- सीएम पोर्टल पर की गई थी शिकायत, कार्रवाई नदारद
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: मुख्यमंत्री पोर्टल (जनसुनवाई) पर विभिन्न विभागों की करीब चार हजार शिकायतें मेरठ से दर्ज की गई। ये रिकॉर्ड शिकायत हैं, इसमें सबसे टॉप पर एमडीए हैं, जिसकी सर्वाधिक शिकायत हुई, लेकिन निस्तारण के नाम पर कुछ नहीं हुआ। 15 दिन बीतने पर शिकायत को पेंडिंग में डाल दिया जाता हैं।
इस तरह से मुख्यमंत्री पोर्टल (जनसुनवाई) पर की जाने वाली शिकायतों को भी गंभीरता से प्रशासनिक अफसरों द्वारा नहीं लिया जा रहा हैं। हालांकि कमिश्नर सुरेन्द्र सिंह ने शिकातयों को गंभीरता से लेने और समस्याओं का समाधान कराने के लिए अधिकारियों की टीम लगाई हैं। इसके बाद कुछ परिवर्तन हो जाए तो चमत्कार हो जाएगा, लेकिन लंबे समय से निस्तारण के नाम पर शिकायत को ही पेंडिंग में डाल दिया जाता हैं। अब तक तो ऐसा ही हो रहा था।
प्रशासनिक स्तर पर जो जनसुनवाई की शिकायतें आयी हैं, उनको सिटी मजिस्ट्रेट व एसडीएम तो खुद देख ही रहे हैं, बल्कि एडीएम स्तर के अधिकारियों की तैनाती डीएम दीपक मीणा ने की हैं। प्रशासन शिकायतों को 15 से 30 दिन में कैसे निस्तारित कर पाते हैं, यह उनके लिए भी बड़ी चुनौती हैं। क्योंकि जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायतों का निस्तारण होने की सूचना अपलोड कर पूरे मामले को पेंडिंग डाला जा रहा हैं।
ऐसे एक-दो मामले नहीं, बल्कि कई मामले सामने आये हैं, जिसमें डीएम स्तर से सख्ती करनी होगी, तभी इन शिकायतों का निस्तारण संभव हो सकता हैं। एमडीए की सर्वाधिक शिकायत आ रही हैं, जिनको एमडीए इंजीनियर स्तर से गंभीरता के साथ नहीं लिया जाता हैं। यही वजह है कि सर्वाधिक एमडीए की शिकायत जनसुनवाई पोर्टल पर पेंडिंग पड़ी हुई हैं।
उनके गलत जवाब इंजीनियरों की तरफ से लगा दिये जाते हैं, जिसके चलते शिकायतकर्ता परेशान रहते हैं। कुछ जानबुझकर भी इस तरह से किया जा रहा हैं। शिकायत को एमडीए के इंजीनियर अतिरिक्त बोझ समझते हैं, जिसके बाद ही शिकातयों को पेडिंग में डाल देते हैं।
उनके गलत जवाब देते हैं। इस तरह से इन शिकायतों पर कोई कार्रवाई नहीं होती। फिर पन्द्रह दिन व तीस दिन तक इस तरह से मामले को लंबित कर लटकाया जाता हैं। शिकायतकर्ता फिर से शिकायतकर्ता हैं। इस तरह से शिकायत भी जनसुनवाई पर बढ़ रही हैं।
नगर निगम में भी कुछ वैसा ही हाल चल रहा हैं। यहां भी शिकायत खूब हो रही हैं, लेकिन समाधान नहीं हो रहा हैं। एक-एक मामलों की शिकायत कई-कई बार शिकायत की जा रही हैं, समस्या का समाधान फिर भी नहीं हो रहा हैं। प्रशासनिक स्तर पर समस्याओं को लेकर सख्ती की जाए तो इन समस्याओं का निस्तारण होगा।
कमिश्नर स्तर से अधिकारियों की एक टीम बनाई हैं, जो वर्तमान में समस्याओं का निस्तारण करने में लगाई गई हैं। अब देखना यह है कि अधिकारियों की टीम किस तरह से शिकायतों का निस्तारण करा पाती है या फिर नहीं।

