Sunday, March 8, 2026
- Advertisement -

मृत्यु का विचार

Amritvani 19


एक पेड़ पर दो बाज प्रेम-पूर्वक रहते थे। दोनों शिकार की तलाश में निकलते और जो भी पकड़कर लाते उसे शाम को मिल बाँटकर खाते। बहुत दिन से उनका यही क्रम चल रहा था। एक दिन दोनों शिकार पकड़कर लौटे तो एक की चोंच में चूहा था और दूसरे की में सांप। शिकार दोनों ही तब तक जीवित थे।

पेड़ पर बैठकर बाजों ने जब उनकी पकड़ ढीली की सांप ने चूहे को देखा और चूहे ने सांप को। सांप चूहे का स्वादिष्ट भोजन पाने के लिए जीभ लपलपाने लगा और चूहा सांप के प्रयत्नों को देखकर अपने पकड़ने वाले बाज के डैनों में छिपने का उपक्रम करने लगा। उस दृश्य को देखकर एक बाज गंभीर हो गया और विचार मग्न दीखने लगा।

दूसरे ने उससे पूछा-दोस्त, दार्शनिकों की तरह किस चिंतन मनन में डूब गए? पहले बाज ने अपने पकड़े हुए सांप की ओर संकेत करते हुए कहा देखते नहीं यह कैसा मूर्ख प्राणी है। जीभ की लिप्सा के आगे इसे मौत भी एक प्रकार से विस्मरण हो रही है।

दूसरे बाज ने अपने चूहे की आलोचना करते हुए कहा- और इस नासमझ को भी देखो भय इसे प्रत्यक्ष मौत से भी डरावना लगता है। पेड़ के नीचे एक मुसाफिर सुस्ता रहा था। उसने दोनों की बात सुनी और एक लम्बी सांस छोड़ते हुए बोला-हम मानव प्राणी भी सांप और चूहे की तरह स्वाद और भय को बड़ा समझते हैं, मृत्यु तो हमें भी विस्मरण रहती है।


janwani address 9

spot_imgspot_img

Subscribe

Related articles

भ्रष्ट सिस्टम के खिलाफ आवाज है ‘सूबेदार’

अस्सी-नब्बे के दशक में बॉलीवुड में अन्याय और भ्रष्ट...

यूं ही नहीं हैं शाहरुख खान ‘किंग’

रजनीकांत स्टारर फिल्म 'जेलर' (2023) को बहुत पसंद किया...

बिहार, बिहार ही रहेगा रेल तो संभालो

जब रेल पटरी से उतरने लगे तो चिंता होना...

जंगल सिर्फ पेड़ नहीं एक जीवित तंत्र है

वृक्षारोपण और प्राकृतिक वन के बीच पारिस्थितिक अंतर को...

अपने-अपने ‘एपस्टीन

इस साल की शुरुआत में उछली ‘ज्येफ्री एपस्टीन फाइल्स’...
spot_imgspot_img