- मूलभूत सुविधाएं हैं नहीं और नई योजनाओं को किया जा रहा शुरू
- पीएनजी को लेकर उद्यमी परेशान, चार गुणा बढ़ जायेगी कीमत
- एक पेपर मिल के पीएनजी सेटअप में आयेगा 60 से 100 करोड़ तक का खर्च
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: एनजीटी ने उद्यमियों को पीएनजी से उद्योग चलाने के लिये सेटअप तैयार करने के लिये 30 सितंबर तक का समय दिया है, लेकिन पीएनजी सेटअप तैयार करना यहां उद्यमियों के लिये आसान नहीं होगा। जहां उद्यमियों को अभी तक मूलभूत सुविधाएं तक नहीं मिली है। वहां पीएनजी सेटअप तैयार करना कैसे आसान हो सकता है। पीएनजी की बात करें तो अभी तक यहां पाइप लाइन नहीं है, गैस की उपलब्धता नहीं है और फिर भी पीएनजी सेटअप तैयार करने का दबाव डाला जा रहा है।
सबसे अधिक समस्याएं पेपर मिल के सामने आयेंगी। यहां एक पेपर मिल अगर पीएनजी सेटअप लगाती है तो इसके लिये उसे 60 से 100 करोड़ रुपये खर्च करने होंगे और इसमें दो से तीन साल का समय लगेगा। ऐसे में मजबूरन फैक्ट्रियों को बंद करना पड़ सकता है। उद्यमियों ने इसे लेकर अपनी समस्याओं को केन्द्रीय मंत्री के सामने रखने की बात कही है। शपथ ग्रहण होते ही जल्द ही उद्यमी केन्द्रीय मंत्री के सामने अपनी समस्याओं को रखेंगे।
बता दें कि एनजीटी की ओर से मेरठ में कोयला और डीजल का इस्तेमाल करने वाले सभी उद्यमियों को पीएनजी गैस का इस्तेमाल करने और इसका सेटअप तैयार करने के निर्देश दिये गये हैं। हालांकि अभी तक कोई ओदश जारी नहीं किया गया है, लेकिन सितंबर माह से पीएनजी से इनका संचालन किया जाना है। इसे लेकर उद्यमी परेशान हैं। यहां उद्यमी इसके दामों को लेकर भी परेशान हैं। गाजियाबाद समेत कई जिलों में पीएनजी के दाम काफी कम हैं और यहां अधिक है।
उद्यमियों की मानें तक अभी तक यहां कोई पाइप लाइन तक तैयार नहीं है। मूलभूत सुविधाएं तक उद्यमियों को नहीं मिल पा रही हैं और अब उन पर पीएनजी इस्तेमाल करने का दबाव डाला जा रहा है। इसे लेकर उद्यमी कई केन्द्रीय मंत्रियों तक के चक्कर लगा चुके हैं, लेकिन उनका समाधान होता नजर नहीं आ रहा है।
सेटअप तैयार करने में करोड़ों खर्च
पीएनजी सेटअप की बात की जाये तो जहां कोयले और डीजल का अधिक इस्तेमाल हो रहा है। वहां पीएनजी का सेटअप लगाने के लिये कहा गया है। पसवारा पेपर्स के एमडी विनोद अग्रवाल ने बताया कि पीएनजी सेटअप लगाना इतना आसान नहीं है। आज के समय में उद्यमियों को मूलभूत सुविधाएं तो मिल नहीं रही हैं। उनके ऊपर दबाव डाला जा रहा है। अभी तक भी गैस की उपलब्धता नहीं है।
पाइप लाइन नहीं है और मिलों को सप्ताह में दो दिन कभी चार दिन चलाने के निर्देश दिये जा रहे हैं। पीएनसी सेटअप अगर मिल में लगाना हो तो इसके लिये जेनसेट, बॉयलर आदि तैयार करने में 60 करोड़ से लेकर 100 करोड़ रुपये का खर्चा आयेगा और इसे विदेश से मंगवाना होगा। इसकी तैयारी में दो से तीन साल लग जाएंगे तब तक मिलें पूरी तरह से बर्बाद हो जाएंगी। उनके नुकसान की जिम्मेदारी कौन लेगा?
उन्होंने बताया कि अगर पीएनजी सेटअप तैयार होता है तो उनके उत्पाद का खर्च चार गुणा अधिक बढ़ जायेगा। जिससे प्रोडक्ट महंगा हो जायेगा। उन्होंने कहा कि वह कई बार इन समस्याओं को राज्य सरकार और केन्द्र सरकार के सामने रख चुके हैं। अब यहां राज्य सरकार का शपथ ग्रहण समारोह होने के बाद उनका एक प्रतिनिधिमंडल केन्द्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से मिलेगा और उनके सामने अपनी समस्याओं को रखेगा।
फैक्ट्रियों को चलाने में मुसीबतें झेलते हैं उद्यमी
आईआईए अध्यक्ष सुमनेश अग्रवाल ने बताया कि उद्यमियों को मूलभूम सुविधाएं तो मिल नहीं पाती, लेकिन कागजात तैयार करने के लिये उनका शोषण किया जाता है। एक फैक्ट्री को शुरू करने के लिये कभी नगर निगम, फायर विभाग, प्रदूषण विभाग न जाने कौन से विभाग से प्रमाण पत्र लेना होता है?
पहले उद्यमी फैक्ट्री लगाने के लिये परेशान होता है और फिर बाद में उसे सही प्रकार से चलाने के लिये भी उसे कई समस्याओं से जूझना पड़ता है। वर्तमान में एनजीटी ने उद्योगों पर डंडा कर रखा है कि वह पीएनजी सेटअप लगाकर उद्योगों को चलाये। कोयले और डीजल का इस्तेमाल न करें, लेकिन मेरठ में हजारों की संख्या में ऐसी फैक्ट्री हैं जो इस समय प्रभावित हैं। उन्होंने कहा कि अगर यही हाल रहे तो एक दिन फैक्ट्रियों पर ताले पड़ जायेंगे।

