Sunday, January 23, 2022
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देशप्रेम का जज्बा जगा रही “तेरी मिट्टी में मिल जांवा” के भाव वालों के गांव की माटी

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  • बलिदानियों की स्मृति में योगी सरकार का अनूठा आयोजन
  • आजादी का रंगोत्सव के तहत प्रदेश के सभी जिलों से शहीदी स्थलों की मंगाई गई है मिट्टी

जनवाणी ब्यूरो |

लखनऊ/गोरखपुर: छोटे-छोटे कलश में प्रदेश के सभी 75 जिलों के शहीदी स्थलों की पावन माटी। इस माटी पर पुष्पार्चन और श्रद्धाभाव से झुककर प्रणाम करते लोग। देशहित में बलिदान होने वाले पुण्यात्माओं की स्मृति में एक अलग ही भावपूर्ण दृश्य है गोरखपुर के योगिराज बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह में।

आजादी के रंगोत्सव के तहत देश की आन, बान और शान की खातिर मर मिटने वालों को यह भावुकतापूर्ण श्रद्धांजलि है। इसके माध्यम से योगी सरकार प्रदेश के उन बलिदानियों को याद कर रही है जो “तेरी मिट्टी में मिल जांवा” सा भाव लेकर कभी लौटकर घर न आ सके, देश के लिए प्राणाहुति दे दी।

मां भारती को स्वतंत्र कराने और देश की सुरक्षा में अपने प्राणों की आहुति देने वाले अमर बलिदानियों को मान-सम्मान देने में योगी सरकार 2017 से ही जुटी है। बलिदानियों की धरा की ऐतिहासिकता को पहचान देकर नई पीढी के लिए प्रेरणास्रोत बनाने का अभियान स्मारकों के सौंदर्यीकरण-सुदृढीकरण के लिए इस सरकार के कार्यकाल में पहले साल से ही जारी है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ से देश की आजादी का अमृत महोत्सव मनाया जा रहा है तो इसके साथ योगी सरकार चौरीचौरा शताब्दी महोत्सव भी मना रही है। आजादी के अमर सेनानियों की मान प्रतिष्ठा में पूरे देश में एक अनूठी पहल भी इसी सरकार ने की है। गोरखपुर में मंगलवार से प्रारंभ पांच दिवसीय आजादी का रंगोत्सव इसी की कड़ी है। इस रंगोत्सव में देशप्रेम और राष्ट्रधर्म से ओतप्रोत विभिन्न मंचीय प्रस्तुतियों के अलावा एक खासियत और भी है।

आयोजन स्थल पर योगी सरकार की पहल पर प्रदेश के सभी 75 जिलों से क्रांतिकारियों, देश की रक्षा में सर्वोच्च बलिदान करने वाले जांबांजों की जन्मभूमि से माटी भी मंगाई गई है। कलश में रखी शहीदी स्थलों की माटी के प्रति लोगों की श्रद्धा देखते ही बन रही है। इन कलशों में उन सेनानियों की धरा की माटी को भी समाहित किया गया है जिन्हें इतिहास की किताबों में यथोचित सम्मान नहीं मिल सका था।

मिट्टी भरे कलश पर इस बात का भी उल्लेख किया गया है कि यह पावन माटी किस अमर क्रांतिकारी/जांबांज की है, किस गांव की है। यहां कलश का दर्शन और पुष्पार्चन कर नमन करने वाले लोगों का कहना है कि तमाम गुमनाम बलिदानियों को वह नहीं जानते थे।

सरकार के इस प्रयास से उन्हें अपूर्ण से रहे आजादी के इतिहास को सही से समझने का भी मौका मिल रहा है। यहां रखे कलशों में से एक कलश हाल में ड्यूटी के दौरान हेलीकॉप्टर क्रैश में दिवंगत हुए देवरिया के रुद्रपुर निवासी वायुसेना के जांबांज ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह के गांव की माटी का भी है।

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