- लोकसभा चुनाव निपटने के बाद खुल रही हैं घोटालों की परतें
- अंगूठा टेक को बना दिया गया लोकसभा चुनाव का वोट प्रभारी
- सपा सुप्रीमो को पुराने सपाइयों ने भेजा शिकायत का पुलिंदा
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: दूसरे चरण का चुनाव शांतिपूर्ण निपटने के बाद अब घोटालों की परत-दर-परत खुल रही है। थाने के एक वांटेड को लोकसभा चुनाव में प्रभारी बना दिया गया। कई जगह तो अंगूठा टेक को चुनाव में वोट प्रभारी के पद की जिम्मेदारी दे दी गई। पुराने सपाइयों ने सपा सुप्रीमो का सबूतों के साथ शिकायतों का पुलिंदा भेजा है। मेरठ-हापुड़ लोकसभा चुनाव को लेकर इस बार जितनी छीछालेदार समाजवादी पार्टी में हुई है, उतनी आज से पहले कभी भी किसी चुनाव में नहीं रही। पहले टिकट को लेकर यहां दर्जन भर दावेदार सामने आ गये।
कई बार टिकट बदले और फाइनली सुनीता वर्मा टिकट पाकर चुनाव लड़ने में कामयाब रहीं। ऐसा मना जा रहा है कि सुनीता वर्मा को टिकट देने के पीछे मेरठ लोकसभा के जातिगत आंकड़ों को प्रमुखता दी गई। क्योंकि यहां दलित और मुस्लिम एकतरफा वोट करते हैं, तो उस प्रत्याशी के लिए जीत की राह आसान हो जाती है। अखिलेश यादव मेरठ की सीट पर बराबर निगाह रखे हुए थे। इसके लिए उन्होंने एमएलसी राकेश यादव को चुनाव प्रभारी बनाकर मेरठ भेजा। इसके बाद भी हर विधान सभा को मजबूत करने के लिए अखिलेश यादव ने निर्देश दिये। जिस पर मेरठ शहर, मेरठ कैंट, मेरठ दक्षिण, किठौर व सरधना विधान सभा में प्रभारी बनाये गये।

यहां बड़ा खेल यह किया गया कि एक विधान सभा में थाने के एक ऐसे वांटेड को जिम्मेदारी दे दी गयी, जिसके खिलाफ जिले भर के थानों में जमीन कब्जाने, चोरी और डकैती के दर्जनों मुकदमे चल रहे हैं। एक विधान सभा में ऐसे नेता को प्रभारी बना दिया गया, जो खुद अंगूठा टेक है तथा अपना नाम भी नहीं लिख सकता है। इतना ही नहीं, सबसे बड़ा खेल एक ऐसा विधान सभा अध्यक्ष को लेकर खेला गया जिसपर पहले ही संगठन के दो-दो पदों का कार्यभार है, लेकिन मलाई खिलाने के लिए इस नेता को भी विधान सभा का प्रभारी बना दिया गया। सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने चुनाव से एक सप्ताह पूर्व इन सभी पांचो विधान सभा प्रभारियों को नई दिल्ली पार्टी कार्यालय बुलाया था। यहां उन्होंने जरूरी दिशा निर्देश दिये।
विधायक ने सपा कार्यालय पर किया हंगामा
एक विधानसभा में ऐेसे नेता को अध्यक्ष की जिम्मेदारी दे दी गई, जिसमें वहां के विधायक से न तो मश्वरा लिया गया और न ही उनको विश्वास में लिया गया। जब इन विधायक को इस खेल का पता चला तो चुनाव से दो दिन पहले पार्टी के जेल चुंगी स्थित कार्यालय पर चार घंटे तक इन विधायक ने काफी हंगामा किया। अब चुनाव निपट चुका है, और पुराने सपाइयों ने शिकायतों का मय सबूतों के साथ पुलिंदा सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव के पास भेजा है। उधर, सपा जिलाध्यक्ष विपिन चौधरी का कहना है कि पांचों विधान सभा अध्यक्षों का चयन निष्पक्षता से किया गया है। उन्होंने दावा किया कि सभी विधान सभा अध्यक्षों ने मेहनत से सपा गठबंधन प्रत्याशी के लिए मतदान कराया है।

