Friday, March 6, 2026
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स्वयं और समाज के लिए योग

 

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Capturefdfgdgd 21 जून को दशम अंतराष्ट्रीय योग दिवस मना रहे है। विदित है कि प्रथम अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2015 को मनाया गया था। 11 दिसंबर 2014 को संयुक्त राष्ट्र संघ ने 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मान्यता दी। जो भारतवर्ष की हजारों वर्ष पुरानी धरोहर है। षढ दर्शनों में योग एक दर्शन है। यदि हम योग के अर्थ की बात करें तो महर्षि पाणिनि के धातू पाठ के दीवादीगण में युज समाधो, रुधादीगण मे रुजिर योगे तथा चुरादीगण में युज संयमने अर्थ में युज धातु आती है। यदि इन सभी धातुओं का अर्थ मिला दें तो योग की परिभाषा कुछ इस प्रकार हो सकती है संयम पूर्वक साधना करते हुए आत्मा का योग (जोड़कर) करके समाधि का आनंद लेना योग है। अब प्रश्न उठता है कि योग क्या है? पतंजलि योग सूत्र के समाधि पाद के प्रथम सूत्र में योग को अनुशासन कहा गया है। अनुशासन के बिना हम जीवन की कल्पना भी नहीं कर सकते। कोई भी राष्ट्र व सभ्यता बिना अनुशासन के खड़ी नहीं रह सकती। योग भारतीय जीवन में एक सततवाही परंपरा है। आज के विज्ञान वादी युग में इतना कहने भर से काम नहीं चलेगा, क्योंकि आज प्रमाण के आधार पर ही किसी बात को सत्य सिद्ध किया जा सकता है। भारतीय उपमहाद्वीप की हजारों वर्ष प्राचीन सिंधु घाटी जैसी सभ्यता में योग के प्रमाण मिले हैं। खुदाई में प्राप्त सीलो पर पशुपति तथा मातृ देवी को भद्रासन, शांभवी तथा योग मुद्रा की स्थितियों में दिखाया गया है। अध्ययन से यह भी पता चला है कि यह दुनिया की सबसे विकसित नगरीय सभ्यताएं थीं। इनकी जल निकासी, मल निस्तारण तथा स्वच्छता व्यवस्थाएं आज भी कुतूहल का विषय हैं। मोहनजोदड़ो के विशाल स्नानागार व्यक्तिगत स्वच्छता के सामूहिक प्रयासों की पराकाष्ठा को प्रदर्शित करते हैं। सारे संसाधन उपलब्ध होने के बाद भी आज के परिदृश्य में उपरोक्त व्यवस्थाएं बनाना विकसित राष्ट्रों के लिए भी दूर की कोड़ी ही प्रतीत हो रही हैं। इसके साथ यह भी पता चला है कि ये सभ्यताएं हजारों वर्षों तक हिंसा से मुक्त रहीं। इनमें किसी युद्ध तथा विध्वंस के प्रमाण नहीं मिले हैं। इनमें किसी सख्त केंद्रीय सत्ता के प्रमाण भी नहीं मिले हैं। जिससे सिद्ध होता है कि कोई सामूहिक नागरिक शासकीय प्रणाली जैसी व्यवस्था प्रचलन में होगी।

सांख्य सिद्धांत पर आधारित योग व्यावहारिक एवं प्रयोगात्मक है, जहां मानव के मन एवं शरीर को ही प्रयोगशाला मानकर सांख्य के सूत्रों को कसौटी पर कसा गया है। विज्ञान की खोजों ने भौतिक संसाधन जुटाकर मानव जीवन को आसान बनाया है। नई-नई तकनीक विकसित कर विकास के नए आयामों को भी प्रतिस्थापित किया है। खोज लगातार जारी है। मानव इन उपलब्धियों से भी संतुष्ट नहीं है। वह इससे अधिक का आकांक्षी है। इस प्रतिस्पर्धा में उसने स्वयं ही विनाश की पटकथा तैयार कर ली है। इस कालखंड में सबसे ताकतवर वही है जिसके पास सबसे अधिक विध्वंस का समान है। आज विकास की यही परिभाषा हो गई। इसी को हम प्रकृति की विकृति कह सकते हैं। एक देश दूसरे देश को मिटा देना चाहता है। पूरी दुनिया बारूद के ढेर पर बैठी है। किसी के पास कोई समाधान नहीं है। इसका समाधान हजारों वर्ष पहले भारतीय दर्शन ने वसुदेवकुटुंबकम के रूप में दिया। पूरा संसार एक परिवार है। जब हम इस विचार के साथ आते हैं तो द्वेषभाव पूर्णतया मिट जाता है। इस विचार को गहरा करने के लिए मन को कसना जरूरी है।

हजारों वर्ष पहले पतंजलि मुनि ने इस कसावट को योग दर्शन के माध्यम से परख कर सिद्ध किया था। आज के समय यह कसावट ढीली पड़ रही है। स्वार्थ की अंधी दौड़ ने मन को रोगी बना दिया है। मन का वेग सहन न करने के कारण शरीर समय से पहले ही जर्जर हो रहा है। स्वस्थ नागरिक ही स्वस्थ राष्ट्र की परिकल्पना को साकार कर सकते हैं। इसलिए योग अन्य दर्शनों से भिन्न है। जहां अन्य दर्शन धर्म और ज्ञान की जिज्ञासा पैदा करते हैं, वहीं योग चित की वृतियों से निकलने का मार्ग प्रशस्त करता है। योग समग्र है, समावेशी है। यहां जड़-चेतन, ईश्वर- अनिश्वरवादी, ज्ञानी-अज्ञानी, रोगी-निरोगी सबके लिए स्थान है या कहें कि योग सर्वव्यापी तथा सार्वभौमिक है। इसे राष्ट्र, धर्म तथा जातियों में विभेदित नहीं किया जा सकता। इसलिए ही सभी देशों ने 21 जून को एक मत से अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मान्यता दी। दुनिया संक्रमण काल से गुजर रही है। तथाकथित विकसित देशों के विश्वास की दीवारें दरकने लगी हैं।

पूरी दुनिया डर के साए में जी रही है। अविश्वास के घने बादलों ने संसार को ढक लिया है। ऐसी परिस्थितियों में केवल भारत का विचार ही आशा जगाता है, क्योंकि हम ही तो हैं, जो प्रात:काल हाथ जोड़कर अपनी प्रार्थना में सबके सुखी, निरोगी, निरामय होने तथा सब के मंगल की कामना करते हैं। हाथ जोड़ना व्यक्तिगत चेतना का सार्वभौमिक चेतना के साथ योग को प्रतिबिंबित करता है। आइये सभी स्वयं एवं समाज के लिए योग की ओर कदम बढ़ाएं।


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