Friday, July 30, 2021
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HomeUttar Pradesh NewsMeerutरैपिड रेल के पिलर का 80 प्रतिशत काम पूरा

रैपिड रेल के पिलर का 80 प्रतिशत काम पूरा

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जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: रैपिड रेल की बदौलत 2023 में हवा से बात करने को तैयार हो जाएगी। यानी 2023 में मेरठ से दिल्ली की 70 किमी की दूरी मात्र 55 मिनट में पूरी की जा सकेगी। 70 किमी लंबे रूट पर देश के पहले आरआरटीएस का कार्य तेजी से चल रहा है।

70 किलोमीटर ट्रैक एलिवेटेड और 12 किलोमीटर ट्रैक अंडरग्राउंड होगा। रैपिड रेल के लिए पिलर खड़ा करने का करीब 80 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है।

अंडरग्राउंड ट्रैक का चार किमी दिल्ली में और आठ किमी मेरठ व गाजियाबाद में होगा। दिल्ली के आनंद विहार में टनल बोरिंग मशीन से टनल बनाने का कार्य तेजी से चल रहा है। सुरंग बनाने के लिए लॉन्चिंग शाफ्ट नीचे उतारा जा चुका है।

जबकि मेरठ में भैंसाली अंडरग्राउंड स्टेशन के पास कार्य प्रारंभ हो चुका है। इस अंडरग्राउंड स्टेशन के लिए डी वॉल का निर्माण चल रहा है। इसके अंतर्गत कुल 121 फेंसिंग पैनल का केज भूमि के अंदर डालकर सीमेंट-कंक्रीट से जाम किया जा रहा है।

900 से ज्यादा पिलर तैयार

एनसीआरटीसी ने एलिवेटेड ट्रैक के निर्माण कार्य के तहत अब तक 900 से ज्यादा पिलर तैयार कर लिए हैं। इसके साथ ही आठ किमी का आरआरटीएस वायाडक्ट तैयार हो चुका है। इस पर ट्रैक बिछाने का काम भी शुरू हो चुका है।

24 से रूट का डायवर्जन

रैपिड रेल के की वजह से 24 जुलाई से डायवर्जन शुरू हो जाएगा। जाम न लगे, इसलिए अतिक्रमण भी हटाया जा चुका है। दिल्ली चुंगी के पास रैपिड टनल की शुरूआत होगी। यहीं से दिल्ली की तरफ से आने वाली रैपिड रेल अंदर प्रवेश करेगी। जिस स्थान से रैपिड एंट्री करेगी, उसका डाउन रैंप तैयार होगा।

मेरठ सेंट्रल पहला भूमिगत स्टेशन

मेरठ सेंट्रल के नाम से शहर का पहला भूमिगत स्टेशन भी होगा। इसलिए दिल्ली चुंगी से फुटबॉल चौराहे तक एक तरफ की सड़क बंद रहेगी। दिल्ली की तरफ से आने वाले जिन वाहनों को बेगमपुल-फुटबॉल चौराहे की तरफ जाना है, उन्हें बायीं तरफ ट्रांसपोर्ट नगर में मोड़ दिया जाएगा।

टीपी नगर की मुख्य सड़क से वाहन बागपत रोड पर पहुंचेंगे। केएमसी अस्पताल के सामने से होते हुए फुटबॉल चौराहे पर पहुंच जाएंगे। जो वाहन दिल्ली की तरफ जाना चाहेंगे, उनके लिए रूट डायवर्जन नहीं किया गया है।

छह मीटर नीचे हो रही टनल की खुदाई

मेरठ से दिल्ली के बीच चलने वाली रैपिड रेल की अंडर ग्राउंड टनल में आडे आ रहे अवरोध को हटाने का काम शुरू कर दिया गया है। टनल की खुदाई में बड़ी संख्या में पानी के भारी भरकम पाइप व अंडर ग्राउंड वायरिंग आडे आ रही है।

आरआरटीएस की सुरंग निर्माण से पहले यह कार्य माइको टलनिंग सिस्टम से किया जा रहा है। सबसे अच्छी बात तो यह है कि इस कार्य के दौरान आम लोगों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पडेगा।

एनसीआरटीसी के प्रवक्ता राजीव चौधरी ने बताया कि एनसीआरटीसी आनंद विहार आरआरटीएस साइट पर माइक्रो टनलिंग द्वारा दिल्ली जल बोर्ड की मौजूदा इंटरसेप्टर सीवर लाइन को डायवर्ट करने कर रहा है, क्योंकि यह इंटरसेप्टर सीवर लाइन इस स्थान पर बनाये जा रहे भूमिगत स्टेशन बनाने के रास्ते मे आ रही थी। इसका प्रयोग छोटी सुरंगों के निर्माण के लिए किया जाता है।

इस तकनीक के द्वारा करीब छह मीटर नीचे की गहराई पर लाइन बिछाई जाएगी। यात्रियों को परेशान किए बिना राजमार्गों, रेल मार्गों, रनवे, बंदरगाहों और पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों के नीचे विभिन्न व्यास की आरसीसी या कंक्रीट पाइप लाइनों को स्थापित करने के लिए एक कुशल, तेज और विश्वसनीय तरीका है।

जिसका प्रयोग एनसीआरटीसी कर रही है। इस तकनीक के द्वारा भीड़ भाड़ वाली सार्वजनिक जगह पर आवाजाही जारी रहेगी और कोई असुविधा नही होगी। एनसीआर में अगली पीढ़ी की यात्री रेल सेवा प्रदान करने के अलावा, एनसीआरटीसी द्वारा कई बुनियादी उपयोगिता व ढांचे का निर्माण भी किया जा रहा है जो आरआरटीएस कॉरिडोर के रास्ते में का आ रहे हैं।

दिल्ली जल बोर्ड की यह सीवर इंटरसेप्टर लाइन उनमें से एक है। एनसीआर के निवासियों को इस बेहतर बुनियादी ढांचे से बहुत लंबे समय तक लाभ होगा। यह देश में मौजूदा मेट्रो प्रणालियों में दो स्टेशनों के बीच सबसे लंबे सुरंग खंड होंगे।

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