Tuesday, September 21, 2021
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उलूक मानव के अस्तित्व का विश्वास

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एपी भारती |

इस धरती पर अरबों जीवों की उपस्थिति है। इनमें बहुतेरे ऐसे हैं जो मानवों की तरह के हैं। जिस तरह यह माना जाता है कि अत्यंत बफीर्ले स्थानों में हिम मानव हैं, वहीं उसी तरह दूसरों ग्रहों पर भी विचित्र मानवों का अस्तित्व स्वीकारा जाता है। अनेक लोग संसार में हैं जो उड़नतश्तरियों की मार्फत आने वाले दूसरे ग्रह के प्राणियों अथवा हिम मानवों को देखने का दावा करते हैं। ऐसे ही एक स्थान पर विचित्र उलूक मानवों को देखने वाले भी हैं।

उलूक मानव ब्रिटेन में एक स्थान पर एक नहीं, कई लोगों ने देखे। इंग्लैंड में दक्षिणी समुद्र तट की ओर एक गिरजाघर है। मणनान नामक यह चर्च एक प्रागैतिहासिक खंडहर के प्रांगण में स्थित है। आसपास के क्षेत्र के बारे में लोगों में तमाम तरह के विचार भ्रांतियां विद्यमान हैं। यहां तमाम विचित्रताओं के बारे में कहा सुना जाता है। यूं तो सदियों से इंग्लैंड के दक्षिण समुद्र तटीय क्षेत्र (जिसके मध्य मावनान चर्च भी है) कार्नवाल में सदियों से यह कहा सुना जाता था कि वहां उलूक मानव रहते थे लेकिन इसकी पुष्टि में कोई लिखित प्रमाण 1976 से पहले का नहीं है। 1976 में दो बच्चों ने यहां उलूक मानव देखे।

हुआ यह कि 12 वर्ष का जून मेलिंग और 9 वर्ष की उसकी बहन विक्री 17 अप्रैल 1976 की शाम गिरजाघर के पास टहल रहे थे। विकी को आसमान में गिरजे के ऊपर एक विचित्र पक्षी मंडराता दिखा जो उल्लू जैसा था लेकिन विशालकाय था। उल्लू साधारणत: इतने बड़े नहीं होते। उसने घबराते हुए अपने भाई को ऊपर देखने को कहा और पूछा, भाई, वह क्या है?

मेलिंग भी उसे देखता रह गया। वह भी जल्दी में यह नहीं सोच पाया कि आखिर वह है क्या। जब उसका दिमाग ठीक से सोचने लगा तो उसे याद आया कि यह आकृति तो वैसी है जैसे बड़े-बूढ़े उलूक मानव की बताते हैं। उसने बताया कि बहन, यह वही उलूक मानव लगता है जिसके बारे में लोग कहते हैं कि कभी उलूक मानवों का बसेरा यहां कार्नवाल के इलाके में था।

वे तुरंत अपने घरों को लौटे और घर-अड़ोस-पड़ोस के लोगों को बताया। जिसने सुना, उन्हें आश्चर्य से देखा। अनेक लोग उधर देखने गये लेकिन अन्य किसी को नहीं दिखा वह विचित्र जीव लेकिन कुछ लोगों का विश्वास और पक्का हो गया। अगले तीन महीने तक बात आयी गयी हो गयी और इस घटना को लगभग लोग भूल से गये लेकिन तीन माह बाद फिर उस क्षेत्र में उलूक मानव की मौजूदगी पायी गयी। सैली चैपमैन और बारबरा पैरी ने उसे चर्च की ओर एक चीड़ के पेड़ के पास धरती पर खड़े देखा।

सैली ने उलूक मानव का जो विवरण दिया, वह इस प्रकार था-वह विशालकाय उल्लू जैसा था। आदमी के जैसा आकार, कान नुकीले, टांगें लंबी, उल्लू जैसे पांव के पंजे, पंख बड़े-बड़े, कान नुकीले, लाल आंखें, मुंह-चेहरा उल्लू जैसा था। पहले तो उसे देखकर मैं हंस पड़ी क्योंकि मुझे लगा कि कोई आदमी विचित्र वेशभूषा पहनकर मजाक कर रहा है। उसने हमारी ओर देखा और कुछ ही सेकेंडों में वह पेड़ों के झुंड की ओर उड़ गया। तब मैं डर गयी और मेरी चीख निकल गयी।

बारबरा ने उस विचित्र जीव के बारे में कुछ इस तरह बताया, हम दोनों ने उसे देखा था। वह बड़ा भयानक और बहुत बड़ा उल्लू जैसा जीव था। आंखें और कान बड़े, विशाल पंख, पूरे चेहरे पर बाल, त्वचा भूरी, अंगारे सी लाल आंखें कुल मिलाकर हाड़ कंपा देने वाला डरावना था वह।

जेन ग्रीनवुड और उसकी बहन ने भी उलूक मानव उसी क्षेत्र में देखा। जेन ने लोगों और समाचार पत्रों को बताया, हमने रविवार के दिन मावनान गिरजाघर के निकट पेड़ों के बीच एक विचित्र चीज को खड़ा पाया। चिड़ियों जैसे उसके बड़े और मोटे उसके पांव थे। पंख, शरीर और पैर तीनों का रंग चमकीला भूरा था।उसके पैर के नाखून लंबे और काले थे। लाल-लाल घूरती आंखें हम उसे देखकर बुरी तरह डर गये लेकिन उसने हमें कुछ नहीं कहा। हमारे देखते ही देखते घने वृक्षों में कहीं उड़कर गायब हो गया।

इसके बाद कई बार स्थानीय लोगों ने उलूक मानव देखने के ब्यौरे दिए। यही नहीं, तीन फ्रांसीसी सैलानी लड़कियों ने मावनान चर्च के करीब उलूक मानव को देखे जाने का विवरण दिया। इन्होंने भी उलूक मानव का आकार-प्रकार लगभग वैसा ही बताया जैसा पूर्व के देखने वालों ने बताया था। दर्जनों लोगों ने उलूक मानव देखने का दावा किया लेकिन किसी के पास तब कैमरा नहीं था जब उलूक मानव के उन्हें दर्शन हुए इसलिए उसका चित्र कभी नहीं लिया जा सका और इसीलिए यह कभी प्रमाणित न हो सका कि वास्तव में उलूक मानव जैसी कोई चीज है या भ्रम है।

यद्यपि उन्हें ढूंढने की भी कोशिश काफी हुई पर किसी को उलूक मानव ढूंढे नहीं मिला। इसलिए ऐसे लोगों की कमी भी नहीं जो उलूक मानव को बकवास से ज्यादा कुछ नहीं मानते। कुछ लोग उलूक मानव के अस्तित्व पर भरोसा करते हैं तो कुछ लोग ऐसे भी हैं जो इसमें रूचि नहीं रखते। न यह कहते हैं कि उलूक मानव है, न यह कहते हैं कि नहीं है यद्यपि चित्रकारों ने काल्पनिक चित्र बनाए हैं और लेखकों ने उलूक मानवों पर लिखा है।


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