- सर्वे के सरकारी आदेश से हड़कंप, सर्वे के बाद सरकार करेगी इनकी समीक्षा
- पांच अक्टूबर तक पूरा करना होगा इन मदरसों के सर्वे का काम
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: उत्तर प्रदेश सरकार अब गैर मान्यता प्राप्त मदरसों पर भी शिकंजा कसने की तैयार कर रही है। इन मदरसों में पढ़ाए जाने वाले पाठ्यक्रम की जानकारी हासिल करने से लेकर अवैध मदरसों पर लगाम लगाने के उद्देश्य से होने वाली सर्वे की इस कार्रवाई से विभिन्न मदरसा संचालकों में हड़कम्प मचा हुआ है।
मदरसों के सर्वे को लेकर हालांकि अभी दारुल उलूम देवबंद की कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन शुक्रवार को जुमे की नमाज के दौरान विभिन्न मस्जिदों में सर्वे को लेकर कानाफूसी जरुर सुनाई दी। सरकारी सूत्रों के अनुसार इस समय कई ऐसे मदरसे हैं जो अनुदान के हकदार हैं, लेकिन वो फिर भी अनुदान से वंचित हैं। इस दौरान ऐसे मदरसों की भी लिस्ट तैयार की जाएगी।

इसके साथ साथ मदरसों को मॉर्डनाइज्ड करने का कंसेप्ट भी पाइपलाइन में है। हालांकि सरकार के इस आदेश से जहां कई मदरसों के संचालकों में हड़कम्प की स्थिति है वहीं इस पर राजनीति भी शुरू हो गई है। सत्ता पक्ष ने जहां मदरसों के सर्वे को जरूरी बताया है। वहीं, विपक्षी नेता इसे भाजपा की हिटलरशाही बता रहे हैं। सर्वे में मदरसों से संबंधित 25 जानकारियां मांगी जा रही है।
राजनीतिक उठापटक भी हुई तेज
इस पूरे मामले में अब खुलकर राजनीति भी शुरू हो गई है। केन्द्रीय मंत्री गिरीराज सिंह ने जहां इस मुद्दे पर सरकार की सकारात्मक सोच को उजागर किया है वहीं एआईएमआईएम के अध्यक्ष असद्दुीन ओवैसी ने इसे सरकार की हिटलरशाही बताया है। इस पूरे प्रकरण में अब पक्ष व विपक्ष में जमकर जुबानी जंग चल रही है।
हजारों मदरसे रजिस्टर्ड, अनुदान सिर्फ 560 को क्यों
मदरसा बोर्ड के सूत्रों के हवाले से पता चला है कि इस समय उत्तर प्रदेश में कुल 16 हजार 513 मदरसे मान्यता प्राप्त हैं और इनमें से सिर्फ 560 को ही सरकारी अनुदान मिल रहा है। जानकारोें का मानना है कि मान्यता के लिए सरकारी नियम सख्त हैं।
इसके लिए क्लास रुम के साइज तय हैं और एरिया भी डिफाइन होता है। इसके साथ साथ क्या क्या सुविधाएं होनी चाहिए यह भी पहले से ही तय होता है। प्रदेश में कई मदरसे ऐसे हैं जो कि दो दो कमरों में चलते हैं और इसी वजह से यह तय मानकों को पूरा नहीं कर पाते और मान्यता से वंचित रह जाते हैं।
सरकार की मंशा सवाल उठाना बेतुका तर्क: मंत्री
इस संबध में उत्तर प्रदेश में अल्पसंख्यक कल्याण मामलों के राज्य मंत्री दानिश अंसारी का कहना है कि सरकार की सोच सकारात्मक है। जो लोग सरकार की मंशा पर सवाल उठा रहे हैं वो इसलिए क्योंकि उनके पास कोई तर्क नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर कोई शैक्षिक संस्थान चल रहा है तो उसकी फंडिंग कहां से आ रही है,

उसके वित्तीय लेनदेन कैसे हैं और वहां क्या पढ़ाया जा रहा है। यह पूरा आंकड़ा सरकार के पास होना जरुरी है। इसके अलावा मंत्री का यह भी तर्क है कि सरकार यदि कोई योजना अथवा नीति बनाती है तो सर्वे के बाद उसके पास पर्याप्त आंकड़े मौजूद होंगे।
मुख्य धारा से जोड़ना लक्ष्य: चेयरमैन
यूपी मदरसा बोर्ड के चेयरमैन इफ्तिखार अहमद जावेद का कहना है कि सरकार सिर्फ इन बच्चों को सुविधाएं देकर मुख्य धारा से जोड़ना चाहती है। उन्होेंने कहा कि प्रधानमंत्री का एक सपना है कि धार्मिक शिक्षा हासिल कर रहे बच्चों के एक हाथ में यदि धार्मिक किताब है

तो दूसरे हाथ में कम्प्यूटर होना चाहिए। प्रदेश सरकार इसी तर्ज पर काम कर रही है। वो कहते हैं कि प्राईवेट मदरसे भी अगर मॉर्डन हो जाएं तो इसमें बुराई ही क्या है।

