Sunday, May 10, 2026
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12 टीमें करेंगी पहली बार हिम तेंदुओं की गणना

जनवाणी ब्यूरो |

नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर में पहली बार हिम तेंदुओं की संख्या का पता लगाने, तेंदुओं के रहने और संरक्षण के लिए विशेष अभियान शुरू किया गया है।

प्रोजेक्ट स्नो लैपर्ड के तहत 48 विशेषज्ञों की 12 टीमों को जम्मू के मांडा चिड़ियाघर से रवाना किया गया। यह टीमें प्रोजेक्ट स्नो लेपर्ड के तहत किश्तवाड़ हाई एल्टीट्यूड राष्ट्रीय उद्यान में मौसम की चुनौतियों के बीच महीनों अध्ययन कर डेटा जुटाएंगी। 2195.50 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले राष्ट्रीय उद्यान में अभियान पूरा कर टीमें मई-जून 2022 तक अपनी रिपोर्ट केंद्र को सौंपेंगी।

हिम तेंदुए 4500 मीटर की ऊंचाई पर पाए जाते हैं

इंटरनेशनल यूनियन फार कंजर्वेशन आफ नेचर (आईयूसीएन) में सूचीबद्ध हिम तेंदुए ज्यादातर 3000 और 4500 मीटर के बीच की ऊंचाई पर पाए जाते हैं। ये किश्तवाड़ राष्ट्रीय उद्यान और इसके आसपास के इलाकों में देखे गए हैं।

इसके अलावा जम्मू संभाग के उच्च पर्वतीय जंगलों, कश्मीर घाटी के गुरेज, थाजवास और कश्मीर के ओवेरा उड़ू में हिम तेंदुए देखे गए हैं। इन इलाकों में हिम तेंदुए की मौजूदगी के फोटोग्राफिक सबूत हैं। हिमालय के उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में हिम तेंदुआ पाया जाता है।

पारिस्थितिकी में हो रहे बदलाव से हिम तेंदुओं के लिए खतरा 

यह मध्य एशिया, दक्षिण एशिया, चीन और रूस में भी पाया गया है। लेकिन पारिस्थितिकी में हो रहे बदलाव से इस प्रजाति के अस्तित्व पर खतरा बढ़ा है। हिम तेंदुआ भारत में प्रजाति रिकवरी कार्यक्रम का हिस्सा है और लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, सिक्किम और उत्तराखंड में पहले से ही यह कार्यक्रम चलाया जा रहा है।

मांडा चिड़ियाघर जम्मू से विभागीय टीम को रवाना करते हुए मुख्य वन्यजीव वार्डन सुरेश कुमार गुप्ता ने बताया कि जम्मू-कश्मीर में पहली बार हिम तेंदुओं पर सर्वेक्षण किया जा रहा है। जम्मू-कश्मीर के पुनर्गठन के बाद बर्फ की आबादी के आकलन के तहत एक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट बनाई गई और इस साल अप्रैल में सरकार को सौंपी गई।

जम्मू और कश्मीर में किया जाएगा सर्वेक्षण 

कश्मीर के संभावित हिम तेंदुए वाले बर्फ से ढके क्षेत्रों में अलग से विभागीय टीमों को भेजने की तैयारी चल रही है। नेचर कंजर्वेशन फाउंडेशन (एनसीएफ) के संसाधन कर्मियों ने सर्वेक्षण के लिए जम्मू और कश्मीर दोनों डिवीजनों की टीमों को प्रशिक्षित किया है।

यह मूल्यांकन अभियान खराब मौसम और कठिन चुनौतियों से भरा है। लेकिन अभी अभ्यास के लिए अच्छा समय है, क्योंकि खाना बदोश आबादी ऊंचे इलाकों से मैदानी इलाकों की ओर उतरती है और जंगली जानवर भी ऐसा ही करते हैं। रहे।

केंद्र सरकार अक्तूबर में जारी करेगी डेटा

आगामी 23 अक्तूबर में केंद्र सरकार द्वारा जारी किए जाने वाली राष्ट्रीय डेटाबेस में जम्मू कश्मीर के हिम तेंदुए की आबादी के आंकड़ों को शामिल करने के लिए मई-जून 2022 तक सर्वेक्षण पूरा करने की योजना है। भविष्य के लिए हिम तेंदुओं के संरक्षण के लिए लैंडस्केप प्रबंधन योजना पर काम किया जाएगा।

अभियान में भद्रवाह कैंपस, जम्मू विश्वविद्यालय, शेर-ए-कश्मीर कृषि विज्ञान व प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कश्मीर, गैर सरकारी संगठनों और अन्य वन्यजीव से जुड़े समूहों का सहयोग लिया जा रहा है। पिछले माह कश्मीर में वन्यजीव संरक्षण विभाग द्वारा परीक्षण के लिए एक पायलट सर्वेक्षण किया गया था।

कैमरा ट्रैप से गतिविधियां कैद होंगी

विभागीय टीमें तय प्रोटोकॉल के तहत हिम तेंदुओं की आबादी का सर्वेक्षण करेंगी। उनके आवासों की पहचान के साथ आदतों को देखा जाएगा। कैमरा ट्रैप के अलावा टीमें बालों के नमूने, स्कैट और अन्य सबूत जुटाएंगी, फिर इन्हें सही डेटा सुनिश्चित करने के लिए डीएनए विश्लेषण के लिए बेंगलुरू स्थित केंद्र सरकार के संस्थान में भेजा जाएगा।

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