जनवाणी संवाददाता |
शामली: कार्तिक मास शुक्ल पक्ष की पंचमी को छठ का दूसरा दिन खरना मनाया गया। मंगलवार की शाम मंदिर हनुमान टीला हनुमान धाम पर स्थित शिव सरोवर के तट पर पूजा का आयोजन किया गया जिसमें भारी संख्या में श्रद्धालु महिलाओं ने भाग लिया।
नहाय खाय के साथ छठ पर्व का आरंभ हो चुका है। छठ का यह महापर्व पूरे चार दिनों तक चलता है। आज कार्तिक मास शुक्ल पक्ष की पंचमी को छठ का दूसरा दिन खरना मनाया गया। छठ पूजा का पर्व उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड आदि का प्रमुख त्यौहार है।
शामली जिले में बडी संख्या में पूर्वी अंचलों के लोग निवास करते हैं जो इस पर्व को पूरी श्रद्धा, उल्लास एवं भक्ति भाव के साथ मनाते हैं। दूसरे दिन खरना व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं ने चूल्हे पर गन्ने के रस, गुड, दूध, चावल से बनी खीर और घी लगी रोटी तैयार की थी तथा छठ मइया की पूजा कर प्रसाद का वितरण किया था।
इसी के साथ 36 घंटे का निर्जला व्रत भी शुरू हो गया था। शाम के समय मंदिर हनुमान टीला पर श्रद्धालु महिलाओं ने घाट पूजा के अस्तचलगामी सूर्य को अर्घ्य प्रदान किया। बुधवार को छठ का त्यौहार धूमधाम से मनाया जाएगा। कल भगवान सूर्य की पूजा अर्चना की जाएगी। गुरुवार को उगते सूर्य को अर्ध्य देने के साथ ही पर्व का समापन भी होगा।
इस अवसर पर पं. संजय शास्त्री, ओमकार तिवारी, वीरेन्द्र शास्त्री, देवानंद शास्त्री, पं. अशोक तिवारी, इंदू शर्मा, सीता, गीता, सुमन, रेणू, दुर्गा आदि भी मौजूद रहे।
खरना का महत्व
खरना का अर्थ माना जाता है शुद्धिकरण। इस दिन को लोहंडा के नाम से भी जाना जाता है। कार्तिक, शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को खरना किया जाता है। इस दिन एक प्रकार से शुद्धिकरण करण की प्रक्रिया की जाती है।
इस दिन प्रात: स्नान करने के पश्चात स्वच्छ कपड़े पहने जाते हैं और महिलाएं सिंदूर लगाती हैं। इसके बाद दिनभर व्रत किया जाता है। एक समय भजन करने का अर्थ माना जाता है कि इससे तन के साथ मन भी शुद्ध रहता है।
शाम को छठी मईया का प्रसाद बनाया जाता है और अस्त होते सूर्य को छठ का पहला अर्घ्य देने के बाद निर्जला व्रत आरंभ हो जाता है। माना जाता है कि इसी दिन से घर में छठी मइया का आगमन होता है।

