Wednesday, February 28, 2024
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धरोहरों के लिए ‘राजनीतिक मंच’ से उठेगी आवाज

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  • इतिहासकार से लेकर सामाजिक संगठन भी उठाएंगे बीड़ा

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: शहर की शाही विरासतों को सरकारी संरक्षण देने के लिए अब राजनीतिक मंच से आवाज उठेगी। इसके अलावा इतिहासकारों से लेकर सामाजिक संगठन भी इस संबध में सरकार का ध्यान आकर्षित कराएंगे। शहर में इस समय मकबरा अबु से लेकर शाहपीर साहब का मकबरा, खैरनगर गेट, नवाब खैरंदेश खां का मकबरा व अन्य कई स्थल ऐसे हैं जो कि शाही दौर की याद दिलाते हैं। इस संबंध में वार्ड-68 के पार्षद चौधरी शमशाद का कहना है कि शहर में एक से एक हसीन शाही इमारते हैं

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जिनके इर्द गिर्द या तो अतिक्रमण हो गया है या फिर पुरातत्व विभाग ने इनके संरक्षण से मुंह फेर लिया है। उन्होंने कहा कि अब इन इमारतों के संरक्षण के लिए सरकार से मांग की जाएगी। वहीं, दूसरी ओर इतिहासकार डॉ. अमित पाठक भी इससे सहमत हैं। उनका कहना है कि चूंकि लखनऊ और आगरा में एतिहासिक इमारतों को सरकारी संरक्षण मिला हुआ है जिसके चलते वो बोसीदा हालत से उभरकर काफी अच्छी हालत में हैं, लिहाजा मेरठ चूंकि क्रांतिकारी ज्वाला व जंग ए आजादी का शहर है इसलिए यहां पर्यटन के हिसाब से काफी काम किए जाने की जरूरत है।

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बकौल डॉ. अमित पाठक चूंकि देहरादून व मसूरी की ओर रुख करने वाले लोग मेरठ से होकर गुजरते हैं, इस लिहाज से भी मेरठ एक महत्वपूर्ण शहर है। उन्होंने कहा कि यदि मसूरी का रूख करने वाले टूरिस्ट को मेरठ में इन एतिहासिक इमारतों का दीदार करवाया जाए तो इससे मेरठ की महत्ता और बढ़ेगी तथा सरकार को इससे राजस्व भी मिलेगा। वहीं, दूसरी ओर पार्षद चौधरी शमशाद कहते हैं कि वो शीघ्र ही इस संबध में शासन प्रशासन को पत्र लिखकर इन ऐतिहासिक धरोहरों के इर्द गिर्द हुए अतिक्रमण को हटाने की मांग करेंगे।

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