नमस्कार, दैनिक जनवाणी डॉटकॉम वेबसाइट पर आपका हार्दिक स्वागत और अभिनंदन है। भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को पिठोरी अमावस्या कहा जाता है। इसका हिंदू धर्म में विशेष धार्मिक और पौराणिक महत्व है। भारत के कई क्षेत्रों में इसे कुशोत्पाटिनी अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन भक्तजन पवित्र नदियों में स्नान करते हैं और पितरों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करते हैं। मान्यता है कि पिठोरी अमावस्या पर किए गए श्राद्ध से पितर प्रसन्न होते हैं और आशीर्वाद स्वरूप परिवार को सुख-समृद्धि, शांति और संतति की वृद्धि का वरदान देते हैं।
पिठोरी अमावस्या पर स्नान और दान का भी विशेष महत्व है। कहा जाता है कि इस दिन किए गए पुण्य कर्म मनोकामनाओं की पूर्ति के साथ पापों का नाश करते हैं। वर्ष 2025 में यह पावन अवसर 23 अगस्त को पड़ रहा है, और श्रद्धालु इस दिन शुभ मुहूर्त में विधि-विधान के साथ पूजा, तर्पण और दान करने की तैयारी में जुटेंगे।
तिथि
वैदिक पंचांग के मुताबिक, भाद्रपद मास की अमावस्या तिथि वर्ष 2025 में 22 अगस्त को दोपहर 11 बजकर 57 मिनट से शुरू होगी और अगले दिन 23 अगस्त को सुबह 11 बजकर 37 मिनट पर समाप्त होगी। इसलिए पिठोरी अमावस्या का पर्व 23 अगस्त को ही मनाया जाएगा।
पिठोरी अमावस्या पर करें ये उपाय
पिठोरी अमावस्या के दिन गंगा स्नान को अत्यंत शुभ माना जाता है। यदि गंगा तट पर जाना संभव न हो, तो स्नान के जल में थोड़ा गंगाजल मिलाकर घर पर ही स्नान करें। स्नान के बाद पुरुष सफेद वस्त्र धारण करें और पितरों के लिए तर्पण व श्राद्ध करें। साथ ही, उनके नाम पर ब्राह्मणों को भोजन कराएं। इस दिन भगवान शिव की विधिवत पूजा करने का भी विशेष महत्व है।
महत्व
पौराणिक कथाओं के अनुसार, पिठोरी अमावस्या का महत्व बेहद गहरा है। कहा जाता है कि इस दिन माता पार्वती ने भगवान इंद्र की पत्नी को इस व्रत और कथा का महत्व बताया था। धार्मिक मान्यताओं में यह दिन विशेष रूप से संतान सुख की प्राप्ति और परिवार की समृद्धि के लिए शुभ माना जाता है। मान्यता है कि पिठोरी अमावस्या का व्रत करने से बुद्धिमान, बलवान और सद्गुणी संतान की प्राप्ति होती है।
इस दिन पितरों की आत्मा की शांति के लिए विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। जरूरतमंदों को भोजन कराना, वस्त्र, अन्न या धन का दान करना पितरों के आशीर्वाद को प्राप्त करने का माध्यम माना जाता है। साथ ही, इस दिन किसी पेड़ के नीचे दीपक जलाकर उसकी सात या ग्यारह बार परिक्रमा करने से जीवन में शांति, सौभाग्य और नकारात्मकता से मुक्ति मिलती है। इस प्रकार, पिठोरी अमावस्या न केवल पितरों की तृप्ति के लिए बल्कि अपने जीवन को सुख-समृद्धि से भरने के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।

