- 13 में से 11 शिक्षक गायब, आठ शिक्षक बीएलओ ड्यूटी के नाम पर नदारद
- बच्चों को पढ़ाते मिले बच्चे, शिक्षकों के न होने से पढ़ाई हो रही प्रभावित
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: सरकारी स्कूलों में अच्छी शिक्षा देने के सरकार लाख दावे करें, लेकिन इन दावों से हकीकत नहीं छिपाई जा सकती। स्कूलों में शिक्षा लेने आने वाले गरीब परिवारों के बच्चों के साथ शिक्षा के नाम पर भद्दा मजाक किया जा रहा हैं। 200 से ज्यादा बच्चों को केवल दो शिक्षक पढ़ाते नजर आए, जो सरकारी शिक्षा की पोल खोलने के लिए काफी हैं।
वहीं अधिकारियों को भी इस बारे में सब जानकारी है, लेकिन वह भी सरकार की नीतियों को पलीता लगाने से बाज नहीं आ रहे हैं। 13 में से आठ शिक्षकों को बीएलओ ड्यूटी पर लगा दिया गया, जबकि विद्यालय में पढ़ने आने वाले छात्रों को केवल दो शिक्षकों के सहारे छोड़ दिया गया।
13 में से आठ शिक्षकों की बीएलओ में लगी ड्यूटी
शनिवार को विकास क्षेत्र रजपुरा में आनें वाले उच्च प्राथमिक विद्यालय साधारणपुर में केवल दो शिक्षक 208 बच्चों को पढ़ाते मिले। स्कूल में मौजूद सअ. मनोज कुमार ने जानकारी देते हुए बताया वैसे तो विद्यालय में कुल 13 शिक्षकों की नियुक्ति है लेकिन इनमें से सहायक अध्यापक कन्हैया लाल, सहायक अध्यापक वन्दना आनन्द, अनुदेशक संजू यादव, अनुदेशक निशा, सहायक अध्यापक पुष्पा रानी, सहायक अध्यापक शरद यादव, शिक्षामित्र सुनीता व शिक्षामित्र प्रियंका की ड्यूटी बीएलओ पर लगी हैं।

जबकि इंचार्ज प्रधान अध्यापक योगेन्द्र कुमार व सहायक अध्यापक सन्दीपा ठाकुर अवकाश पर हैं। अनुदेशक संजू यादव को एक दूसरे विद्यालय में भेजा गया हैं। मौके पर केवल दो शिक्षक सहायक अध्यापक मनोज कुमार व सहायक अध्यापक हेमा मालती ही बच्चों को पढ़ाती मिली।
बच्चों को पढ़ाते मिले बच्चे
विद्यालय मे शिक्षा कैसे मिल रही है इसका जायजा लेने पर जो नजारा सामनें आया वह चौंकानें वाला था। स्कूल की कक्षा एक में 24, दो में 26, तीन में 29, चार में 32, पांच में 26, छह में 25, सात में 24 व आठ में 22 बच्चें पढ़ने आते हैं। लेकिन विद्यालय में शिक्षकों के मौजूद न होने पर इन कक्षाओं में मॉनिटर बच्चों को पढ़ाते नजर आए। जबकि दो शिक्षक कौन-कौन सी कक्षाओं के बच्चों को पढ़ाऐगें यह सवाल उठ रहा हैं।
क्या होती है बीएलओ ड्यूटी
चुनाव संबंधित कार्य जिनमें वोटरों के नाम वोटिंग लिस्ट में जोड़ना, मृतकों के नाम हटाना, वोटरों की गिनती करना व अन्य जिम्मेदारियां शामिल होती हैं। इसके लिए तहसील स्तर से शिक्षकों की सूची खंड शिक्षा अधिकारी से मांगी जाती है जिन्हें बीएलओ ड्यूटी पर लगाया जाता हैं। लेकिन इस ड्यूटी को करने वाले शिक्षकों की अनुपस्थिति में स्कूल में पढ़नें वाले बच्चों की शिक्षा प्रभावित हो रही है इसको लेकर विभाग कोई कदम नहीं उठा रहा हैं।
ड्यूटी लगवानें के नाम पर होती है वसूली
चुनावों में ड्यूटी लगवानें के नाम पर खण्ड शिक्षाधिकारी कार्यालय पर वसूली होनें की भी चर्चा हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार बड़ी संख्या में स्कूलों के शिक्षक अपनी जिम्मेदारी से बचने की कोशिश करते हैं। इसी वजह से वह बीएलओं में ड्यूटी लगवानें के लिए संबधित अधिकारी को पैसे देकर ड्यूटी लगवा रहें हैं।
बीएलओ में ड्यूटी लगने पर इन शिक्षकों को सप्ताह में केवल तीन दिन के लिए ही विद्यालय आना होता हैं। बीएलओ में ड्यूटी करने पर शिक्षकों को सरकार से अलग से मानदेय भी मिलता हैं। यह क्रम अगस्त से चल रहा है जो दिसंबर तक जारी रहेगा।
उच्च प्राथमिक विद्यालय साधारणपुर में 8 सहायक अध्यापकों की ड्यूटी बीएलओ कार्य के लिए लगी हैं। शनिवार को विशेष अभियान चलाए जानें की वजह से सभी आठ शिक्षक विद्यालय नहीं पहुंच सके।
सोमवार को सभी अपने कार्य पर पहुंचेंगे। -कमल राज, खंड शिक्षा अधिकारी रजपुरा।


