Thursday, July 29, 2021
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आज जम्मू-कश्मीर में परिसीमन आयोग का दौरा

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राजनीतिक दलों के साथ होगी बैठक, महबूबा को छोड़ सभी दल होंगे शामिल

जनवाणी ब्यूरो |

नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव की सुगबुगाहट के बीच परिसीमन आयोग की टीम 4 दिन के दौरे पर मंगलवार को जम्मू पहुंच रही है। टीम के साथ मुख्य चुनाव आयुक्त सुशील चंद्रा भी मौजूद रहेंगे। आयोग 9 जुलाई तक यहां रहेगा।

परिसीमन आयोग 8 जुलाई को जम्मू में राजनीतिक पार्टियों के प्रतिनिधिमंडल से मिलेगा। वो परिसीमन को लेकर उनके सुझाव और आपत्तियां जानेगा। बैठक में पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) की नेता और पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती को छोड़कर लगभग सभी पार्टी के नेताओं ने शामिल होने की जानकारी दी है।

आपको बता दें कि पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती पहले ही घोषणा कर चुकी हैं कि वे तब तक कोई चुनाव नहीं लड़ेंगी जब तक कि जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा बहाल नहीं हो जाता। कुल मिलाकर वे आर्टिकल 370 को फिर से बहाल करने की मांग पर अड़ी हैं, जो संभव नहीं दिखता।

पीडीपी के नेता फिरदौस अहमद टाक ने कहा, ‘ बैठक में शामिल होने को लेकर हमने अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया है। हम अभी भी पार्टी नेताओं के बीच विचार-विमर्श कर रहे हैं।’

गुपकार अलायंस ने सहयोगी दलों को व्यक्तिगत निर्णय की छूट दी

पीपुल्स अलायंस फॉर गुपकार डिक्लेरेशन (PAGD) ने गठबंधन के सहयोगियों को इस मुद्दे पर व्यक्तिगत निर्णय लेने की सहमति दी है, क्योंकि रविवार शाम को हुई एक बैठक में अलग-अलग विचार होने के कारण अलायंस में आम सहमति नहीं बन सकी थी।

PAGD के प्रवक्ता और माकपा के वरिष्ठ नेता मोहम्मद यूसुफ तारिगामी ने कहा कि अलायंस ने परिसीमन आयोग से मिलने के लिए पार्टियों को व्यक्तिगत निर्णय लेने की सहमति दी है। तारिगामी ने कहा कि माकपा भी परिसीमन आयोग से मिल रही है। हम बैठक के बाद मीडिया के साथ अपनी बात साझा करेंगे।

बता दें कि गुपकार घाटी की 6 बड़ी राजनीतिक पार्टियों का गठबंधन है जिसमें नेशनल कांफ्रेंस (NC), पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP), माकपा, भाकपा, आवामी नेशनल कांफ्रेंस और जम्मू-कश्मीर पीपुल्स मूवमेंट शामिल है।

नेशनल कांफ्रेंस ने कहा- पारदर्शी हो पूरी प्रक्रिया

नेशनल कांफ्रेंस (NC) के वरिष्ठ नेता नासिर वानी ने कहा ‘पार्टी ने परिसीमन आयोग से मिलने का फैसला किया है। हमारा मानना है कि प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए। हम एक दस्तावेज तैयार कर रहे हैं जिसे हम आयोग के समक्ष पेश करेंगे और इसे मीडिया के साथ भी साझा करेंगे।’

इससे पहले 18 फरवरी को हुई परिसीमन आयोग की बैठक में नेशनल कांफ्रेंस के 3 सांसद डॉ. फारूक अब्दुल्ला, रिटायर्ड जस्टिस हसनियन मसूदी और मोहम्मद अकबर लोन बैठक से दूर रहे, जबकि भाजपा सांसद जितेंद्र सिंह और जुगल किशोर शर्मा ने भाग लिया। नेशनल कांफ्रेंस के नेताओं में आशंका थी कि आयोग जम्मू क्षेत्र में विधानसभा सीटों को बढ़ा सकता है और कश्मीर की अनदेखी कर सकता है।

