- सरकार बनने के बाद से केवल एक बार वह भी दस रुपये प्रति क्विंटल बढ़ा है रेट
- पिछले पेराई सत्र का भी लटका है लाखों का भुगतान, किसानों में अकुलाहट
मुख्य संवाददाता |
सहारनपुर: भाजपा सरकार ने गन्ने का न्यूनतम समर्थन मूल्य अभी घोषित नहीं किया है। ऐसे में गन्ना उत्पादक किसानों में कड़वाहट बढ़ गई लगती है। सिर्फ 14 दिन के भीतर भुगतान का सब्जबाग दिखाने वाली भाजपा सरकार ने इसे भुला दिया। हाल ये है कि चालू पेराई सत्र तो छोड़िए, पिछले साल का करोड़ों रुपया चीनी मिलों पर बकाया है। गन्ना किसान मारा-मारा फिर रहा है। सरकार के कानों पर जूं नहीं रेंग रही। आखिरकार, किसान संगठनों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
यह बताने की जरूरत नहीं कि गन्ना उत्पादन में उत्तर प्रदेश का अहम स्थान है। देश के गन्ने के कुल रकबे का 51 प्रतिशत उत्पादन इसी राज्य से होता है। यही नहीं उत्तर प्रदेश चीनी उत्पादन में 38 फीसद की हिस्सेदारी करता है। पश्चिमी यूपी की बात करें तो यहां की जरखेज जमीन गन्ने के लिए बड़ी उपयुक्त मानी जाती है।
पश्चिम में अच्छी प्रजाति के गन्ने का उत्पादन होता है। लेकिन, यह सब होने के बाद भी सरकार किसी की हो, गन्ना किसानों को समय से भुगतान कभी नहीं मिला। सन 2017 में जब भाजपा सरकार बनी तो किसानों को बड़ी उम्मीदें थीं। लेकिन, उन पर पानी फिर गया। सन 2017 में गन्ने के न्यूनतम समर्थन मूल्य में फकत 10 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि हुई थी।
सामान्य प्रजाति के गन्ने का मूल्य 315 रखा गया था और अग्रिम प्रजाति का मूल्य 325। इसके बाद से गन्ने का समर्थन मूल्य नहीं बढ़ा। पेराई सत्र शुरू हुए करीब एक महीना हो चुका है किंतु किसानों के कल्याण का राग अलापने वाली सरकार ने अभी मूल्य घोषित नहीं किया है। इससे किसान आहत हैं। किसान संगठन भी अब गन्ने को लेकर आंदोलन को धार देने के मूड में हैं। बहरहाल, गन्ना भुगतान पिछले सत्र का ही लटका हुआ है तो चालू सत्र की बात कौन करे।
फिलहाल, भुगतान न होने से किसान हलकान हैं। उधर, कृषि कानूनों को लेकर आंदोलित हरियाणा और पंजाब के किसानों के सुर में सुर मिला रहे सहारनपुर जनपद के गन्ना उत्पादकों को सरकार से नाखुशी है। किसान नेता मुकेश कुमार का कहना है कि भाजपा सरकार पूंजीपतियों के हाथ में खेल रही है।
सरकार से मिल मालिक मिले हुए हैं। ऐसे में किसानों का उत्पीड़न नहीं तो और क्या होगा। बहरहाल, सहारनपुर में कुल छह मिले हैं। देवबंद को छोड़ दें तो बाकी पांच मिलों पर किसानों लाखों-लाख का भुगतान रुका है।
आधिकारिक जानकारी के मुताबिक पिछले सत्र का गांगनौली मिल पर 10583.81 बकाया है। इसी तरह शेरमऊ पर 3658.91 तो नानौता मिल पर 5576.66 बकाया है। सरसावा मिल पर 2805.12 तो गागलहेड़ी चीनी मिल पर 890.44 रुपये बाकी हैं।
चालू सत्र में किन मिलों पर कितना है बकाया
- सरसावा 2011.96
- नानौता 2134.40
- गागलहेड़ी 3064.16
- शेरमऊ 3956.92
- गांगनौली 6550.40
- देवबंद 6697.60
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कुल बकाया 24415.46
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जल्द ही पिछले सत्र का भुगतान मिलों से करा दिया जाएगा। इस दिशा में प्रयास चल रहा है। पिछला भुगतान कराने के साथ ही चालू सत्र का भुगतान शुरू कराया जाएगा। -जिला गन्ना अधिकारी, कृष्ण मोहन मणि त्रिपाठी।

