Tuesday, May 5, 2026
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नगर का सबसे बड़ा कूड़ेदान बना वार्ड-67

वार्ड-67: पार्षद का रिपोर्ट कार्ड

नौचंदी मैदान के ऐतिहासिक और चंडी देवी मंदिर-बाले मियां की मजार के महत्व को भी कर दिया गया दरकिनार

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: नगर के मध्य स्थित नौचंदी मैदान समेत तमाम धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व की धरोहर को अपने आंचल में संजोने वाले वार्ड-67 को नगर निगम ने बड़े कूड़ाघर के रूप में तब्दील कर दिया है। हिन्दू-मुस्लिम एकता और दोनों धर्म से जुड़े लोगों की आस्था के केन्द्र ऐतिहासिक नवचंडी मंदिर और बाले मियां मजार के महत्व को दरकिनार करते हुए नगर निगम के अधिकारियों ने जहां नौचंदी मैदान को डंपिंग यार्ड में तब्दील कर दिया है, वहीं आसपास के वार्डों का कूड़ा भी वार्ड-67 के अलग-अलग मोहल्लों में स्थित ट्रांसफार्मरों के सामने लाकर डाल दिया जाता है।

मेरठ का नौचंदी मेला देशभर में प्रसिद्ध है, इस मेले को देखने के लिए दूरदराज से लोग अपने परिवारों के साथ आते हैं, और अपनी जरूरत का सामान खरीद कर ले जाते हैं। एक महीना चलने वाले नौचंदी मेले के बाद 11 महीने यह मैदान किस हाल में रहता है, इसे देखकर लोग हैरत में पड़ जाते हैं। नगर निगम के परिसीमन में नौचंदी मैदान का सबसे बड़ा भाग और इसके आसपास मौजूद कैलाशपुरी, दुर्गा मंदिर, राजेंद्र नगर, पूर्वी कल्याण नगर, प्रीत विहार, रामबाग, पंचवटी, गोल मंदिर कैंपस आदि इलाके वार्ड-67 में आते हैं।

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जबकि नौचंदी मैदान के सामने हापुड़ रोड स्थित है। कुछ महीने से नगर निगम ने इस वार्ड के सबसे महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक महत्व रखने वाले नौचंदी मैदान के तिरंगा गेट के मैदान को डंपिंग यार्ड बना दिया है। जिसमें शहर भर से लाकर कूड़ा डाल दिया जाता है। दिन भर यहां नगर के विभिन्न क्षेत्रों से लाए गए कूड़े को डालने आई गाड़ियों को देखा जा सकता है। इसके अलावा वार्ड के अंतर्गत आने वाले मोहल्लों में जितने स्थानों पर भी ट्रांसफार्मर रखे हुए हैं, उनके आसपास के वार्डों से निकलने वाले कूड़े को वहीं-वहीं पर लाकर डाल दिया जाता है। जो दिन भर वहां से गुजरने वाले लोगों की मुसीबत का कारण बना रहता है।

इस वार्ड के रहने वाले रविंद्र कौशिक, अंकुर गोयल, मुनीर, अनिल कुमार, संजय शर्मा, दीपक कुमार आदि का कहना है कि नगर निगम ने उनके क्षेत्र को नर्क बना कर रख दिया है। इस संबंध में नगर निगम के अधिकारियों से लेकर प्रशासनिक अधिकारियों तक गुहार लगाई जा चुकी है, लेकिन उनकी इस समस्या का समाधान करने के लिए कोई आगे आने को तैयार नहीं है। इस वार्ड की स्थिति यह है कि सामने स्थित वार्ड-73 के घरों से निकल कर आने वाला कूड़ा चंडी मंदिर के सामने स्थित ट्रांसफार्मर के आगे डाल दिया जाता है।

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जिला पंचायत की दीवार के पास रखे ट्रांसफार्मर के सामने भी दूसरे वार्ड का कूड़ा लाकर डाल दिया जाता है। जिन स्थानों पर ट्रांसफार्मरों के आगे कूड़ा डाला जाता है, वहां के ट्रांसफॉर्मर तक को खुली अवस्था में देखा जा सकता है। जिसमें करंट खंभों में उतरने का डर बना रहता है। ऐसे में मशीन द्वारा इस कूड़े को उठाए जाना भी खतरों से भरा काम होता है। गणेश मंदिर, नौचंदी रोड, परशुराम गेट क्षेत्र में कूड़ा लेकर आने वाली गाड़ियां उसे बिखेरती हुई जाती हैं। लोगों का कहना है कि कोई भी गाड़ी ऐसी नहीं है जिसमें लाए जाने वाले कूड़े को ढका जा रहा हो।

