Tuesday, December 7, 2021
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Homeसंवादकौन कर रहा है कोयले की दलाली में हाथ काले?

कौन कर रहा है कोयले की दलाली में हाथ काले?

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देश में इन दिनों कोयला संकट पर भारी कोहराम मचा है। ऐसा माना जा रहा है कि इसकी मुख्य वजह देश के ऊर्जा संयत्रों के पास कम स्टॉक का होना है। कोयले की कमी से देश में बड़े बिजली संकट की बात भी कही जा रही है। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के अनुसार जून में पावर प्लांट्स में 17 दिनों का कोयले का स्टॉक मौजूद था। जबकि अक्टूबर में कोयले से चलने वाले पावर प्लांट्स के पास सिर्फ 4 दिन का कोयले का स्टॉक है। लेकिन केंद्र सरकार कह रही है कि कोयले का कोई संकट नहीं है, देश में बिजली की कोई किल्लत नहीं आने वाली है। केंद्र सरकार भले ही दावा कर रही हो कि न तो कोयले का संकट है, न ही बिजली की दिक्कत होने वाली है, लेकिन कई राज्यों ने केंद्र सरकार से कोयले की कमी की अपनी चिंता जाहिर कर दी है। कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने सीधे केंद्र को पत्र लिखकर हालात चिंताजनक बताए हैं।

जोशी ने ट्वीट करके कोयला उत्पादन का हिसाब बताया। प्रह्लाद जोशी ने अपने ट्वीट में लिखा, ‘कोल इंडिया ने अब तक सबसे अधिक कोयला उत्पादन एवं आपूर्ति की है, इस वर्ष 263 एमटी कोयला उत्पादन के साथ कोल इंडिया लिमिटेड ने पिछले वर्ष की समान अवधि के मुकाबले 6.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है, साथ ही, 323 एमटी के साथ गत वर्ष से 9 प्रतिशत अधिक कोल आफ-टेक किया है।’ प्रश्न यह है कि अगर खनन और उत्पादन बढ़ा है तो कमी का संकट कैसे उत्पन्न हो गया?

जो कारण बताए जा रहे हैं वे तुरंत प्रभाव डालने वाले नहीं हैं। हो सकता है भविष्य के लिए वे चिंता पैदा करने वाले हों। भारत की ऊर्जा प्लानिंग और नीतियां क्या इतनी लचर हैं कि जब कोयला उत्पादन अधिक हो रहा है पर आपूर्ति नहीं हो पा रही है तो फिर दोषी कौन है। बीच में कोयला कहां गायब हो रहा है? कोयले की दलाली में हाथ कौन काले कर रहा है?

कमर्शियल माइनिंग, अवैध बिक्री, निजी कंपनियों को कोयला भंडारण और बिक्री के मनचाही छूट, या फिर नए कोल ब्लॉकों के आवंटन से पहले निजी कंपनियों का अतिरक्त छूट और लाभ का दबाव।

भूमि अधिग्रहण में नरमी, पर्यावरण नियमों को कमजोर करना और घरेलू बिक्री के दामों और निर्यात पर ढील आदि। कोल इंडिया की अधिकार सीमा में कटौती और उसका विनिवेश आदि। कुल मिलाकर सरकारी नियंत्रण से मुक्ति।
सरकार की तरफ से बताई गई वजहें भी ध्यान देने योग्य हैं और मौजूदा बिजली संकट का एक बड़ा कारण हैं। हालांकि इनमें विरोधाभास भी है।

कहा जा रहा है कि जहां घरेलू कोयला उत्पादन में आई गिरावट है, वहीं अंतरराष्ट्रीय बाजार में कोयले के दामों में आई तेजी भी आई है। ऊर्जा मंत्रालय के मुताबिक कोयले के दाम बीते 6 महीनों के दौरान ही 60 से 160 डॉलर प्रति टन तक पहुंच चुके हैं, अब इतने महंगे कोयले का आयात तो संभव है नहीं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कोयले के दामों में आए उछाल के लिए चीन की कारस्तानी भी है।

चीन ने मई में 21 मिलियन टन और जून में 28 मिलियन टन कोयले का आयात किया। कहा जा रहा है। भारत के कोयला संकट के पीछे अंतरराष्ट्रीय समीकरण भी जिम्मेदार हैं। बिजली संकट की वजह से पहले चीन में हालात खराब हुए। लेबनान की राजधानी बेरूत में पूरी रात लोगों को अंधेरे में बितानी पड़ी। अब भारत के करोड़ों लोगों पर भी अंधेरे में रहने का संकट मंडरा रहा है। संकट कब तक टला रहेगा, कोई नहीं बता रहा है।

इंडोनेशिया का अधिकतर स्टॉक भी चीन ने ही खरीद लिया। इतना ही नहीं आस्ट्रेलिया के कोयले से लदे जहाजों को चीन ने अपने बंदरगाहों के करीब महीनों रोके रखा। माना जा रहा है कि चीन अपने फैक्ट्री उत्पादन और आर्थिक इंजन की रफ्तार बढ़ा रहा है। कोरोना संकट के दौरान दुनिया भर से चीनी फैक्ट्रियों में जरूरी सामानों के आर्डर की डिमांड आ रही है। चीन के बाद भारत कोयले की खपत वाला दूसरा सबसे बड़ा देश है। लिहाजा भारत की चुनौती बड़ी है।

वैसे भारत के कोयला संकट को गहराने में जहां अंतरराष्ट्रीय समीकरणों ने भूमिका रही वहीं देश के भीतर मौजूद कारण भी इसकी वजह रहे। जिसने खदानों से लेकर बिजली संयंत्रों तक सप्लाई की लय गड़बड़ा दिया। कई राज्यों में कोयले की उपलब्धता में कमी आई है।

महाराष्ट्र में बिजली उत्पादन में हुई कमी की वजह से दूसरी ग्रिड से महंगी बिजली खरीदनी पड़ रही है। एक जानकारी के मुताबिक महाराष्ट्र पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी ग्राहकों को 7 प्रति यूनिट के हिसाब से बिजली बेच रही है लेकिन पैदा हुए संकट ने दूसरी ग्रिड से सरकार को 20 प्रति यूनिट के हिसाब से बिजली खरीदने पर मजबूर कर दिया है।

ये संकट इसलिए पैदा हुआ है, क्योंकि महाराष्ट्र में बिजली पैदा करने के लिए जितने कोयले की जरूरत है, उसका सिर्फ आधा कोयला ही मिल पा रहा है। जब आधा कोयला मिलेगा तो जाहिर है तो बिजली का उत्पादन भी गिरेगा, जिससे बिजली की कटौत करना मजबूरी हो जाएगी।

देश के विभिन्न राज्यों की तरह उत्तर प्रदेश में भी बिजली उत्पादन के लिए कोयले का संकट गहराता जा रहा है। राज्य सरकार के एक प्रवक्ता ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर राज्य में कोयले की आपूर्ति सामान्य कराने और प्रदेश को अतिरिक्त बिजली उपलब्ध कराने का आग्रह किया है।

एमपी के कई इलाकों में 4-5 घंटे की कटौती हो रही है। वहीं राजस्थान में राजधानी जयपुर सहित कई इलाकों में 4 घंटे की कटौती हो रही है। जाहिर है इससे जनता की परेशानी बढ़ेगी। बिजली कंपनियां भी दाम बढ़ाने के लिए मजबूर होंगी और मनमाने दाम बढ़ाने के की कोशिश करेंगी।


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