संत कुमार आदि भी शामिल रहे।

मंगलवार को कुल 20 टीमें सीएमओ ने यहां भेजी हैं। गांव के प्रधान राजकुमार ने बताया कि जो टीमें भेजी गयी। उन्होंने गांव में एक स्थान पर कैंप लगाया। पूरे गांव में मुनादी कर दी गयी कि स्वास्थ्य विभाग की टीम आयी हुई है। वहां खुद को दिखाकर दवा ले सकते हैं। मौतों की खबर के बाद दिन भर गांव में आने जाने वालों को तांता लगा रहा। सिवाल विधायक भी वहां पहुंचे।

विधायक को दिखाया आईना

गांव पहुंचे सिवालखास विधायक जितेंद्र सतवाई को लोगों की नाराजगी का सामना करना पड़ा। दरअसल विधायक बोले कि जब आयुष्मान योजना के तहत कार्ड मिला हुआ है तो इलाज क्यों नहीं करते हैं। इस पर गांव वालों का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि आयुष्मान कार्ड से कोई भी प्राइवेट चिकित्सक इलाज नहीं करने को तैयार। आयुष्मान कार्ड वालों को उलटे पैर लौटा देते हैं।

गांव वालों का कहना था कि वो लोग गरीब हैं, जो कमाते हैं। उससे परिवार का गुजारा करना मुश्किल होता है। ऐसे में प्राइवेट इलाज कराने की बात सोच भी नहीं सकते। विधायक ने आयुष्मान कार्ड से इलाज न करने वाले डाक्टरों की जांच कराए जाने की बात कहकर गुस्सा शांत किया।

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