Saturday, April 25, 2026
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वोल्गा बार आफत अपार, राहत के विकल्प सीमित

  • सब डिविजन आफ साइट, चेंज आफ परपज, सबलेट से बंद है राहत के रास्ते

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: छावनी इलाके के काठ का पुल के समीप बंगला नंबर-284 वोल्गा बार (वोल्गा बार के नाम से पहचाने जाने वाले) जिसकी लीज खत्म हुए अरसा बीत चुका है, उसके लिए आफत मुंह बाए खड़ी हैं और राहत के विकल्प बेहद सीमित रह गए हैं। डीईओ (रक्षा संपदा अधिकारी) ने कैंट बोर्ड के जिन ओल्ड ग्रांट बंगलों को नोटिस जारी किए हैं, उनमें 284 भी शामिल है। इसकी लीज विगत 31 जुलाई 2021 को खत्म हो चुकी है। जिसके चलते ही विगत दिनों डीईओ आॅफिस की टीम ने सील की कार्रवाई की। इस बंगले के परिसर में चल रहे दुबई स्टोर, लाइव किचन को सील कर दिया गया।

सील की कार्रवाई वोल्गा रेस्टोरेंट पर भी की जानी थी। वोल्गा का फ्र्रंट सील किया जाना था, लेकिन डीईओ आॅफिस का जो स्टॉफ गया था उन्होंने बजाए फं्रट का गेट सील करने के नाले वाले साइड जो रास्ता वीरबाला पथ की ओर जा रहा है, उसके सामने वाले रास्ते पर सील की कार्रवाई शुरू की। अभी कार्रवाई ही चल रही थी कि तभी हंगामा करने वाले आ धमके। डीईओ आॅफिस की फाइले में यह बंगला सरला देवी के नाम दर्ज है। इसकी लीज की अवधि 31 जुलाई 2021 को पूरी हो चुकी है। इसकी प्रॉपर्टी की यदि बात करें तो इसमें गार्डन शॉप, गोदाम और डवैलिंग हाउस का उल्लेख लीज की फाइल में है।

तमाम खामियों की भरमार

सरला देवी के नाम से जीएलआर में बंगले को लेकर जो कुछ दर्ज है। उसके इतर इसमें वो तमाम चीजें की गई। जिनके चलते इसकी लीज कानूनी रूप से नहीं बढ़ायी जा सकती है। सरला देवी का पिछले दिनों निधन हो चुका है। उनके निधन के बाद वारिसान की ओर से किसी ने अभी लीज के ट्रांसफर या बढ़ाने जाने को लेकर कोई आवेदन नहीं किया है। ऐसी जानकारी सूत्रों ने दी है। वैसे भी इसकी लीज की जहां तक बात है तो वह तो पहले ही 31 जुलाई 2021 को खत्म हो चुकी है। इसके इतर भी जानकारों का कहना है कि इस बंगले में जितना कुछ कर दिया गया है

उसके बाद वोल्गा बार के नाम से पहचाने जाने वाले इस बंगले को लेकर आफत अपार और राहत के विकल्प सीमित हो गए हैं। जानकारी रखने वालों का यहां तक कहना है कि कैंट एक्ट के जो नियम व प्रावधान हैं उनकी बात करें तो तमाम रास्ते बंद हो चुके हैं और यदि कोर्ट की मार्फत कानूनी लड़ाई की बात करें तो कोर्ट में भी डीईओ का पक्ष ही मजबूत है। इसके अलावा कोई अन्य विकल्प हो तो बात अलग है।

कहां है एजेंडा? तीन माह से बोर्ड बैठक का इंतजार

कैंट बोर्ड की पिछली बैठक अगस्त माह में हुई थी। कैंट एक्ट में स्पष्ट प्रावधान दिया गया है कि हर माह बोर्ड की बैठक की जानी चाहिए, लेकिन अगस्त के बाद अभी तक कैंट बोर्ड की बैठक का ना किया जाना इसके दो ही निहितार्थ निकाले जा सकते हैं पहला तो यह कि अभी उच्च पदस्थ को बोर्ड बैठक की फुर्सत नहीं मिल पा रही है या फिर दूसरा यह कि जिनकी जिम्मेदारी सीईओ के समक्ष बोर्ड बैठक का एजेंडा प्रस्तुत करने की है वो कुछ खास कारणों के चलते एजेंडे को फाइनल टच नहीं दे पा रहे हैं।

इसके अलावा यह भी माना जा रहा है कि कुछ ऐसे भी बिंदू हो सकते हैं जिनको बोर्ड की प्रस्तावित बैठक में शामिल किया जाना जरूरी है, लेकिन यदि उन बिंदुओं को शामिल कर कोई निर्णय लिया जाता है तो तकनीकि परेशानियां खड़ी हो सकती हैं। कारण भले ही कुछ भी हो, लेकिन पब्लिक को सरकार केवल अपनी समस्याओं के समाधान से है, लेकिन अफसरों तक समस्या पहुंचने के लिए भी मनोनीत सदस्य को बोर्ड बैठक की जरूरत पडेÞगी।

राहत! कैंट बोर्ड ने मेन मार्केट से हटवाए ठेले

छावनी परिषद के राजस्व विभाग के कर्मचारियों द्वारा पुलिस के सहयोग से लालकुर्ती मार्किट में सड़क पर लगने वाले सब्जी ठेलों को हटवा दिया गया। मुख्य अधिशासी अधिकारी जाकिर हुसैन के आदेश पर राजस्व अधीक्षक के संचालन में हुई उक्त कार्रवाई। विदित हो के पूर्व में तत्कालीन सीईओ डीएन यादव के कार्यकाल में सभी सब्जी विक्रेताओं को नैय्यर पैलेस के पीछे जगह आवंटित की गई थी।

जिससे सड़क पर ठेले न लगे, लेकिन धीरे-धीरे सब्जी वाले फिर सड़क पर आ गए। जिससे प्रतिदिन यातायात बाधित होता है। कार्यालय अधीक्षक जयपाल तोमर ने बताया के सीईओ के निर्देश पर उक्त कार्रवाई आगे भी चलती रहेगी। उधर, सब्जी ठेले वाले मनोनीत सदस्य डा. सतीश शर्मा से मिले और उन्हें आवंटित जगह को सुविधाजनक बनाये जाने की मांग की ताकि वो उस जगह सब्जी बिक्री कर सकें।

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