Saturday, May 2, 2026
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इन मासूमों का क्या कसूर जब बाड़ ही खेत को खा रहे

  • मां-बाप जुर्म में जेल गए, बच्चों को सुनना पड़ता है ताने
  • नसीब वाले बच्चे रिश्तेदारों में जातें है बाकी बर्बाद होते हैं

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: जिन लोगों ने अमिताभ बच्चन की ब्लाक बस्टर फिल्म दीवार देखी होगी तो उसका एक सीन लोगों को हिला कर रख देता है। जब बचपन में अमिताभ बच्चन के हाथ में लिख दिया जाता है मेरा बाप चोर है। अब यह सीन न फिल्मों में और न ही हकीकत में दिखता है। अब इस सीन का अंदाज बदल गया है। अब मासूम बच्चों के माथे पर कलंक की तरह लिखा जा रहा है कि मेरे मां बाप कातिल हैं।

जी हां कत्ल के कई मामलों में मां बाप को जेल जाना पड़ा या किसी मामले में मां कातिल बनकर जेल चली गई और बच्चों को इस निर्दयी दुनिया में ताने सुनने के लिये मजबूर होना पड़ रहा है। इन बच्चों को अपने साथियों और समाज से तानों के रुप में सुनना पड़ रहा है कि तेरी मां अपराधी है। जेल की महिला बैरक में बंद सवा सौ से अधिक महिलाओं में से अधिकांश महिलाओं के बच्चे इसी ताने भरी जिंदगी से दो चार हो रहे हैं।

चौधरी चरण सिंह कारागार में इस वक्त सवा सौ से अधिक महिलायें विभिन्न अपराधों में बंद हैं। जिन महिलाओं के बच्चे पांच साल से छोटे हैं उनको तो बच्चों को जेल में रखने का अधिकार है लेकिन जिनके बच्चे बड़े हैं वो बाहर रह कर अपने मां बाप के कर्मों का फल भुगत रहे हैं। अगर दहेज उत्पीड़न का मामला छोड़ दिया जाए

जिसमें अधिकांश नामजदगी फर्जी होती है इनके अलावा कत्ल, चोरी, अपहरण आदि मामलों में बंद मां बाप अपने पीछे बच्चों के भविष्य को बर्बाद करके जेल जा रहे हैं। गंगा नगर में ग्यारह साल की लड़की का उसके मां बाप ने जिंदा गंग नहर में इस लिये फेंक दिया क्योंकि वो किसी लड़के से बात करती थी। पुलिस ने बागपत के सिंघावली निवासी बबलू पुत्र किशनपाल और उसकी पत्नी रुबी को बेटी चंचल की हत्या के जुर्म में जेल भेज दिया।

इनके जेल जाने के बाद इनके दो बच्चों 14 साल का वंश और 5 साल के आरव की जिंदगी अंधकारमय हो गई। बाद में उनके कुनबे के लोग लेकर चले गए। शास्त्रीनगर में नीतू शर्मा ने डेढ़ लाख रुपये सुपारी देकर अपने पति प्रदीप शर्मा की हत्या करवा दी। पुलिस ने नीतू को जेल भेज दिया। अब नीतू के दो बच्चों पीयूष और पीहू को कौन संभाले। नीतू के ससुर देवेन्द्र बेसहारा हैं और उनको खुद सहारे की जरुरत है ऊपर से नीतू अपने ससुर से चिढ़ती है।

ऐसे में बच्चों की परवरिश की बात आई। बाद में नीतू की बहन दोनों बच्चों को ले गई। नीतू का भविष्य कोई नहंी जानता लेकिन इसके दोनों बच्चों के भाग्य से मां और बाप का प्यार छिन गया। लिसाड़ीगेट में शाहिद ने अपनी बेटी सानिया के प्र्रेम प्रसंग से तंग आकर कत्ल कर दिया था। पुलिस ने शाहिद और उसकी पत्नी शमा को जेल भेज दिया था। अब उसके पांच बच्चे मां बाप के साये से दूर जिंदगी गुजार रहे हैं और ताने सुनने को मजबूर हैं।

सभ्य समाज से कटी, चारदीवारी में अपराधियों को कैद रखने के लिए बने जेल में रहने वाले मासूम बच्चे ना जाने कौन सी किस्मत लेकर आए। किसी के बाप का कत्ल हो गया। इल्जाम मां पर आ गया है। मां अपनी करनी की सजा भुगतने के लिए सलाखों के पीछे धकेल दी गई है। जी नहीं, कत्ल एक फैमिली का हुआ है। कत्ल इन मासूमों के बचपन का हुआ है। इनकी आजादी का हुआ है। इनके कल का हुआ है। इसका जबाव कौन देगा, वक्त बताएगा।

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