जम्मू का प्रतिनिधित्व बढ़ाने के पक्ष में भाजपा

प्रदेश भाजपा विधानसभा में जम्मू के लिए अधिक प्रतिनिधित्व की मांग कर रही है। पार्टी के प्रदेश महासचिव अशोक कौल ने कहा कि “हम नहीं चाहते कि वही गलती हो जो अतीत में हुई थी। हम चाहते हैं कि सभी क्षेत्रों को जनसंख्या, क्षेत्र और कनेक्टिविटी के आधार पर विधानसभा क्षेत्रों में हिस्सा मिले।

कांग्रेस ने कहा-परिसीमन के लिए उचित समय दे आयोग

जम्मू-कश्मीर प्रदेश कांग्रेस कमेटी (JKPCC) ने भी घोषणा की कि वह परिसीमन आयोग के समक्ष अपना प्रतिनिधिमंडल भेजेगी। कांग्रेस ने एक बयान में कहा कि आयोग को परिसीमन के लिए आवश्यकताओं और मानदंडों की बेहतर समझ के लिए सभी दूर-दराज के क्षेत्रों को उचित समय दिया जाना चाहिए। जिसमें जनसंख्या, क्षेत्र, भूगोल और कनेक्टिविटी जैसे पैरामीटर शामिल हैं।

राजनीतिक लाभ के लिए न हो बंटवारे पर जोर

पीपुल्स कॉन्फ्रेंस, अल्ताफ बुखारी की अपनी पार्टी जैसे अन्य दलों ने भी बैठक में भाग लेने पर सहमति जताई है। बुखारी का कहना है कि ‘अपनी पार्टी ने पहले ही परिसीमन की पूरी कवायद पर अपना होमवर्क कर लिया है और सीमाओं के समायोजन और विधानसभा क्षेत्रों की सीमा के विवरण पर आयोग के समक्ष अपना पक्ष रखने का निर्णय लिया है। हमें लगता है कि राजनीतिक लाभ के लिए किसी क्षेत्र के बंटवारे पर जोर नहीं देना चाहिए।

24 जून को पीएम मोदी ने की थी घाटी के नेताओं के साथ बैठक

24 जून को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केंद्र शासित प्रदेश के 14 बड़े नेताओं के साथ दिल्ली में बैठक की थी। तब मोदी ने साफ तौर पर कहा था कि दिल्ली से दिल की दूरी कम करनी है। बैठक में शामिल कांग्रेस और नेशनल कांफ्रेंस समेत सभी दलों के नेताओं ने बातचीत को बेहतर बताया था। हालांकि, बैठक से बाहर आने के बाद पीडीपी की नेता महबूबा मुफ्ती ने आर्टिकल 370 फिर से बहाल करने की अपनी मांग पर अड़ी हुई दिखीं।

7 सीटें बढ़ाने को लेकर चल रही कवायद

जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 के अनुसार, जम्मू और कश्मीर विधानसभा में 7 सीटों की वृद्धि की जाएगी। परिसीमन के बाद जम्मू-कश्मीर में विधानसभा की सीटें 83 से बढ़कर 90 हो जाएंगी। लद्दाख की चार सीटों को शामिल नहीं किया जाएगा क्योंकि इसे अलग केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया है।

बता दें कि 5 अगस्त 2019 से पहले जम्मू और कश्मीर विधानसभा में 107 सीटें थीं, जिसमें कश्मीर की 46, जम्मू की 37 और लद्दाख की 4 सीटें शामिल थीं। इनमें से 24 पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (POK) के लिए आरक्षित थे। यानी अगस्त 2019 से पहले तक यहां 83 सीटों पर ही वोटिंग होती थी।

5 मार्च 2022 से पहले परिसीमन पूरा करने का लक्ष्य

सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय परिसीमन आयोग को फरवरी 2020 में नियुक्त किया गया था। आयोग को पिछले साल जम्मू और कश्मीर और चार पूर्वोत्तर राज्यों- असम, मणिपुर, अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड के चुनावी क्षेत्रों के परिसीमन का जिम्मा सौंपा गया था।

आयोग केंद्र सरकार को एक रिपोर्ट सौंपेगा जिसके बाद ही जम्मू और कश्मीर में चुनाव कराने का निर्णय लिया जाएगा। बताया जा रहा है कि 5 मार्च 2022 से पहले जम्मू-कश्मीर में परिसीमन का काम पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद राज्य में चुनाव होने के आसार हैं।

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