
जब किसी के मन में कुंठा छा जाए, शारीरिक व मानसिक शक्ति क्षीण होने लगे, आत्म-विश्वास में कमी का अहसास होने लगे तो सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि वह व्यक्ति थकान से ग्रसित है। वैसे भी आज की भाग-दौड़ भरी जिंदगी में शरीर का थक जाना स्वाभाविक है, किंतु कभी-कभी यही थकान कई घातक रोग जैसे माइग्रेन, हृदयाघात, डिप्रेशन व भयंकर सरदर्द आदि को जन्म दे देती है। इस स्थिति में व्यक्ति स्वयं को संसार का सबसे अधिक दु:खी, निरीह, उदास व अकेला महसूस करने लगता है और ऐसे में नशे आदि का सहारा लेने से भी गुरेज नहीं करता।
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जब व्यक्ति हर समय तनावग्रस्त रहता हो, मसालेदार व तला-भुना भोजन अधिक खाये, रात को पूरी नींद न ले अथवा दिन में देर से सोये तो थकान के साथ-साथ कई अन्य बीमारियां बुखार, मलेरिया, टायफायड, खांसी आदि होने का खतरा भी बना रहता है। कभी-कभी देर तक कम रोशनी में पढ़ना, तेज धूप अथवा बारिश में घूमना व खाली पेट श्रम करने से भी थकान हो जाया करती है।
चिकित्सकों का मानना है कि थकान का वास्तविक अर्थ है शरीर के आंतरिक क्रिया कलापों का अव्यवस्थित हो जाना। दरअसल शरीर को पर्याप्त ऊर्जा की आवश्यकता होती है जो संतुलित भोजन से प्राप्त ग्लायकोजिन से मिलती है।
श्वास लेने व छोड़ने की प्रक्रिया में आक्सीजन के साथ रसायनिक प्लवन से कार्बन-डाइआक्साइड व लैक्टिक अम्ल बनते हैं और जब यह दोनों ही तत्व शरीर में एक ही स्थान पर एकत्र हो जाते हैं तो मांसपेशियां अपेक्षाकृत विपरीत कार्य करने लगती हैं, जिससे थकान उत्पन्न हो जाती है।
कई बार यह थकान कई घातक रोगों को भी अपने साथ ले आती है जिनमें उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, पेट का अल्सर, रक्त की कमी, मधुमेह और गुरदे की बीमारी प्रमुख हैं।
इसके अलावा स्वभाव में चिड़चिड़ापन, वजन बढ़ना, हाथ-पैरों में सूजन, कब्ज, बाल झड़ना और आवाज भी भारी हो जाती है जो व्यक्ति की मानसिक व शारीरिक कमजोरी का फायदा उठाकर उसे इस हद तक कुंठित कर देती है कि वह अपनी प्रत्येक क्षमता से हाथ धो बैठता है और समाज की हेय दृष्टि का पात्र बन जाता है।
- घबराहट होने पर कुछ देर गहरी सांस लें और पानी पीकर काम शुरू करें।
- प्रतिदिन सुबह व्यायाम, तैराकी, टहलने और संभव हो तो साइकिल चलाने की आदत डालें।
- रात्रि विश्राम के लगभग दो घण्टे पूर्व से कोई भी मानसिक काम न करें।
- संभव हो तो सोने से पहले टहलना चाहिए तथा सोते समय एक गिलास गर्म व मीठा दूध पियें।
- भोजन में दूध, फलों का रस, साबुत दालें, हरी सब्जियां, पौष्टिक पदार्थ लें तथा खूब पानी पियें।
- शारीरिक श्रम के बाद आराम करें और मानसिक कार्य करते समय ध्यान रखें कि सिर व आंखों में दर्द न हो।
- समस्याओं के निदान परिवार में व मित्रों में खोजें न कि स्वयं देर तक सोचकर या मस्तिष्क पर जोर देकर।
मनु भारद्वाज