नागरिकों ने बताया कि शंभू गेट पर जो नाला बनाया गया है, उसकी निकासी हापुड़ रोड के बड़े नाले में नहीं हो पा रही है। इसका मुख्य कारण यह है कि हापुर रोड के नाले पर शंभू दास गेट से लेकर तिरंगा गेट से आगे तक दुकानों और दुकानों के सामने रखे जाने वाले अस्थायी अतिक्रमण ने नाले को पूरी तरह अवरुद्ध कर रखा है। सफाई और जलनिकासी को वार्ड के लोगों ने सबसे बड़ा मुद्दा बताया है। और इसके लिए नगर निगम की नीतियों को जिम्मेदार ठहराया है।

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वार्डवासी बताते हैं कि माधवपुरम रोड पर पानी की निकासी न होने कारण बिन बरसात वहां पानी भरा रहता है। प्रीत विहार से भी चंडीमंदिर तक जल निकासी की कोई व्यवस्था नहीं है। इस वार्ड में नगर निगम की ओर से जो सीवर लाइन बिछाई गई है, उसमें बहुत छोटे साइज के पाइप प्रयोग किए गए हैं, जो पानी को नहीं खींच पाते। इसका परिणाम यह होता है कि दूसरे इलाकों का पानी उल्टा इस वार्ड की सीवर लाइन में आ जाता है, और गलियों व सड़कों पर तैरता रहता है। कैलाशपुरी और पंचवटी कॉलोनी रोड पूरी तरह टूटा हुआ है।

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लोगों का कहना है कि नगर निगम ने सीवर लाइन बिछाने के लिए जिन स्थानों पर सड़कों को तोड़ा है, करीब डेढ़ साल से उनकी मरम्मत तक नहीं की गई है। वार्ड के प्रमुख मार्गों की स्थिति इतनी खराब है कि कई स्थानों पर दुपहिया वाहन फिसल कर गिरने की घटनाओं में आए दिन लोग चोट खाते रहते हैं। तिरंगा गेट के सामने स्थित पूर्वी कल्याण नगर निवासी अनिल कुमार का कहना है कि करीब 100 घर ऐसे हैं

जिन में रहने वाले लोगों का तिरंगा गेट के सामने बनाए गए इस डंपिंग यार्ड के कारण जीना हराम हो चुका है। अजय त्यागी बताते हैं कि शांति स्मारक कन्या इंटर कॉलेज में कक्षा एक से 12वीं तक की बालिकाएं पढ़ाई के लिए आती हैं। इस कॉलेज के बाहर सड़क टूटी होने और जाल टूटा होने के कारण बालिकाओं के गिरने का खतरा बना रहता है।

पार्षद का कथन

वार्ड-67 के पार्षद राकेश शर्मा का कहना है कि उन्होंने अपने स्तर से वार्ड की बदहाली को दूर करने के भरसक प्रयास किए हैं। लेकिन नगर निगम प्रशासन ने उनके तमाम किए धरे पर पानी फेर कर रखा हुआ है। इस शहर के सबसे प्रमुख और महत्वपूर्ण धरोहर नौचंदी मैदान को जिस प्रकार डंपिंग यार्ड बना दिया गया है, वह एक शर्मनाक स्थिति है। चंडी देवी मंदिर, बाले मियां की मजार और इसमें प्रवेश करने वाले सभी द्वारों के बाहर जिस तरह कूड़े करकट के ढेर नजर आते हैं,

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उन्हें देखकर लोगों के बीच यही संदेश जाता है कि नगर निगम प्रशासन को नागरिकों के जीवन और स्वास्थ्य से कोई सरोकार नहीं रह गया है। नगर निगम उनके जीवन और स्वास्थ्य के साथ लगातार खिलवाड़ करती चली आ रही है। नगर निकाय के इस कार्यकाल में दो साल कोरोना की भेंट चढ़ गए, जबकि तीन साल नगर निगम के अधिकारियों की हठधर्मिता ने बर्बाद कर दिए हैं।

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पार्षद के स्तर से उन्होंने अपने वार्ड की प्रमुख सड़कों गलियों और नालियों को लेकर हर बैठक में प्रस्ताव दिए हैं, लेकिन नगर निगम के अधिकारियों ने इन समस्याओं के समाधान के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। पार्षद राकेश शर्मा का कहना है नगर निगम के अधिकारियों ने केवल उन पार्षदों की बातों को सुना है, जिन्होंने वहां कोई न कोई हंगामा खड़ा किया है। ऐसे में यही कहा जा सकता है कि उनकी शालीनता ही वार्ड के विकास में सबसे बड़ी बाधा बनी रही है।

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