नमस्कार, दैनिक जनवाणी डॉटकॉम वेबसाइट पर आपका हार्दिक स्वागत और अभिनंदन है। हिंदू धर्म में विजयदशमी यानी दशहरे का विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। हर साल आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाने वाला यह पर्व बुराई पर अच्छाई और अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान श्रीराम ने रावण का वध कर धर्म की स्थापना की थी। इसी विजय की स्मृति में दशहरे पर रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन किया जाता है।
दशहरा शारदीय नवरात्रि के समापन से भी जुड़ा है। नौ दिनों तक मां दुर्गा की आराधना और व्रत करने वाले श्रद्धालु इस दिन विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। हालांकि, वर्ष 2026 में दशमी तिथि दो दिनों तक रहने के कारण दशहरे की तारीख को लेकर लोगों के मन में सवाल हैं। आइए जानते हैं कि इस साल विजयदशमी कब मनाई जाएगी और रावण दहन के लिए कौन-सा समय शुभ माना जा रहा है।
दशहरा 2026 कब है? जानें विजयदशमी की सही तारीख
पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में आश्विन शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि 20 अक्टूबर, मंगलवार को दोपहर 12 बजकर 50 मिनट पर शुरू होगी। इस तिथि का समापन 21 अक्टूबर, बुधवार को दोपहर 2 बजकर 11 मिनट पर होगा।
हिंदू त्योहारों की तारीख तय करने में उदया तिथि का विशेष महत्व होता है। हालांकि, विजयदशमी के मामले में विजय मुहूर्त और प्रदोष काल को भी ध्यान में रखा जाता है। दिए गए पंचांग विवरण के अनुसार, इस वर्ष दशहरा 20 अक्टूबर 2026 को मनाया जाएगा। इस दिन भगवान श्रीराम की विजय के प्रतीक स्वरूप पूजा-अर्चना और रावण दहन के आयोजन किए जा सकते हैं।
रावण दहन का शुभ मुहूर्त
विजयदशमी के दिन शुभ मुहूर्त में पूजा करना और रावण दहन करना धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। इस वर्ष के प्रमुख मुहूर्त इस प्रकार हैं:
विजय मुहूर्त: दोपहर 1:59 बजे से 2:45 बजे तक
अपराह्न पूजा मुहूर्त: दोपहर 1:14 बजे से शाम 3:30 बजे तक
प्रदोष काल की शुरुआत: शाम 5:47 बजे
श्रवण नक्षत्र प्रारंभ: 19 अक्टूबर को शाम 3:38 बजे
श्रवण नक्षत्र समाप्त: 20 अक्टूबर को शाम 6:02 बजे
निशिता मुहूर्त: रात 11:41 बजे से 12:31 बजे तक
धार्मिक परंपराओं में रावण दहन के लिए प्रदोष काल को विशेष महत्व दिया जाता है। ऐसे में 20 अक्टूबर को स्थानीय पंचांग, परंपरा और आयोजन के निर्धारित समय के अनुसार रावण दहन किया जा सकता है। अलग-अलग शहरों में सूर्यास्त और स्थानीय पंचांग के अनुसार समय में अंतर हो सकता है।
क्यों मनाया जाता है विजयदशमी का पर्व?
विजयदशमी का त्योहार केवल रावण दहन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सत्य, धर्म और सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा भी देता है। रामायण की धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्रीराम ने रावण का वध करके यह संदेश दिया कि अहंकार और अधर्म चाहे कितने ही शक्तिशाली क्यों न हों, अंत में विजय सत्य की ही होती है।
रावण के दस सिरों को प्रतीकात्मक रूप से मनुष्य के भीतर मौजूद अहंकार, क्रोध, लोभ, मोह और अन्य नकारात्मक प्रवृत्तियों से भी जोड़ा जाता है। रावण दहन के माध्यम से इन बुराइयों का त्याग कर अच्छे विचारों और सकारात्मक गुणों को अपनाने का संदेश दिया जाता है।
दशहरे का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व
भारत के अलग-अलग राज्यों में दशहरा विभिन्न परंपराओं के साथ मनाया जाता है। कई स्थानों पर रामलीला का आयोजन होता है, जबकि अन्य जगहों पर रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन किया जाता है। कुछ क्षेत्रों में इस दिन शस्त्र पूजा, वाहन पूजा और नए कार्यों की शुरुआत करना भी शुभ माना जाता है।

