- सीएम का जर्जर पुलों को लेकर 100 दिन का प्लान
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जर्जर पुलों के निर्माण व मरम्मत के लिए 100 दिन का प्लान तैयार किया है। इस प्लान में गंगनहर के 39 पुलों को शामिल किया गया है या फिर नहीं, यह बड़ा सवाल है। क्योंकि गंगनहर के 39 पुल जर्जर हालत में हैं, जो अंग्रेजी हूकुमत में तैयार किये गए थे।
ये सभी पुल डाट के निर्मित है, जिनकी आयु पूरी हो चुकी है। इसके लिए सिंचाई विभाग ने चेतावनी बोर्ड भी लगा रखे हैं। यदि सिंचाई विभाग की चेतावनी पर अमल करें तो इन पुलों से सफर नहीं किया जा सकता। क्योंकि जर्जर हालत है, ऐसे में कोई भी दुर्घटना घट सकती है।
बड़ा सवाल यह है कि इसके बाद भी जर्जर पुलों पर ही वाहन दौड़ रहे हैं। अंग्रेजी हूकुमत में इन पुलों की क्षमता ट्रैक्टर-ट्रॉली या फिर बैलगाड़ी के लिए तैयार किये गए थे, लेकिन वर्तमान में इन पुलों से ऐसे ट्रक गुजर रहे हैं, जिनकी क्षमता 20 से 30 टन से भी अधिक की है।
नानू में तो एनएचएआई पुल का नये सिरे से निर्माण कर रही हैं, लेकिन बाकी 39 पुलों का क्या होगा? क्या सिंचाई विभाग उनका नये सिरे से निर्माण करा पायेगा या फिर मरम्मत के नाम पर खानापूर्ति कर दी जाएगी। हालांकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश भर के सिंचाई विभाग के पुलों व माइनर को पुन: निर्माण व मरम्मत करने के लिए प्लान तैयार किया हैं, जिसके लिए 100 दिन का समय सिंचाई विभाग के अधिकारियों को दिया गया हैं।
अब इसमें सिंचाई विभाग गंगनहर के पुलों को नये सिरे से बनाने के लिए प्लान तैयार करती है या फिर नहीं? यह तो सिंचाई विभाग के अफसरों पर निर्भर करेगा। जर्जर पुलों को बहुत पहले नये सिरे से बना देना चाहिए था, क्योंकि जर्जर हालत में आने के बाद भी पुलों से वाहन गुजर रहे हैं, जो कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं। पूर्व कैबिनेट मंत्री अनुराधा चौधरी के कार्यकाल में गंगनहर के तमाम पुलों का निर्माण नये सिरे से करने का प्लान तैयार किया गया था।
गंगनहर पटरी को छह लेन बनाने का भी प्लान बना था, जिस पर काम हुआ, लेकिन तब सरकार के जाने के बाद यह बिग प्रोजेक्ट फिर से पेंडिग डाल दिया गया था। इस तरह से सिंचाई विभाग भी जर्जर पुलों को लेकर बनाये गए प्लान पर काम नहीं कर सका। अब फिर से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस दिशा में 100 दिन का प्लान तैयार किया हैं। अब देखना यह है कि वेस्ट यूपी में सिंचाई विभाग जर्जर पुलों का निर्माण करा पाता है या फिर नहीं।

