जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: स्पेसएक्स के महत्वाकांक्षी स्टारशिप मिशन को लेकर एलन मस्क ने एक बार फिर समयसीमा आगे बढ़ा दी है। कंपनी अब स्टारशिप के ऊपरी हिस्से यानी ‘Ship’ को लॉन्च टावर के रोबोटिक आर्म्स से पकड़ने की पहली कोशिश अगली टेस्ट फ्लाइट में नहीं, बल्कि कुछ महीने बाद करने की तैयारी में है। मस्क ने 20 अगस्त को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इसकी जानकारी दी।
कुछ ही हफ्ते पहले मस्क ने कहा था कि स्टारशिप की 14वीं टेस्ट फ्लाइट में ही इसे टावर से पकड़ने का प्रयास किया जा सकता है। उस समय फ्लाइट 14 को अगस्त के अंत तक लॉन्च करने की योजना बताई गई थी। अब टावर कैचिंग का प्रयास कुछ महीने आगे खिसक गया है।
फ्लाइट 14 में नहीं होगी स्टारशिप की टावर कैचिंग
स्पेसएक्स की 14वीं स्टारशिप टेस्ट फ्लाइट को लेकर तैयारियां जारी हैं। हालिया परीक्षणों में स्टारशिप के इंजन की टेस्ट फायरिंग भी की गई है और मिशन को पहली बार पूर्ण ऑर्बिटल उड़ान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हालांकि, अब इस उड़ान में ऊपरी चरण को लॉन्च टावर के जरिए पकड़ने की योजना नहीं दिख रही है।
मस्क ने कहा कि अगर जुलाई की पिछली उड़ान के दौरान समुद्र में जिस जगह स्टारशिप उतरा था, वहां कैचिंग टावर मौजूद होता तो उसे पकड़ा जा सकता था। जुलाई की फ्लाइट 13 में स्टारशिप ने दोबारा वायुमंडल में प्रवेश करने के बाद समुद्र में अपेक्षाकृत सुरक्षित तरीके से लैंड किया था और वाहन काफी हद तक सुरक्षित रहा।
पहली बार स्टारशिप को टावर से पकड़ने की तैयारी
स्पेसएक्स का लक्ष्य स्टारशिप को पूरी तरह रियूजेबल बनाना है। इसके लिए कंपनी चाहती है कि अंतरिक्ष से लौटने के बाद स्टारशिप समुद्र में गिरने के बजाय सीधे लॉन्च साइट पर वापस आए और टावर पर लगे विशाल रोबोटिक आर्म्स उसे हवा में पकड़ लें।
कंपनी पहले ही स्टारशिप के बूस्टर Super Heavy को टावर के मैकेनिकल आर्म्स से सफलतापूर्वक पकड़ चुकी है। लेकिन ऊपरी चरण यानी Ship को पकड़ना कहीं ज्यादा चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि यह अंतरिक्ष से बहुत अधिक गति से वापस लौटता है।
साल के अंत या 2027 की शुरुआत में हो सकती है पहली री-फ्लाइट
मस्क के मुताबिक स्टारशिप की पहली री-फ्लाइट इस साल के अंत या 2027 की शुरुआत में हो सकती है। यह स्पेसएक्स के लिए बड़ा मील का पत्थर होगा, क्योंकि किसी स्टारशिप को अंतरिक्ष में भेजने के बाद दोबारा उड़ाना उसकी पूर्ण पुन:उपयोगिता की दिशा में निर्णायक उपलब्धि होगी।
नासा के चंद्र मिशनों के लिए भी अहम है स्टारशिप
स्टारशिप की सफलता सिर्फ स्पेसएक्स के लिए ही नहीं, बल्कि नासा के आर्टेमिस कार्यक्रम के लिए भी महत्वपूर्ण है। नासा भविष्य के चंद्र अभियानों में स्पेसएक्स के स्टारशिप सिस्टम को मून लैंडर के रूप में इस्तेमाल करने की योजना पर काम कर रहा है।
इसके लिए बड़ी संख्या में लॉन्च और अंतरिक्ष में ईंधन भरने की क्षमता बेहद महत्वपूर्ण होगी। ऐसे में स्टारशिप को तेजी से लॉन्च, वापस लाने और दोबारा उड़ाने की क्षमता विकसित करना मिशनों की लागत और लॉन्च क्षमता दोनों के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
क्या हर दिन लॉन्च होगा Starship?
एलन मस्क स्टारशिप के लॉन्च की रफ्तार को भविष्य में बेहद ऊंचे स्तर तक ले जाने की योजना रखते हैं। उनका लक्ष्य ऐसी व्यवस्था तैयार करना है जिसमें स्टारशिप को बहुत कम अंतराल पर बार-बार लॉन्च किया जा सके। इसके लिए रॉकेट का तेजी से रिकवर होकर दोबारा उड़ान भरना जरूरी होगा।
यही वजह है कि स्टारशिप को टावर से पकड़ने की तकनीक को स्पेसएक्स के सबसे अहम प्रयोगों में से एक माना जा रहा है। अगर यह तकनीक सफल होती है तो रॉकेट को समुद्र से निकालने और लंबे समय तक दोबारा इस्तेमाल के लिए तैयार करने की जरूरत काफी कम हो सकती है। इससे भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों की लागत और लॉन्च के बीच का समय दोनों घटाने में मदद मिल सकती है।

