Saturday, June 15, 2024
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हस्तिनापुर के उत्खनन में 100 साल तक कपड़ों के व्यापार की भी गाथा

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  • उत्खनन में अब तक टीम को शुंगकाल मध्यकाल और मौर्र्य काल के साथ गुप्त काल के मिले अवशेष
  • अवशेषों के आधार पर खंडित मूर्ति, सुर्खी चूने से बनी लंबी दीवार, बुलंद इमारत की करती है दास्तां बयां

जनवाणी संवाददाता |

हस्तिनापुर: किदवंती के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण की कर्मभूमि हस्तिनापुर में पुरातत्व विभाग की ओर से महाभारत कालीन तार्थ नगरी में ऐतिहासिक साक्ष्यों की खोज के लिए उल्टा खेड़ा टीले पर उत्खनन किया जा रहा है। लगभग एक माह से चले आ रहे उत्खनन के कार्य में पुरातत्व विभाग की टीम को अवशेषों के आधार पर खंडित मूर्ति सुर्खी चूने से बनी लंबी दीवार बुलंद इमारत की दास्तां बयां करती है।

टीले से उत्खनन के दौरान आई रेत परतें गंगा नदी में बार-बार आई बाढ़ और हस्तिनापुर के विनाशा की गाथा बता रही है तो उत्खनन में इस सप्ताह टीम के सदस्यों को कई ऐसे भी प्रमाण मिले जो हस्तिनापुर में शुंग, कुशान, मौर्र्य काल के साथ गुप्त काल के मध्य कई 100 सालों तक कपड़े के व्यापार की कहानी बयां कर रहे हैं। उत्खनन के दौरान हस्तिनापुर के बर्बाद होने और विकास की गाथा तो मिली, लेकिन अभी तक महाभारत काल से जुड़ा कोई प्रमाण नहीं मिला।

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प्राचीन भारतीय इतिहास संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग के आर्थिक सहयोग से उल्टा खेड़ा टीले का उत्खनन एवं शोध कार्य चल रहा है। उत्खनन कर रही टीम के सदस्यों का कहना है कि लगभग पांच मीटर हुए उत्खनन में अब तक टीम को शुंगकाल मध्यकाल, मौर्र्य काल के साथ गुप्त काल के अवशेष मिले। इनमें से तीन खातों में प्राकृतिक मिट्टी का जमाव तक उत्खनन हुआ। सेक्शन डीपिंग के दौरान टीले के पश्चिमी तथा दक्षिणी हिस्से में शुंग, कुषान कालीन पक्की र्इंटों के आठ तरह के संरचनात्मक अवशेष पाए गए हैं।

लंबे समय तक हस्तिनापुर में रहा बुनकर उद्योग

अवशेषों के अवलोकन व शोध से यह ज्ञात होता है कि टीले का व्यापक विस्तार था। यह स्थल समृद्ध रहा होगा। ताम्र पाषाण काल की संभावना रही होगी। स्थल के क्षैतिज उत्खनन से इसके विभिन्न आयामों तथा सांस्कृतिक सन्नीवेष का पता चलेगा। यहां से उत्खनन में उत्तरी कालीन चमकीली मृद-भांड तथा इसके पूर्व के सांस्कृतिक अवशेष मिले हैं। गंगा में समय सयम पर आई बाढ़ के कारण हस्तिनापुर का कई बार विनाश हुआ। जिसके प्रमाण आज भी उल्टा खेड़ा टीले में दफन है, लेकिन टीम के सदस्यों को उत्खनन के दौरान हस्तिनापुर में बुनकर उद्योग के कई 100 सालों तक रहने के प्रमाण मिले हैं। एएसआई के अधिकारियों को उम्मीद है कि इस बार खुदाई से हस्तिनापुर में हजारों वर्ष पुराने महाभारत सहित कई कालों के राज पर से पर्दा उठेगा।

उत्खनन में मिले 2300 साल पुराने मृद-भांड

यहां से प्राप्त पुरातत्व अवशेषों में लौह अयस्क किल, हसिया, ताम्र सलाका, टेराकोटा की मूर्तिया, शतरंज की मोहरें, मंकी, चूड़िया, लैम्पी, कौड़ी, बर्तनों में इंकपाट, कटोरा, थाली, गिलास, कटोरी, घड़ा, खाना बनाने का बर्तन 2300 साल पुराने हरे रंग के चमकीली मृद-भांड की डिलक्स वैराइटी, मौर्र्य कालीन सिक्का समेत अन्य अवशेष मिले हैं।

रोचक है उत्खनन में र्इंटों की लंबाई-चौड़ाई

लगभग पांच मीटर पर पहुंचे उत्खनन में रोचक तत्थों के साथ दीवारों में प्रयोग होने वाली र्इंटों की लंबाई-चौड़ाई भी रोचक है। जहां र्इंट की लंबाई लगभग तीन फीट और चौड़ाई दो फीट है। वहीं, र्इंट की मोटाई भी आधा फीट है। जानकारों की माने तो ऐसी र्इंटों का प्रयोग शुंग काल से लेकर मौर्य काल तक होता रहा।

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