Monday, June 17, 2024
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आंसुओं का समुंदर लेकर घर लौटी किशोरी

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  • डफरिन अस्पताल से दुष्कर्म पीड़िता किशोरी को किया डिस्चार्ज

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: सरधना थाना क्षेत्र के एक गांव में कई माह तक दुष्कर्म का शिकार हुई 13 वर्षीय किशोरी को मंगलवार को जिला महिला चिकित्सालय से डिस्चार्ज कर दिया गया। इस दौरान उसकी आंखों से आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे। वह अपनी मां से लिपटकर रो पड़ी। वह अपने साथ जहां पुलिस की निर्दयता की यादें लेकर घर लौटी। वहीं, स्वास्थ्य विभााग के चिकित्साधिकारी से लेकर निचले स्टाफ तक की क्रूरता की कहानी अपने दिल में बसा कर ले गई।

सरधना के एक गांव में एक अनुसूचित जाति की 13 वर्षीय किशोरी को करीब छह माह पूर्व उसके पड़ोसी दो बच्चों के पिता ने अपनी हवस का शिकार बनाया। उसने दुष्कर्म की वीडियो बनाई और उसे सोशल मीडिया पर वायरल करने की धमकी देकर कई माह तक उसके साथ दुष्कर्म करता रहा। पिछले सप्ताह जब उसकी हालत बिगड़ी तो परिजनों ने उसका अल्ट्रासाउंड कराया, जिसमें किशोरी के पेट में छह माह का गर्भ होने की पुष्टि हुई। परिजनों ने इसकी शिकायत थाना सरधना पर की, लेकिन पुलिस ने आरोपी न तो पकड़ा और न ही उसके खिलाफ कोई कार्रवाई की।

मामला मीडिया के समक्ष आने पर प्रशासन में भी हड़कंप मच गया। आनन-फानन में डीएम दीपक मीणा ने मामले की जांच कमेटी गठित की। टीम में एडीएम वित्त सूर्यकांत त्रिपाठी को अध्यक्ष, एसीएमओ डा. प्रवीण कुमार व एसीएम चतुर्थ रश्मि बरनवाल को शामिल किया गया। टीम ने सीएचसी पहुंचकर मामले की जांच की। अस्पताल की सीसीटीवी कैमरों की फुटेज को खंगाला।

जांच में जहां पीड़ित पक्ष के बयान लिए गए। वहीं, डा. सरिता तोमर, चीफ फार्मासिस्ट वासुदेव नौटियाल, स्टाफ नर्स डॉली, वार्ड आया से जवाब तलब किया गया। जांच में डा. सरिता तोमर व नर्स डॉली को दोषी मानते हुए। डीएम को रिपोर्ट सौंप दी गई। डीएम के आदेश पर दोनों को उक्त अस्पताल से कार्यमुक्त कर दिया गया और दोनों के खिलाफ निलंबन की संस्तुति कर शासन को रिपोर्ट भेज दी गई।

मां कैसे रहूंगी गांव में, फफक कर रो पड़ी किशोरी ?

जिला महिला अस्पताल से दोपहर को जब परिजनों ने दुष्कर्म पीड़ित किशोरी से घर चलने को कहा तो वह अपनी मां से लिपटकर रो पड़ी। वह रोते हुई बोली कि मां कैसे गांव में रहूंगी मैं? मां ने दिलासा दिलाया कि दुष्कर्म का आरोपी सुभाष जेल चला गया है। किशोरी बोली वह जल्दी जेल से छूटकर आ जाएगा, तो मुझे बदनाम करेगा, पुलिस फिर मुझे थाने के चक्कर लगवाएगी। मां की आंखें भी आंसुओं से भर गर्इं। उसने बेटी को दिलासा दिलाया। भाई ने दिलासा दिलाया कि मैं मुकदमे की पैरवी करूंगा और उसे सजा दिलाऊंगा। इसपर वह बेड से नीचे उतरी।

कैलाश सत्यार्थी फाउंडेशन की टीम मिलने पहुंची

सरधना: थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी 13 वर्षीय दलित किशोरी को गांव के ही व्यक्ति ने अपनी हवश का शिकार बनाया। जिससे किशोरी गर्भवती हो गई थी। चार दिन पूर्व परिजन किशोरी को प्रसव के लिए सरधना सीएचसी लेकर पहुंचे थे। मगर स्टाफ ने उसे अस्पताल में भर्ती नहीं किया था। जिससे किशोरी की खुले में बैंच पर ही प्रसव हो गया था। मामले को लेकर डीएम दीपक मीणा ने जांच बैठा थी। जांच में दोषी पाए गए चिकित्सक सरित तोमर व नर्स डोली पर कार्रवाई करते हुए उन्हें अस्पताल से हटा दिया गया है। वहीं उपचार मिलने के बाद किशोरी की हालत में सुधार आया है। तबियत बेहतर होने के बाद किशोरी अपने घर पहुंच गई है।

मंगलवार को कैलाश सत्यार्थी फाउंडेशन की टीम में शामिल पुष्पेंद्र कुमार व जनहित फाउंडेशन से अजय कुमार किशोरी से मिलने अस्पताल पहुंचे। तबीयत में सुधार होने पर उन्होंने किशोरी को डिस्चार्ज कराकर घर पहुंचाया। जहां उन्होंने किशोरी से बात करके बयान दर्ज किए। साथ ही हर संभव मदद कराने का आश्वासन दिया। कहा कि मामले को लेकर उच्चाधिकारियों से मिला जाएगा। ताकि सख्त कार्रवाई हो। उन्होंने सरकार से पीड़ित परिवार की मदद दिलाने का भी आश्वासन दिया है। उधर, आरोपी और शिशु के डीएनए सैंपल की जांच रिपोर्ट आने का भी इंतजार किया जा रहा है।

गाली-गलौज का आरोप

कैलाश सत्यार्थी फाउंडेशन की टीम ने किशोरी और परिजनों से बात की। उन्होंने टीम को बताया कि आरोपी उनको लगातार धमकी दे रहे हैं। मंगलवार को भी आरोपी पक्ष के युवक ने उनके साथ गाली-गलौज की। जिस पर टीम ने पुलिस अधिकारी से मिलकर कार्रवाई कराने का आश्वासन दिया।

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